औरंगाबाद के इस मेले में बदली खरीदारी की तस्वीर, मिट्टी की कड़ाही बेचने वाली महिलाओं ने अपनाया डिजिटल भुगतान

Digital Payment Mela: औरंगाबाद के नवीनगर स्थित गजनाधाम मेले में ग्रामीण महिलाएं अब PhonePe और UPI के जरिए डिजिटल भुगतान स्वीकार कर रही हैं. डिजिटल इंडिया अभियान का असर अब गांवों और छोटे कारोबारियों तक साफ दिखाई दे रहा है.
Digital Payment Mela: औरंगाबाद जिले के नवीनगर प्रखंड स्थित प्रसिद्ध गजनाधाम मंदिर परिसर में इन दिनों आस्था के साथ-साथ डिजिटल इंडिया की भी अनोखी तस्वीर देखने को मिल रही है. माता को चढ़ने वाले प्रसाद में उपयोग होने वाली मिट्टी की कड़ाही और अन्य पूजन सामग्री बेचने वाली ग्रामीण महिलाएं अब डिजिटल भुगतान के माध्यम से अपना कारोबार कर रही हैं. उनकी दुकानों पर नकद के साथ-साथ फोनपे (PhonePe) और अन्य यूपीआई (UPI) भुगतान के क्यूआर कोड भी ग्राहकों का स्वागत कर रहे हैं.
मेले में श्रद्धालु कर रहे हैं डिजिटल भुगतान
गजनाधाम मंदिर में दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु प्रसाद चढ़ाने के लिए मिट्टी की कड़ाही और अन्य पूजन सामग्री खरीदते हैं. पहले अधिकांश लेन-देन नकद में होता था, लेकिन अब बदलते समय के साथ ग्रामीण महिलाएं भी डिजिटल तकनीक का लाभ उठा रही हैं. दुकानों पर रखे क्यूआर कोड इस बात का प्रमाण हैं कि डिजिटल भुगतान अब गांवों और छोटे कारोबारियों तक भी तेजी से पहुंच चुका है.
खुले पैसे की समस्या से मिली राहत
मिट्टी की कड़ाही बेच रही सोनी देवी, सुमित्रा देवी और फुलवा देवी ने बताया कि पहले ग्राहकों के पास खुले पैसे नहीं होने से खरीद-बिक्री में काफी परेशानी होती थी. कई बार छुट्टे पैसे के अभाव में बिक्री भी प्रभावित हो जाती थी.
उन्होंने बताया कि अब अधिकांश श्रद्धालुओं के मोबाइल में यूपीआई आधारित डिजिटल भुगतान की सुविधा उपलब्ध है. ऐसे में ग्राहक आसानी से फोनपे, गूगल पे, भीम यूपीआई या अन्य डिजिटल माध्यमों से भुगतान कर देते हैं.
छोटे कारोबारियों के लिए आसान हुआ व्यापार
महिलाओं का कहना है कि डिजिटल भुगतान अपनाने के बाद उनका कारोबार पहले की तुलना में अधिक आसान और सुरक्षित हो गया है. नकदी रखने का जोखिम कम हुआ है और भुगतान सीधे बैंक खाते में पहुंच जाता है. इससे हिसाब-किताब रखने में भी सुविधा हो रही है.
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में डिजिटल क्रांति की मिसाल
गजनाधाम मंदिर परिसर की यह तस्वीर केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि बदलते भारत की भी कहानी बयां कर रही है. जहां कभी छोटे दुकानदार पूरी तरह नकदी पर निर्भर थे, वहीं अब ग्रामीण महिलाएं भी डिजिटल तकनीक अपनाकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं.
यह बदलाव दर्शाता है कि डिजिटल इंडिया अभियान का प्रभाव अब शहरों से निकलकर गांवों, मेलों और छोटे स्थानीय व्यवसायों तक पहुंच चुका है. इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलने के साथ-साथ छोटे कारोबारियों का व्यापार भी आधुनिक और सुविधाजनक बन रहा है.
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