औरंगाबाद : नहर में डूबने से 8 साल की बच्ची की मौत, झोपड़ियों में रह रहे परिवारों के पुनर्वास की उठी मांग

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नहर किनारे बनी झोपड़ी

Aurangabad News : औरंगाबाद के दाउदनगर में पटना मुख्य कैनाल में नहाने के दौरान 8 वर्षीय छोटी कुमारी की डूबकर मौत हो गई. इसके बाद गरीब परिवारों के पुनर्वास की मांग उठी है.

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दाउदनगर से ओम प्रकाश की रिपोर्ट
Aurangabad News :
जिले के दाउदनगर में मौलाबाग नहर पुल के पास पटना मुख्य कैनाल नहर में नहाने के दौरान आठ साल की बच्ची छोटी कुमारी की डूबकर मौत हो गई. इस दर्दनाक हादसे ने नहर के किनारे झोपड़ियों में रहने वाले दर्जनों महादलित परिवारों की सुरक्षा और उनकी दयनीय जीवन-स्थितियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. मृत बच्ची राजदेव राम की पुत्री थी, जो अपने परिवार के साथ नहर रोड पर झोपड़ी बनाकर रहती थी.

सासाराम, डेहरी और जहानाबाद से आकर कर रहे सफाई का काम

दाउदनगर के मौलाबाग नहर पुल से लेकर राष्ट्रीय इंटर स्कूल जाने वाले मार्ग और बम रोड की ओर जाने वाले नहर पथ के किनारे दर्जनों भूमिहीन महादलित परिवार सालों से अस्थायी झोपड़ियों में रह रहे हैं. इनमें से ज्यादातर परिवार सासाराम, डेहरी, जहानाबाद और अन्य इलाकों से आकर नगर परिषद क्षेत्र में सफाई एजेंसी के माध्यम से सफाई कर्मी के रूप में काम कर रहे हैं.

आर्थिक रूप से बेहद कमजोर होने के कारण ये परिवार न तो किराये का मकान ले पा रहे हैं और न ही जमीन खरीदकर अपना घर बना सकते हैं. मजबूरी में इन्होंने नहर के किनारे को ही अपना आशियाना बना लिया है.

हर वक्त मंडराता है खतरा

इन परिवारों की स्थिति बेहद चिंताजनक है. झोपड़ियां नहर के बिल्कुल सटीक किनारे बनी हुई हैं, जिससे बच्चों और महिलाओं के नहर में गिरने का खतरा हमेशा बना रहता है. तेज आंधी या बारिश के दौरान इन झोपड़ियों के ढहने और नहर में समा जाने की आशंका रहती है. छोटी कुमारी की मौत ने इस खतरे को सच साबित कर दिया है.

मूलभूत सुविधाओं का अभाव

इसके अलावा, यहां मूलभूत सुविधाओं का भी भारी अभाव है. दर्जनों परिवारों के लिए पीने के पानी के नाम पर केवल एक चापाकल का सहारा है. शौचालय और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं. महिलाएं नहर के पानी में ही बर्तन साफ करती हैं और कपड़े धोती हैं.

झोपड़ियों के कारण रास्ता संकरा

कई लोग नहाने के लिए भी नहर का ही उपयोग करते हैं, जिससे दुर्घटना की संभावना बनी रहती है. साथ ही, नहर रोड एक व्यस्त रास्ता है, जहां झोपड़ियों के कारण रास्ता संकरा हो गया है और सड़क हादसों का खतरा भी बढ़ गया है.

प्रशासन से पुनर्वास की मांग

इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद अब स्थानीय लोगों और समाजसेवियों द्वारा इन भूमिहीन परिवारों के सुरक्षित पुनर्वास (रिहैबिलिटेशन) की मांग उठने लगी है.

सीओ ने दिया भरोसा

इस संबंध में दाउदनगर के अंचलाधिकारी (सीओ) शैलेंद्र कुमार यादव ने कहा कि यदि कहीं सरकारी भूमि उपलब्ध होती है, तो इन गरीब परिवारों को वहां बसाने की व्यवस्था की जा सकती है. अब सभी की नजरें प्रशासनिक पहल पर टिकी हैं कि छोटी कुमारी की मौत के बाद इन परिवारों को सुरक्षित स्थान पर बसाने के लिए प्रशासन क्या कदम उठाता है.

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सूर्यकांत कुमार

लेखक के बारे में

By सूर्यकांत कुमार

सूर्यकांत कुमार तीन वर्षों से हिंदी डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं. स्थानीय और हाइपरलोकल पत्रकारिता में विशेष अनुभव रखते हैं. कंटेंट राइटिंग के साथ-साथ वीडियो एडिटिंग और वॉयस ओवर का भी व्यावहारिक अनुभव रखते हैं. उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत एक डिजिटल न्यूज चैनल से की और विभिन्न डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कार्य करते हुए समाचार लेखन और डिजिटल कंटेंट प्रोडक्शन का अनुभव हासिल किया है. इसके अलावा खेल और मनोरंजन से जुड़ी खबरों में भी विशेष रुचि रखते हैं.

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