औरंगाबाद में जर्जर दोमुहान पुल से गुजर रहे ओवरलोडेड ट्रक, बड़े हादसे का खतरा बढ़ा

Edited by Suryakant Kumar
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पुल से गुजरते भारी वाहन

Aurangabad News: औरंगाबाद-हरिहरगंज राष्ट्रीय राजमार्ग-139 पर बटाने नदी स्थित दोमुहान पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद प्रशासन ने भारी वाहनों के परिचालन पर प्रतिबंध लगाया था, जो अब पूरी तरह हवा-हवाई साबित हो रहा है. दिन के उजाले से लेकर रात के अंधेरे तक इस जर्जर पुल से ओवरलोडेड ट्रक, हाइवा, डंपर और ट्रेलर धड़ल्ले से गुजर रहे हैं.

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औरंगाबाद से विश्वनाथ पांडेय की रिपोर्ट :
Aurangabad News :
औरंगाबाद-हरिहरगंज राष्ट्रीय राजमार्ग-139 पर बटाने नदी पर स्थित दोमुहान पुल से भारी वाहनों के परिचालन पर प्रशासनिक प्रतिबंध लगाया गया था. इसके बावजूद इस जर्जर पुल से भारी वाहनों का परिचालन धड़ल्ले से जारी है. रात तो दूर, दिन के उजाले में भी भारी वाहनों को यहाँ से पार होते देखा जा सकता है. प्रशासनिक व्यवस्था का हाल यह है कि कभी छोटे वाहनों के परिचालन के लिए भी यहाँ वन-वे व्यवस्था कर दी जाती है, जिससे पुल पर घंटों जाम की समस्या बनी रहती है, तो कभी भारी वाहनों को बिना रोक-टोक के पार होने दिया जाता है.

इस अव्यवस्था से स्थानीय लोगों और राहगीरों में बड़े हादसे का डर सताने लगा है. पुल पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में फोर-व्हीलर और बाइक चालकों की परेशानी बढ़ सकती है. पुल की वर्तमान स्थिति को देखते हुए किसी भी समय बड़ी दुर्घटना होने की आशंका है. इसके बावजूद प्रशासनिक आदेशों का असर धरातल पर दिखाई नहीं दे रहा है.

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मजिस्ट्रेट और पुलिस बल की प्रतिनियुक्ति साबित हो रही हवा-हवाई

शुक्रवार की सुबह से ही एनएच-139 पथ स्थित दोमुहान पुल से होकर बड़ी सवारी बसें गुजर रही थीं. इसके बाद देर शाम से पूरी रात ओवरलोडेड ट्रक, हाइवा, डंपर और ट्रेलर की आवाजाही जारी रही. स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर पुल के दोनों ओर तीन शिफ्टों में मजिस्ट्रेट और पुलिस बल की तैनाती की जानी थी, लेकिन कभी भी ड्यूटी पर उनकी उपस्थिति नहीं देखी गई. ऐसे में प्रशासनिक आदेश केवल कागजों तक ही सीमित नजर आ रहे हैं.

रात के समय पुल के दोनों छोर से हटा दी जाती है बैरिकेडिंग

स्थानीय नागरिकों के अनुसार, रात के समय पुल के दोनों ओर लगाए गए बैरिकेडिंग को हटा दिया जाता है, जिसके बाद सवारी गाड़ियों के साथ-साथ ट्रक, हाइवा, डंपर और ट्रेलर जैसे भारी वाहन भी आसानी से पुल पार कर लेते हैं. भारी वाहनों के लगातार आवागमन से इस जर्जर पुल पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है, जिससे इसकी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

अव्यवस्था से अंबा बाजार की सड़क जाम, प्रशासन पर उठे सवाल

इस प्रशासनिक लापरवाही का सीधा असर अंबा चौक पर भी देखने को मिल रहा है. भारी वाहनों की बेतरतीब आवाजाही के कारण यहाँ अक्सर भीषण जाम की स्थिति बनी रहती है, जिससे आम जनता को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. मंडल अध्यक्ष प्रवीण गुप्ता और जदयू अध्यक्ष हरेंद्र कुमार आदि का कहना है कि प्रशासन की ओर से कभी पुल को वन-वे घोषित कर दिया जाता है, तो कभी भारी वाहनों को गुजरने की गुप्त अनुमति मिल जाती है. इस तरह के विरोधाभासी निर्णयों से जनता के बीच भ्रम और अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो रही है.

