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मिट्टी जांच कराते रहने से किसानों को उर्वरक के प्रयोग में होेगी सहूलियत : दीपक

Updated at : 29 Aug 2025 7:11 PM (IST)
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मिट्टी जांच कराते रहने से किसानों को उर्वरक के प्रयोग में होेगी सहूलियत : दीपक

सूही गांव में किसान प्रशिक्षण का आयोजन कर मृदा स्वास्थ्य कार्ड व पोषक तत्व का किया गया वितरण

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सूही गांव में किसान प्रशिक्षण का आयोजन कर मृदा स्वास्थ्य कार्ड व पोषक तत्व का किया गया वितरण

औरंगाबाद/कुटुंबा. खेतों की मिट्टी जांच कराते रहने से उसके स्वास्थ्य के बारे में पता चल जाता है. इससे उर्वरक के प्रयोग करने में किसान को सहुलियत होती है. ये बातें प्रखंड के सूही गांव में आयोजित मृदा स्वास्थ्य कार्ड जागरुकता सह सूक्ष्म पोषक तत्व वितरण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सहायक निदेशक रसायन मिट्टी जांच प्रयोगशाला डॉ दीपक कुमार ने कही. शुक्रवार को उक्त गांव में किसानो के बीच कार्यक्रम आयोजित किया गया. उन्होंने कहा कि स्वायल हेल्थ कार्ड योजना खेतिहरों के लिए बहुत हीं कारगर है. इससे मिट्टी में मौजूद पोषक तत्व की जानकारी मिलती है. साथ ही मृदा स्वास्थ्य और उसकी उर्वरता में सुधार के लिए पोषक तत्वों की संतुलित मात्रा में फसलों में प्रयोग करने की सिफारिश भी करता है. उन्होंने बताया कि उपजाऊ भूमि की उर्वरा शक्ति बरकरार रखने के लिए पोषक तत्व का प्रयोग जरूरी है. औरंगाबाद के अधिकांश भू-भाग में बार-बार जुताई, अत्यधिक व असंतुलित मात्रा में रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग व फसल अवशेषों को जलाने के साथ नहर का पानी एक खेत से दूसरे खेत में बहते रहने के आदि गलत तकनीक के प्रचलन से मिट्टी में जैविक कार्बन की कमी हो गयी है. इस वजह से मिट्टी की उर्वरता शक्ति और पानी धारण करने की क्षमता कम हो जाती है. उत्पादन क्षमता पर भी काफी असर पड़ताल है. जैविक कार्बन बढ़ाने के लिए किसान को हरी खाद और फसल चक्र अपनाना चाहिए.

मिट्टी में पोषक तत्व जरूरी

सहायक निदेशक ने बताया कि औरंगाबाद में मिट्टी जांच प्रयोगशाला में मृदा स्वास्थ्य कार्ड के लिए 12 मापदंडों के संबंध में मिट्टी की स्थिति शामिल होती है. इसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, सल्फर, जींक, लोहा, कॉपर, मैगनीज बोरोन और पीएच (अम्लता या क्षारीयता), ईसी (विद्युत चालकता) और जैविक कार्बन आदि का प्रयोगशाला में जांच किया जाता है. जिले मे 500 हेक्टेयर भूमि में सूक्ष्म पोषक तत्व छिड़काव करने का लक्ष्य निर्धारित है. इसके लिए किसानो को प्रति हेक्टेयर 500 रुपये का अनुदान जींक उर्वरक कि खरीदारी करने पर दिया जायेगा. इस गांव के किसानों को अनुदानित दर पर पोषक तत्व दिया गया है.उन्होंने कहा कि सूक्ष्म पोषक तत्व के उपरिशन से बेहतर और पौष्टिक उत्पादन उपज प्राप्त होती है.

जैविक कार्बन में आ रही कमी

मौसम वैज्ञानिक डॉ अनूप चौबे ने बताया कि असंतुलित मात्रा में यूरिया के प्रयोग करने से मिट्टी के जैविक कार्बन में कमी आयी है. धान में जींक की कमी से पौधों की पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं, उन पर भूरे या लाल रंग के धब्बे दिखाई देते हैं, जिसे खैरा रोग कहते हैं. इसके अलावा, पौधों का विकास रुक जाता है और कल्लों की संख्या कम हो जाती है. इस कमी को दूर करने के लिए खेत में जिंक युक्त उर्वरक का प्रयोग करना चाहिए या जींक और चुना मिश्रण का घोल बनाकर पौधों पर छिड़काव करें. शुरुआत में पत्तियां हल्की पीली होती हैं, फिर उन पर भूरे या लाल रंग के धब्बे बनने लगते हैं, जो बाद में पूरे पत्ते पर फैल जाते हैं. मौके पर सुदर्शन पांडेय, प्रमोद पांडेय, अभिषेक सिंह, अनुज कुमार, विनय सिंह, रामश्रय पांडेय, राजेश कुमार, दुर्गेश यादव, अरविंद सिंह, विनय सिंह, धर्मेंद्र सिंह, अर्जुन पासवान सहित 25 किसानों के बीच अनुदानित दर पर जींक का वितरण किया गया. इस दौरान किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड का भी दिया गया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SUJIT KUMAR

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SUJIT KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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