औरंगाबाद शहर. किसानों को डिजिटल पहचान से जोड़ने की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं दूरदर्शी पहल के तहत जिलाधिकारी अभिलाषा शर्मा के निर्देशानुसार जिले में फार्मर रजिस्ट्री–किसान की डिजिटल पहचान अभियान को मिशन मोड में व्यापक, सघन व चरणबद्ध रूप से संचालित किया जा रहा है. वित्तीय वर्ष 2025–26 के अंतर्गत डिजिटल एग्रीकल्चरके तहत जिले के सभी प्रखंडों में पंचायत एवं हल्का स्तर पर कैंप आयोजित किये जा रहे हैं, जिनके माध्यम से जिले के सभी रैयत किसानों का फार्मर आइडी निर्माण एवं इ-केवाइसी की प्रक्रिया सुनिश्चित की जा रही है. फार्मर रजिस्ट्री, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर फॉर एग्रीकल्चर का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, जिसका उद्देश्य किसानों का एक समेकित, प्रामाणिक एवं अद्यतन डिजिटल डेटाबेस तैयार करना है, ताकि कृषि से संबंधित विभिन्न सरकारी योजनाओं, सब्सिडी, फसल बीमा, ऋण सुविधा एवं अन्य कल्याणकारी लाभों का वितरण सही एवं वास्तविक लाभार्थियों तक पारदर्शी, सुगम एवं समयबद्ध रूप से किया जा सके. इस अभियान के प्रभावी एवं सफल क्रियान्वयन हेतु कृषि विभाग, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, पंचायत राज संस्थाओं तथा अन्य संबंधित विभागों के पदाधिकारियों एवं कर्मियों के मध्य सुदृढ़ समन्वय स्थापित किया गया है. प्रत्येक प्रखंड में पंचायत एवं टोला, वार्ड स्तर तक कैंप तथा डोर-टू-डोर कैंपेन के माध्यम से किसानों को फार्मर रजिस्ट्री एवं ई-केवाईसी की महत्ता से अवगत कराते हुए अधिक से अधिक किसानों को इस डिजिटल प्रक्रिया से जोड़ा जा रहा है, ताकि कोई भी पात्र किसान योजना के लाभ से वंचित न रहे. जिला कृषि पदाधिकारी को फार्मर रजिस्ट्री एवं ई-केवाईसी अभियान का जिला स्तरीय नोडल पदाधिकारी नामित किया गया है. उनके द्वारा प्रतिदिन आयोजित कैंपे एवं डोर-टू-डोर अभियानों की प्रगति का सतत अनुश्रवण किया जा रहा है तथा समेकित प्रतिवेदन प्रतिदिन डीएम के समक्ष उपस्थापित किया जा रहा है. साथ ही, फार्मर रजिस्ट्री एवं ई-केवाईसी कार्य में उत्पन्न होने वाली तकनीकी समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए आईटी टीम की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है. अभियान की प्रभावी मॉनिटरिंग एवं मूल्यांकन हेतु जिला स्तर से बीएसडब्ल्यूएएन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा की जा रही है, जिसमें प्रखंडवार प्रगति, उपलब्धि एवं शेष लक्ष्य की विस्तृत समीक्षा करते हुए आवश्यक निर्देश निर्गत किए जा रहे हैं. इस निरंतर समीक्षा एवं अनुश्रवण के माध्यम से जिले में फार्मर रजिस्ट्री एवं ई-केवाईसी कार्य का शत-प्रतिशत् कार्यान्वयन सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे किसानों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाते हुए शासन की योजनाओं का लाभ अधिकतम स्तर तक पहुंचाया जा सके.
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