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Aurangabad News : भइया का टिकट फाइनल है, बस एलान बाकी

Updated at : 10 Oct 2025 10:14 PM (IST)
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Aurangabad News : भइया का टिकट फाइनल है, बस एलान बाकी

Aurangabad News:टिकट के महामुकाबले में नेताजी से ज्यादा जोश में समर्थक, प्रत्याशी शांत, उनके चेले सोशल मीडिया पर भर रहे दंभ

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औरंगाबाद सदर. औरंगाबाद की सियासत इन दिनों चुनावी अखाड़े से ज्यादा राजनीतिक कॉमेडी शो लग रही है. चुनाव की घोषणा हो चुकी है, पहले चरण का नामांकन भी शुरू हो गया, लेकिन अब तक किसी बड़े दल ने टिकट का पत्ता नहीं खोला है. एनडीए हो या महागठबंधन दोनों खेमों में खामोशी ऐसी कि जैसे सबको टिकट नहीं, टीका लगने का डर हो. जिले की छह विधानसभा सीटों पर टिकट की जंग अपने चरम पर है. इधर, टिकट के महा मुकाबले में नेताजी से ज्यादा जोश में उनके समर्थक दिखाई दे रहे हैं. बस उनसे कुछ भी पूछ लीजिये एक ही जवाब है…भइया का टिकट एक दम फाइनल है.. बस घोषणा बाकी है. मजे की बात ये कि असली नेता तो चुप हैं, पर उनके चेले और समर्थक ऐसे एक्टिव हैं जैसे पार्टी का घोषणा पत्र वही लिखने वाले हों. सोशल मीडिया पर हर कोई पॉलिटिकल एनालिस्ट बन चुका है. फेसबुक स्टोरी, इंस्टाग्राम रील और वाट्सएप स्टेटस पर टिकट कन्फर्म की अफवाहें इस कदर उड़ रही हो जैसे रेगिस्तान में रेत की आंधियां.

चरम पर नेताओं की बेचैनी

जनसुराज ने जहां नवीनगर और गोह सीट पर प्रत्याशी घोषित कर सबको चौंका दिया है, वहीं बाकी दलों के नेताओं की बेचैनी चरम पर है. कहीं दिल्ली का हवाला दिया जा रहा है, तो कहीं पटना के ऊपर वाले साहब का इंतजार हो रहा है. कुछ नेता तो पिछले चुनाव में मिली हार का दर्द ऐसे सुना रहे हैं जैसे डॉक्टर को पुरानी बीमारी का इतिहास बता रहे हों. कुछ कह रहे कि इस बार तो पार्टी को मेरे त्याग की कद्र करनी ही होगी.

जनता ले रही भरपूर मजा

जनता इस सियासी ड्रामे का पूरा आनंद ले रही है.चाय की दुकान से लेकर सोशल मीडिया के ग्रुप तक हर जगह बस एक ही चर्चा है…किसको मिलेगा टिकट? लेकिन असली मजा तो उस वाक्य में है जो हर तरफ गूंज रहा है..भइया का टिकट फाइनल है… बस एलान बाकी है.

चुनावी गर्मी नही तैर रही टिकट की तासीर

औरंगाबाद की हवा में इस वक्त चुनावी गर्मी नहीं बल्कि टिकट की तासीर तैर रही है. कोई अंदर ही अंदर घुल रहा है, कोई बाहर से चमक रहा है, और कुछ ऐसे भी हैं जो बड़ी बेआबरू होकर कूचे निकले हैं पर राजनीति का यही तो सौंदर्य है. चुनाव नजदीक है, पर टिकट की रेस में जो सबसे ज़्यादा दौड़ रहा है, वही सबसे पहले थकने वाला है और जनता? वह तो मुस्कुराते हुए बस यही कह रही है…नेता बदलते रहेंगे, पर औरंगाबाद का तमाशा हमेशा शानदार रहेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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