औरंगाबाद: उत्तर कोयल नहर परियोजना के री-मॉडलिंग कार्य में लापरवाही से किसान परेशान, बराज का जलस्तर घटा

भीम बराज
औरंगाबाद के किसानों के लिए खरीफ सीजन मुसीबत बन गया है. अपर्याप्त बारिश और उत्तर कोयल सिंचाई परियोजना के री-मॉडलिंग कार्य में देरी ने खेतों को सूखा छोड़ दिया है. वाप्कोस एजेंसी की लापरवाही के कारण नहरों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है, जिससे किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं.
Aurangabad News: खरीफ सीजन में धान की रोपनी का उपयुक्त समय तेजी से निकलता जा रहा है. आगामी सोमवार से पुष्य नक्षत्र की शुरुआत होने वाली है, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं होने से खेत सूखे पड़े हैं. प्रकृति की इस बेरुखी ने स्थानीय किसानों की चिंता को काफी बढ़ा दिया है. मगध प्रक्षेत्र के किसानों की जीवन-रेखा मानी जाने वाली उत्तर कोयल सिंचाई परियोजना भी इस विकट समय में उम्मीदों पर खरी नहीं उतर रही है. गुरुवार से भीम बराज मोहम्मदगंज का वाटर पौंड लेवल लगातार नीचे जा रहा है, जिससे सिंचाई व्यवस्था पर गहरा संकट मंडराने लगा है.
वाप्कोस की संवेदनहीनता बनी मुसीबत
औरंगाबाद के कुटुंबा और अंबा क्षेत्र के किसानों का सीधा आरोप है कि उत्तर कोयल नहर से खेतों तक पानी नहीं पहुंचने का सबसे बड़ा कारण री-मॉडलिंग कार्य में लगी एजेंसी वाप्कोस की घोर लापरवाही है. पूर्व मुखिया ओंकार नाथ सिंह, पूर्व सरपंच अलखदेव प्रसाद सिंह, किसान अजीत कुमार एवं रामप्रवेश पांडेय सहित अन्य किसानों ने बताया कि क्रॉस रेगुलेटर (सीआर) और हेड रेगुलेटर (एचआर) का कार्य हर हाल में जून तक पूरा हो जाना चाहिए था. हालांकि, जुलाई आधा बीत जाने के बावजूद कई स्थानों पर निर्माण अधूरा है.
कई स्थानों पर गेट का कार्य अधूरा
जल संसाधन विभाग के अनुसार, केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय की ओर से उत्तर कोयल परियोजना के री-मॉडलिंग कार्य की जिम्मेदारी वाप्कोस को दी गई है. वाप्कोस ने आगे निर्माण कार्य कावेरी कंस्ट्रक्शन, हैदराबाद को सौंपा है. मेन कैनाल के 152.50 आरडी के समीप हेड रेगुलेटर सही तरीके से संचालित नहीं हो रहा है और वहां सीआर गेट ऑपरेटर सिस्टम नहीं लगा है. इसके अलावा 168.50 आरडी पर बसडीहा नहर में अभी एचआर गेट नहीं लगाया गया है, जबकि वहीं मेन कैनाल का सीआर गेट अब तक एडजस्ट नहीं किया गया है.
कमांड क्षेत्रों तक नहीं पहुंच रहा पानी
नहर परियोजना की लचर स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बालूगंज मोड़ के समीप 211 आरडी का सीआर गेट आज भी अधूरा है. बरिऑवा गांव के पास नहर में बनी अवैध दीवार भी अब तक नहीं हटाई गई है. इधर 210 आरडी पर बसडिहा माइनर का सीआर गेट तथा 224 आरडी पर कपसिया नहर के लिए क्रॉस रेगुलेटर का कार्य अधर में लटका है. गेट के ऊपर ऑपरेट सिस्टम नहीं लगने के कारण अंबा, नवीनगर और सदर डिवीजन की वितरणी, उप-वितरणी तथा लघु नहरों के कमांड क्षेत्र तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है.
अधिकारियों की गैर-जिम्मेदाराना प्रतिक्रिया
इस गंभीर समस्या को लेकर जब वाप्कोस के परियोजना प्रबंधक फारूक खान से फोन पर संपर्क कर क्रॉस रेगुलेटर और हेड रेगुलेटर का कार्य अब तक पूरा नहीं होने का तकनीकी कारण पूछा गया, तो उन्होंने इस संबंध में कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया. उन्होंने गैर-जिम्मेदाराना रुख अपनाते हुए कहा कि इसकी विस्तृत जानकारी कनीय अधिकारियों से ली जाए. एजेंसी के इस रवैये से स्थानीय किसानों में गहरा आक्रोश व्याप्त है.
जलस्तर घटने से मुख्य अभियंता चिंतित
उत्तर कोयल सिंचाई परियोजना के चीफ इंजीनियर अर्जुन प्रसाद सिंह ने तकनीकी स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि मुख्य नहर का भीम बराज का वाटर पौंड लेवल घटकर महज दो मीटर पर पहुंच गया है, जबकि आरएमसी के सुचारु संचालन के लिए कम से कम 2.40 मीटर जलस्तर का होना अत्यंत आवश्यक है. गुरुवार को मेन कैनाल में 918 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया जा रहा है. झारखंड सीमा स्थित 103 आरडी पर बिहार को 566 क्यूसेक पानी मिल रहा है, जिसमें से अंबा डिवीजन को 180 क्यूसेक पानी उपलब्ध कराया जा रहा है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही अच्छी बारिश नहीं हुई तो नहर का जल प्रवाह और अधिक प्रभावित हो सकता है.
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