सीआइएसएफ के डीजी ने की घटना की जांच

Published at :19 Jan 2017 8:36 AM (IST)
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सीआइएसएफ के डीजी ने की घटना की जांच

कहा-स्पीडी ट्रायल चला कर दोषी जवान को दी जायेगी सजा औरंगाबाद नगर : सीआइएसएफ के डीजी ओपी सिंह व मगध प्रक्षेत्र के डीआइजी सौरभ कुमार ने अपने अधीनस्थ पदाधिकारियों के साथ बुधवार को एनपीजीसी स्थित सीआइएसएफ कैंप का दौरा किया. इस दौरान विगत 12 जनवरी को नवीनगर के नेशनल थर्मल पावर जेनेरेटिंग कॉरपोरेशन के सीआइएसएफ […]

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कहा-स्पीडी ट्रायल चला कर दोषी जवान को दी जायेगी सजा
औरंगाबाद नगर : सीआइएसएफ के डीजी ओपी सिंह व मगध प्रक्षेत्र के डीआइजी सौरभ कुमार ने अपने अधीनस्थ पदाधिकारियों के साथ बुधवार को एनपीजीसी स्थित सीआइएसएफ कैंप का दौरा किया.
इस दौरान विगत 12 जनवरी को नवीनगर के नेशनल थर्मल पावर जेनेरेटिंग कॉरपोरेशन के सीआइएसएफ के कैंप में एक सीआइएसएफ जवान द्वारा की गयी गोलीबारी और इस दौरान मारे गये चार जवानों के मामले की जांच की.
सीआइएसएफ डीजी ओपी सिंह हेलीकॉप्टर से घटनास्थल पर पहुंचे और वहां पहुंचकर एक-एक पहलू की जांच की. घटनास्थल का निरीक्षण कर वहां पर मौजूद सीआइएसएफ के जवानों से पूछताछ की और आरोपित बलवीर सिंह के एक सप्ताह के क्रियाकलापों की जानकारी ली. डीजी ने सभी जवानों से कई सवाल भी किये और उनके जवाबों को नोट भी किया.
साथ ही, उनके द्वारा सबूत और साक्ष्य को इकट्ठा किया. उनके साथ आइजी अनिल कुमार, मगध जोन के डीआइजी सौरभ कुमार, डीआइजी ऑपरेशन महेश्वर दयाल, डीआइजी श्रीकांत किशोर, औरंगाबाद एसपी सत्यप्रकाश, एएसपी अभियान राजेश भारती शामिल थे. उसके बाद डीजी वहां से रवाना हो गये और मगध प्रक्षेत्र के डीआइजी सौरभ कुमार ने पुलिस ऑफिस में एसपी डाॅ सत्यप्रकाश के साथ बैठक की. इस दौरान डीआइजी ने इस घटना को दुखद बताते हुए कहा कि घटना के वक्त के सारे साक्ष्यों को एकत्रित कर लिया गया है. अनुसंधानकर्ता को साक्ष्यों के आधार पर मजबूत डायरी लिखने का निर्देश दिया गया है, साथ ही कहा गया है कि पर्याप्त साक्ष्य के साथ अंतिम चार्जशीट न्यायालय को कुछ ही दिनों के अंदर समर्पित करें. ताकि, स्पीडी ट्रायल चला कर शीघ्र ही सजा दिलायी जा सके.
इसके लिए न्यायालय से भी गुजारिश की जायेगी. डीआइजी ने कहा कि जिले में अवैध रूप से चल रहे ओवरलोडेड वाहनों की धर-पकड़ की कार्रवाई में अब तक कुल 471 वाहनों को पकड़ा गया है, जो कि बिहार में रिकॉर्ड है.
सभी थानाध्यक्षों को इस दिशा में लगातार कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया. साथ ही, ओवरलोडेड वाहनों को पकडने में कोई कोताही नहीं बरतने की सलाह दी गयी है. यदि किसी भी थानाध्यक्ष ने इस दिशा में उदासीनता बरती, तो उन्हें विभागीय कार्रवाई से गुजरना पड़ेगा. इस कार्रवाई से न सिर्फ सड़कों पर दबाव कम हुआ है, बल्कि सरकार के राजस्व में भी वृद्धि हुई है. ऐसा होने से आम लोगों को काफी राहत मिली है.
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