औरंगाबाद : दाउदनगर के 166 साल पुराने जिउतिया लोकोत्सव को मिली नई पहचान, बिहार सांस्कृतिक कैलेंडर 2026 में हुआ शामिल

Author Om Prakash|Edited by Sakshi Kumari
Updated:
विज्ञापन
कसेरा टोली में भगवान जीमूतवाहन की प्रतिमा

कसेरा टोली में भगवान जीमूतवाहन की प्रतिमा

दाउदनगर का ऐतिहासिक जिउतिया लोकोत्सव अब बिहार सरकार के सांस्कृतिक कैलेंडर 2026 का हिस्सा बन गया है. यह पहली बार है जब इस 166 साल पुरानी परंपरा को राजकीय पहचान मिली है, जिससे स्थानीय लोगों में खुशी की लहर है.

विज्ञापन

Daudnagar Jiutiya Folk Festival : दाउदनगर की सांस्कृतिक पहचान को बड़ी उपलब्धि मिली है. बिहार सरकार के कला, संस्कृति एवं युवा विभाग द्वारा जारी वर्ष 2026 के सांस्कृतिक कैलेंडर में पहली बार ऐतिहासिक जिउतिया लोकोत्सव को स्थान दिया गया है. लंबे समय से इस लोक पर्व को राजकीय पहचान दिलाने की मांग की जा रही थी. अब इसे राज्य के प्रमुख सांस्कृतिक आयोजनों की सूची में शामिल किए जाने से स्थानीय लोगों और कलाकारों में खुशी का माहौल है.

Daudnagar Jiutiya Folk Festival : पहली बार राज्य के सांस्कृतिक कैलेंडर में शामिल हुआ जिउतिया लोकोत्सव

बिहार सरकार के कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के सांस्कृतिक कार्य निदेशालय ने वर्ष 2026 का सांस्कृतिक कैलेंडर जारी कर दिया है. इस बार औरंगाबाद जिले के दाउदनगर में आयोजित होने वाले ऐतिहासिक जिउतिया लोकोत्सव को पहली बार राज्य के आधिकारिक सांस्कृतिक कैलेंडर में शामिल किया गया है. इसे दाउदनगर की लोक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है.

Aurangabad News : कई प्रमुख महोत्सवों के साथ मिला स्थान

जारी कैलेंडर में औरंगाबाद जिले के अंबे उत्सव, गजना महोत्सव, सूर्य रथ महोत्सव, देवकुंड महोत्सव, पुनपुन महोत्सव, सूर्य महोत्सव, सोननद महोत्सव, मां सतचंडी धाम महोत्सव और पितृपक्ष महोत्सव के साथ जिउतिया लोकोत्सव को भी शामिल किया गया है. सांस्कृतिक कैलेंडर में इसे चार दिवसीय लोक उत्सव के रूप में दर्ज किया गया है.

अनुदान राशि का फैसला अभी बाकी

विभाग ने अन्य सांस्कृतिक आयोजनों के लिए 2 लाख रुपये से 15 लाख रुपये तक की अनुदान राशि निर्धारित की है. हालांकि, जिउतिया लोकोत्सव के लिए अभी किसी वित्तीय सहायता की घोषणा नहीं की गई है. स्थानीय स्तर पर उम्मीद जताई जा रही है कि आगामी चरण में इसके लिए भी अनुदान स्वीकृत किया जाएगा.

166 साल पुरानी परंपरा से जुड़ा है यह लोक उत्सव

दाउदनगर का जिउतिया पर्व अपनी अनूठी परंपरा और सांस्कृतिक विशेषताओं के कारण पूरे बिहार में अलग पहचान रखता है. स्थानीय मान्यताओं और प्रचलित झूमर गीतों के अनुसार इसकी शुरुआत संवत 1917 (वर्ष 1860) में हुई थी. सितंबर-अक्टूबर में आयोजित होने वाले इस पर्व को स्थानीय स्तर पर 'नकल पर्व' के नाम से भी जाना जाता है. आठ से नौ दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, पारंपरिक झांकियां और भगवान जीमुतवाहन की पूजा-अर्चना प्रमुख आकर्षण होती हैं.

विभाग ने जिलों को जारी किए आवश्यक निर्देश

कला एवं संस्कृति विभाग की निदेशक रूबी द्वारा जारी अधिसूचना में सभी जिलाधिकारियों, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारियों और संबंधित संस्थाओं को निर्देश दिया गया है कि वे अपने सांस्कृतिक कार्यक्रमों का विस्तृत विवरण समय पर विभाग को उपलब्ध कराएं. साथ ही किसी भी कार्यक्रम के उद्घाटन से कम से कम 15 दिन पहले आवश्यक सूचनाएं विभाग को भेजने को कहा गया है.

मुख्य पार्षद ने जताया आभार

नगर परिषद दाउदनगर की मुख्य पार्षद अंजलि कुमारी ने इस उपलब्धि पर दाउदनगर की जनता, जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय लोक कलाकारों का आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि जिउतिया दाउदनगर की सांस्कृतिक पहचान है और इसे राज्य के सांस्कृतिक कैलेंडर में शामिल किया जाना पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है. उनके अनुसार इससे इस लोक उत्सव को नई पहचान मिलेगी और इसकी समृद्ध परंपरा आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रह सकेगी.

Also Read : औरंगाबाद सदर अस्पताल में हाउसकीपिंग और लाउंड्री सेवा का शुभारंभ, जीविका को मिली जिम्मेदारी


विज्ञापन
Om Prakash

लेखक के बारे में

By Om Prakash

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन