झारखंड की मूसलाधार बारिश से कोयल नदी में दिखने लगा पानी

Published by :SUJIT KUMAR
Published at :06 May 2026 6:14 PM (IST)
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झारखंड की मूसलाधार बारिश से कोयल नदी में दिखने लगा पानी

भरणी नक्षत्र के बीच झमाझम बारिश, खरीफ फसल के बेहतर उत्पादन की उम्मीद

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भरणी नक्षत्र के बीच झमाझम बारिश, खरीफ फसल के बेहतर उत्पादन की उम्मीदऔरंगाबाद कार्यालय.

बिहार के साथ-साथ झारखंड में भी पिछले कई दिनों से हो रही बारिश ने मौसम का मिजाज बदल दिया है. प्री-मानसून सक्रिय होने से यह संकेत मिल रहा है कि इस बार किसानों के लिए मौसम अनुकूल रह सकता है. जानकारी के अनुसार वर्तमान में भरणी नक्षत्र चल रहा है. 11 मई से कृतिका और 25 मई से रोहिणी नक्षत्र का प्रवेश होगा. इस दौरान हो रही झमाझम बारिश को कृतिका नक्षत्र के नकारात्मक प्रभाव को कम करने वाला माना जा रहा है. इससे किसानों में खरीफ फसल की अच्छी पैदावार की उम्मीद जगी है. झारखंड में लगातार बारिश के कारण उत्तर कोयल नदी में जलस्तर तेजी से बढ़ा है. रविवार से नदी में पानी का बहाव तेज हो गया है. जेठ की गर्मी में अचानक नदी का उफान किसानों के लिए राहत भरी खबर है. हालांकि बारिश के कारण नहर के लाइनिंग कार्य पर असर पड़ा है. नहर के बेड में पानी जमा होने से सीएनएस कार्य फिलहाल बंद हो गया है. वाप्कोस के अधिकारियों के अनुसार इस मौसम में नहर के बेड में कार्य कराना संभव नहीं है. स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार भीम बराज के पास बांध में रिसाव के कारण मैन कैनाल में पानी आने की बात कही जा रही है, हालांकि विभाग ने इसकी पुष्टि नहीं की है.

क्या कहते हैं अधिकारी

भीम बराज मोहम्मदगंज के कार्यपालक अभियंता विनीत प्रकाश ने बताया कि कोयल नदी में पानी की आमद काफी बढ़ गई है. बराज के सभी गेट डाउन कर जल भंडारण शुरू कर दिया गया है. नहर संचालन के लिए वाटर पोंड लेवल 2.30 मीटर होना चाहिए, जबकि अभी जलस्तर डेढ़ मीटर से ऊपर पहुंच चुका है. उन्होंने बताया कि जब तक नहर का लाइनिंग कार्य पूरा नहीं हो जाता, तब तक पानी बराज में रोका जाएगा. इसके बाद जून के अंतिम सप्ताह में टेस्टिंग के लिए नहर में पानी छोड़ा जायेगा. अधिकारी के अनुसार कुछ दिन पहले तक नदी का जलस्तर मात्र 20 सेंटीमीटर था, जो अब बढ़कर करीब डेढ़ मीटर हो गया है. फिलहाल लगभग 3000 क्यूसेक पानी नदी में प्रवाहित हो रहा है. बराज में जल भंडारण से आसपास के सैकड़ों गांवों में पेयजल समस्या दूर होने की संभावना है. साथ ही भूजल स्तर में सुधार होगा और बंद पड़े चापाकल फिर से चालू हो सकेंगे.

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