किसानों को दी जा रही डिजिटल पहचान, दो चरण में चलाया जा रहा अभियान
औरंगाबाद शहर. किसानों को डिजिटल पहचान से आच्छादित करने की दिशा में सरकार की पहल के अंतर्गत डीएम अभिलाषा शर्मा के निर्देशानुसार जिले में फार्मर रजिस्ट्री–किसान की डिजिटल पहचान अभियान को प्रभावी रूप से संचालित किया जा रहा है. अभियान के तहत दो चरणों में पंचायत स्तरीय शिविरों का आयोजन कर किसानों की फार्मर आईडी तैयार किया जा रहा है. प्रथम चरण के अंतर्गत छह से नौ जनवरी तक तथा द्वितीय चरण के अंतर्गत 18 से 21 जनवरी तक शिविर का आयोजन निर्धारित है. इसी क्रम में गुरुवार को जिले के सभी प्रखंडों की विभिन्न पंचायतों में पंचायत सरकार भवनों व अन्य सरकारी भवनों में पंचायतवार शिविरों का आयोजन किया गया. इन शिविरों में कृषि समन्वयक, किसान सलाहकार एवं राजस्व कर्मचारी ने उपस्थित रहकर किसानों की फार्मर रजिस्ट्री एवं इ-केवाइसी से संबंधित कार्यों को पूर्ण किया. अभियान को कैंप मोड में सफलतापूर्वक संचालित करने के उद्देश्य से जिला के वरीय पदाधिकारी, उप विकास आयुक्त अनन्या सिंह, अपर समाहर्ता अनुग्रह नारायण सिंह सहित अन्य जिला स्तरीय पदाधिकारी शिविर स्थलों पर स्वयं जाकर निरीक्षण एवं निगरानी किये तथा आवश्यक दिशा-निर्देश भी प्रदान किये. जिले के सभी प्रखंडों में आयोजित शिविरों के माध्यम से 3199 किसानों की फार्मर रजिस्ट्री तथा 10964 किसानों का इ-केवाइसी कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किया गया है. जिला प्रशासन द्वारा जिले के सभी किसानों से अपील की गयी है कि वे आवश्यक दस्तावेजों के साथ निर्धारित पंचायतस्तरीय शिविरों में स्वयं उपस्थित होकर अपनी फार्मर रजिस्ट्री एवं इ-केवाइसी कराना सुनिश्चित करें, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर, पारदर्शी एवं सुगम रूप से प्राप्त हो सके.योजनाओं का लाभ लेने में होगी आसानी
शिविरों के माध्यम से किसानों का इ-केवाइसी सत्यापन एवं फार्मर रजिस्ट्रेशन कराया जा रहा है, जिसके फलस्वरूप विभिन्न सरकारी योजनाओं की अनुदान व लाभ की राशि प्रत्यक्ष रूप से लाभुकों के बैंक खाते में अंतरण की जायेगी. जिला प्रशासन द्वारा यह स्पष्ट किया गया है कि ई-केवाईसी एवं फार्मर रजिस्ट्रेशन कराने से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना अथवा सार्वजनिक वितरण प्रणाली (राशन कार्ड) से प्राप्त होने वाले लाभों पर किसी प्रकार का कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा. यह भी अवगत कराया गया है कि जिन किसानों की लगान रसीद या जमाबंदी उनके पूर्वजों के नाम पर दर्ज है, ऐसे प्रकरणों में संबंधित परिवार के सदस्य अपने मोबाइल नंबर के साथ शिविर में उपस्थित होकर ओटीपी आधारित प्रमाणीकरण के माध्यम से फार्मर रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं. शिविरों में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सर्वप्रथम कृषि समन्वयक, किसान सलाहकार द्वारा ई-केवाईसी की कार्रवाई की जा रही है. इसके बाद अंचल, हल्का कर्मचारी द्वारा भूमि संबंधित अभिलेखों का सत्यापन किया जा रहा है. सत्यापन के बाद आवश्यक साइनिंग व प्रमाणीकरण की प्रक्रिया पूर्ण कर फार्मर आईडी का सृजन किया जा रहा है. फार्मर रजिस्ट्री के माध्यम से कृषकों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की आगामी किस्तों का निर्बाध लाभ, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कृषि उपज के विक्रय में सुविधा, फसल क्षति की स्थिति में क्षतिपूर्ति तथा अन्य कृषि कल्याणकारी योजनाओं का पारदर्शी एवं सुगम लाभ प्राप्त होगा.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