स्थानीय बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी प्रशासन की कार्यशैली पर कड़े सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि जब पुल की जांच करने वाली टेक्निकल एजेंसी पहले ही भारी वाहनों के गुजरने से पुल के क्षतिग्रस्त होने या ध्वस्त होने की आशंका जता चुकी है, तब भी प्रतिबंध का सख्ती से पालन क्यों नहीं कराया जा रहा है. अजीत कुमार, मुकेश पांडेय और रवींद्र पांडेय आदि का आरोप है कि संबंधित विभाग शायद किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है.

वर्ष 1979 में इसी पुल से नदी में गिरी थी बस, जा चुकी है कई जानें

बताया जाता है कि वर्ष 1979 में इस ब्रिटिशकालीन पुल से गुजरने के दौरान एक सवारी चौहान बस अनियंत्रित होकर नीचे नदी में गिर गई थी. उस दर्दनाक हादसे में वाहन चालक सहित कई लोगों की जान चली गई थी, जबकि दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे. इतिहास से सबक न लेते हुए प्रशासन फिर वैसी ही स्थिति पैदा कर रहा है.

वैकल्पिक रूट निर्धारण पूरी तरह बेअसर, ग्रामीण सड़कें हो रहीं बर्बाद

दोमुहान पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद जिला प्रशासन के स्तर से भारी वाहनों के परिचालन के लिए जो वैकल्पिक रूट निर्धारित किया गया था, वह भी बेअसर दिख रहा है. अब हाइवा और ट्रक आदि भारी वाहन अंबा कुटुंबा पथ स्थित बिचला मोड़ से होकर गोवास, अंबा शाही, देवरिया, चितांवन बिगहा, कठरी, कुरगाईन से माली पड़ड़िया होते हुए औरंगाबाद और डिहरी ऑन सोन की तरफ जा रहे हैं. इसके कारण अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी सड़क जाम की गंभीर समस्या उत्पन्न हो रही है और भारी वजन के कारण ग्रामीण सड़कें टूट-फूट कर बिखर रही हैं.

फोन रिसीव करने से परहेज कर रहे जिम्मेदार अफसर

इस गंभीर लापरवाही के संबंध में विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिए जब विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (कार्यपालक अभियंता) तुलसी प्रसाद से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फोन रिसीव करने से साफ परहेज किया. ऐसे में विभाग की मंशा पर भी सवाल उठ रहे हैं.

क्या कहते हैं थानाध्यक्ष ?

इस संबंध में जब रिसियप थाना के एसएचओ कृष्णा कुमार से पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि भारी वाहनों के अवैध परिचालन की जानकारी उन्हें नहीं है. हालांकि, जब उन्हें पुख्ता जानकारी और वीडियो सबूत होने की बात कही गई, तब उन्होंने कहा कि इसकी जानकारी जिले की यातायात पुलिस (ट्रैफिक पुलिस) और एनएच (NH) के संबंधित अधिकारियों को दे दी गई है.

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Suryakant Kumar

लेखक के बारे में

By Suryakant Kumar

सूर्यकांत कुमार प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर हैं. डिजिटल मीडिया में तीन वर्षों का अनुभव रखते हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल चैनल न्यूज रील्स से की. इसके बाद नेशन दर्पण और खबरिया जंक्शन में कार्य किया, जहां कंटेंट राइटिंग, वीडियो एडिटिंग और वॉयस ओवर से जुड़े विभिन्न कार्यों का अनुभव हासिल किया. उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया है. वर्तमान में वे स्थानीय (हाइपरलोकल) खबरों पर काम कर रहे हैं. इसके अलावा खेल और मनोरंजन से जुड़ी खबरों में भी विशेष रुचि रखते हैं.

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