औरंगाबाद के पहाड़ी जंगलों में तेंदूपत्ता तोड़ जिंदगी गुजार रहे लोग, बढ़ती महंगाई में कम मजदूरी से हैं परेशान
तेंदूपत्ता का बंडल बनाते ग्रामीण
Aurangabad News : जिले के मदनपुर प्रखंड के दक्षिणी इलाके जंगलों व पहाड़ों से घिरे ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों की आजीविका आज भी मुख्य रूप से वनउपज पर निर्भर है. रोजगार के स्थाई साधनों की कमी के कारण बड़ी संख्या में ग्रामीण हर वर्ष गर्मी के मौसम में तेंदूपत्ता संग्रहण का कार्य करने को मजबूर हैं, जहां भीषण गर्मी और कठिन परिस्थितियों में दिन-रात मेहनत करने के बावजूद उन्हें उचित मजदूरी नहीं मिल पा रही है.
औरंगाबाद से विनय सिंह किंकर की रिपोर्ट
Aurangabad News : ढकपहरी गांव में तेंदूपत्ता तोड़कर बंडल बनाते ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में रोजगार के अवसर बेहद सीमित हैं. खेती भी पूरी तरह वर्षा पर निर्भर है और गर्मी के मौसम में अधिकांश खेत खाली पड़े रहते हैं, जिसके कारण सुबह सूर्योदय से पहले महिलाएं, पुरुष और युवा जंगलों की ओर निकल जाते हैं और देर शाम तक पत्तों का संग्रहण करते हैं.
बढ़ रही महंगाई में कम मजदूरी से गुजर-बसर मुश्किल
तेंदूपत्ता तोड़ने के कार्य में लगे लोगों ने बताया कि महंगाई लगातार बढ़ रही है, लेकिन तेंदूपत्ता संग्रहण से मिलने वाली आय में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई है. कई परिवारों की साल भर की आर्थिक व्यवस्था इसी आय पर निर्भर रहती है, जिससे बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और दैनिक जरूरत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि तेंदूपत्ता संग्रहकों की मजदूरी में वृद्धि की जाए और भुगतान की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए, साथ ही क्षेत्र में मनरेगा सहित अन्य योजनाओं को प्रभावी ढंग से संचालित किया जाए.
जंगली इलाके के लोगों को स्वरोजगार से जोड़ने की जरूरत
राजकुमार सिंह भोक्ता, महेश सिंह भोक्ता, संजय सिंह भोक्ता, बलदेव सिंह भोक्ता, योगेंद्र भुइयां और उपेंद्र भुइयां समेत अन्य लोगों का कहना है कि जंगल क्षेत्र में रहने वाले लोगों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए स्वरोजगार, लघु उद्योग, पशुपालन और कौशल विकास जैसी योजनाओं को बढ़ावा दिया जाना चाहिए. फिलहाल आजीविका की मजबूरी के चलते जंगलों व उनके आसपास रहने वाले सैकड़ों परिवार भीषण गर्मी में तेंदूपत्ता संग्रहण का कार्य कर रहे हैं और उचित मजदूरी की उम्मीद लगाए बैठे हैं.
तेंदूपत्ता का उपयोग होता है बीड़ी निर्माण में
तेंदूपत्ता बीड़ी उद्योग का प्रमुख कच्चा माल माना जाता है और इससे ग्रामीण और जंगलों के आसपास के परिवारों को मौसमी रोजगार मिलता है. लोगों का कहना है कि तेंदूपत्ता की गुणवत्ता जितनी अच्छी होगी बीड़ी निर्माण उद्योग को उतना ही लाभ मिलेगा, इसलिए सरकार और वन विभाग द्वारा केंदु के पेड़ों का संरक्षण हो ताकि भविष्य में मौसमी रोजगार मिलता रहे.
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लेखक के बारे में
By सूर्यकांत कुमार
सूर्यकांत कुमार तीन वर्षों से हिंदी डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं. स्थानीय और हाइपरलोकल पत्रकारिता में विशेष अनुभव रखते हैं. कंटेंट राइटिंग के साथ-साथ वीडियो एडिटिंग और वॉयस ओवर का भी व्यावहारिक अनुभव रखते हैं. उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत एक डिजिटल न्यूज चैनल से की और विभिन्न डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कार्य करते हुए समाचार लेखन और डिजिटल कंटेंट प्रोडक्शन का अनुभव हासिल किया है. इसके अलावा खेल और मनोरंजन से जुड़ी खबरों में भी विशेष रुचि रखते हैं.
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