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जयंती पर याद किये गये गोस्वामी तुलसीदास

Updated at : 01 Aug 2025 5:00 PM (IST)
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जयंती पर याद किये गये गोस्वामी तुलसीदास

तुलसीदास ने अपनी कालजयी रचनाओं से भगवान श्रीराम के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाया

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तुलसीदास ने अपनी कालजयी रचनाओं से भगवान श्रीराम के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाया औरंगाबाद नगर. जनेश्वर विकास केंद्र एवं साहित्य संवाद के तत्वावधान में शहर के अधिवक्ता संघ भवन में रामचरितमानस के रचनाकार गोस्वामी तुलसीदास की जयंती मनायी गयी. इस अवसर पर संगोष्ठी सभा व कवि-कला प्रेमी सम्मान समारोह आयोजित हुई. अध्यक्षता अध्यक्ष रामजी सिंह ने की. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पंचदेव धाम मंदिर के संस्थापक अशोक सिंह, विष्णु धाम महोत्सव के अध्यक्ष अजीत सिंह, समकालीन जवाबदेही पत्रिका के संपादक डॉ सुरेंद्र प्रसाद मिश्र, ज्योर्तिविद शिवनारायण सिंह, अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष संजय सिंह, कवियत्री सुषमा सिंह, साहित्यकार रामकिशोर सिंह, वरीय अधिवक्ता परमेंद्र मिश्रा आदि ने दीप प्रज्वलन कर व गोस्वामी तुलसीदास के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की. जन विकास परिषद के उपाध्यक्ष रामचंद्र सिंह, खेल कौशल के संयोजक वीरेंद्र सिंह, साहित्य संवाद के अध्यक्ष लालदेव प्रसाद, जन विकास परिषद के उपाध्यक्ष अशोक सिंह, प्रो दिनेश प्रसाद, शिक्षक बैजनाथ सिंह, सुरेश सिंह आदि ने अतिथियों का स्वागत किया. तुलसीदास के ऊपर काव्य पाठ करने व संगीत प्रस्तुति के लिए अतिथियों ने नंदनी पाठक, रिया पाठक, राम श्याम, रौनक गगन, मुकेश चौबे, धर्मेंद्र यादव, पिंटू कुमार, कवि लवकुश प्रसाद, कवियत्री सुषमा सिंह, कवि रामकिशोर सिंह को सम्मानित किया. रिया पाठक व नंदिनी पाठक ने अपनी मधुर आवाज से खूब तालियां बटोरी. कलाकारों की प्रस्तुति को लोगों ने सराहा. वक्ताओं ने गोस्वामी तुलसीदास के रामचरितमानस की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि तुलसीदास की जयंती केवल एक संत की जयंती नहीं, बल्कि भारतीय भक्ति व साहित्य की गौरवपूर्ण विरासत का उत्सव है. तुलसीदास जी ने अपनी कालजयी रचनाओं के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाया. उन्होंने भक्ति को सिर्फ एक धार्मिक कर्तव्य नहीं, बल्कि जीवन जीने की प्रेरणादायक शैली के रूप में स्थापित किया. उनकी रचनाएं आज भी धर्म, नैतिकता और भक्ति के स्थायी तथा अमूल्य स्त्रोत हैं. सचिव सिद्धेश्वर विद्यार्थी ने कहा कि गोस्वामी जी कहते हैं कि शरीर मानो खेत है, मन मानो किसान है. जिसमें यह किसान पाप और पुण्य रूपी दो प्रकार के बीजों को बोता है. जैसे बीज बोएगा वैसे ही इसे अंत में फल काटने को मिलेंगे. भाव यह है कि यदि मनुष्य शुभ कर्म करेगा तो उसे शुभ फल मिलेंगे और यदि पाप कर्म करेगा तो उसका फल भी बुरा ही मिलेगा. कार्यक्रम का संचालन कला कौशल मंच के अध्यक्ष आदित्य श्रीवास्तव ने की. मौके पर विनय सिंह, वीरेंद्र सिंह, नारायण सिंह, सिंघेश्वर सिंह, युवा ज्योतिषाचार्य ओम प्रकाश पाठक, मधुसूदन तिवारी, अशोक सिंह, प्रमोद सिंह आदि मौजूद थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SUJIT KUMAR

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