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Aurangabad News : चिंताजनक : सदर अस्पताल में 21 महीने में मिले कैंसर के 36 मरीज

Updated at : 22 Jun 2025 11:12 PM (IST)
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Aurangabad News : चिंताजनक : सदर अस्पताल में 21 महीने में मिले कैंसर के 36 मरीज

ओरल, ब्रेस्ट और सर्विक्स कैंसर की हो रही जांच, बायोप्सी की भी सुविधा

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औरंगाबाद ग्रामीण. मॉडल अस्पताल का दर्जा प्राप्त सदर अस्पताल में कैंसर जांच के बाद अब यहां बायोप्सी जांच की भी सुविधा उपलब्ध करायी गयी है. इसके पहले लोगों को बायोप्सी जांच के लिए पटना या अन्य दूसरे महानगर में जाने की जरूरत पड़ती थी. जांच की सुविधा बहाल किये जाने के बाद लोगों को सुविधा हो रही है. सदर अस्पताल में नवंबर 2022 से कैंसर की स्क्रीनिंग शुरू हुई थी. अब तक 21 महीने में 36 मरीजों में कैंसर की पुष्टि हो चुकी है. अस्पताल के नये भवन के पहले तल पर एनसीडी क्लिनिक में जांच की सुविधा है. यहां ओरल, ब्रेस्ट और सर्विक्स कैंसर की जांच की जा रही है. अप्रैल 2024 तक 34 हजार 476 लोगों की स्क्रीनिंग हो चुकी है. इनमें 12 हजार 422 पुरुष व 22 हजार 054 महिलाएं शामिल हैं. ओरल कैंसर की जांच में एक हजार 208 लोग संदिग्ध पाये गये. इनमें से 134 को उच्च जोखम वाली श्रेणी में रखा गया है. 11 मरीजों में ओरल कैंसर की पुष्टि हुई. ब्रेस्ट कैंसर की जांच में आठ हजार 305 महिलाओं की स्क्रीनिंग हुई. इसमें 20 को संदिग्ध और 16 को उच्च जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया है. छह महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर की पुष्टि हुई. सर्विक्स कैंसर की जांच में एक हजार 443 महिलाओं की स्क्रीनिंग हुई. इनमें 194 को उच्च जोखिम में रखा गया. सात महिलाओं में सर्विक्स कैंसर की पुष्टि हुई. डॉ अजितेश कुमार ने बताया कि सदर अस्पताल में बायोप्सी की सुविधा है. रिपोर्ट मिलने के बाद इलाज शुरू किया जाता है. यहां इलाज पूरी तरह मुफ्त है. अब तक 22 मरीजों का इलाज चल रहा है. तीन मरीज पूरी तरह ठीक हो चुके हैं. उन्होंने बताया कि ब्रेस्ट कैंसर के लिए सीनियर कंसल्टेट नहीं है, लेकिन ओरल कैंसर का बायोप्सी सदर अस्पताल में कराया जाता है. गर्भाशय के मुंह के कैंसर की जांच भी होती है. गायनी ओपीडी में नर्सेंज और डॉक्टर के द्वारा कराया जाता है. 25 से 30 चक्र तक इलाज की जरूरत : डॉ अजितेश ने बताया कि कैंसर लाइलाज नहीं है. समय पर पहचान और इलाज से मरीज ठीक हो सकते हैं. कुछ मरीजों को कीमो और रेडिएशन के 25 से 30 चक्र तक इलाज की जरूरत पड़ती है. अस्पताल में पेशेंट नेविगेटर की व्यवस्था है. ये मरीजों के घर जाकर हालचाल लेते हैं और इलाज की जानकारी देते हैं. उन्होने बताया कि ग्रामीण इलाकों से ज्यादा मरीज सामने आ रहे हैं. पुरुषों में ओरल और महिलाओं में ब्रेस्ट व सर्विक्स कैंसर के मामले अधिक हैं. जागरूकता की कमी है. गुटखा, खैनी, धूम्रपान, शराब और कसैली चीजों के सेवन से मुंह का कैंसर होता है. मुंह में तीन हफ्ते से ज्यादा समय तक छाले या जख्म रहना, मुंह न खुलना इसके लक्षण हैं. स्तन में गांठ होना ब्रेस्ट कैंसर का संकेत है. महिलाओं को अधिक दिनों तक धात गिरने की समस्या हो तो सर्विक्स कैंसर की जांच करानी चाहिए. डॉक्टरों ने कहा कि कैंसर का नाम सुनते ही लोग डर जाते हैं, लेकिन शुरुआती स्टेज में पहचान हो जाए तो इलाज संभव है. मरीज के बचने की संभावना 99 प्रतिशत तक होती है. थर्ड और फोर्थ स्टेज में परेशानी बढ़ जाती है. इसलिए समय पर जांच जरूरी है. अस्पताल में स्क्रीनिंग की सभी सुविधाएं मुफ्त में उपलब्ध हैं और अधिक से अधिक लोग आकर जांच कराएं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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PANCHDEV KUMAR

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PANCHDEV KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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