दशकर्म के काम आ रहा दानी बिगहा बस स्टैंड

Published at :17 Jan 2017 8:26 AM (IST)
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दशकर्म के काम आ रहा दानी बिगहा बस स्टैंड

औरंगाबाद शहर : मैं तो अपनी बेबसी पर रोता हूं. सैकड़ों गाड़ियां और हजारों यात्रियों को प्रतिदिन मुकाम तक पहुंचाने के बाद भी मैं बेहाल हूं. कचरों और गड्ढों से दबी मेरी काया अपने किस्मत पर रोती है. आखिर मेरी गलती क्या है. बस एक सवाल कि कब सुधरेगा मेरा हाल. यह व्यथा है औरंगाबाद […]

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औरंगाबाद शहर : मैं तो अपनी बेबसी पर रोता हूं. सैकड़ों गाड़ियां और हजारों यात्रियों को प्रतिदिन मुकाम तक पहुंचाने के बाद भी मैं बेहाल हूं. कचरों और गड्ढों से दबी मेरी काया अपने किस्मत पर रोती है.

आखिर मेरी गलती क्या है. बस एक सवाल कि कब सुधरेगा मेरा हाल. यह व्यथा है औरंगाबाद शहर के तीनों बस स्टैंड की. एक को सरकारी का ठप्पा लगा है ,दूसरे में लाखों रूपये खर्च हो गये है और तीसरा खर्च का इंतजार कर रहा है. रामाबांध बस स्टैंड और दानी बिगहा बस स्टैंड की हालत किसी से छुपी नहीं है. सुधारने की आवाज उठायी गयी,लेकिन चंद मुंह तक ही आवाज दब कर रह गयी. जिस दानी बिगहा बस स्टैंड को बनाने में लाखों रुपये फूंक दिये गये,वह बस स्टैंड अभी दशकर्म करने के काम आ रहा है.

सोमवार की सुबह जब प्रभात खबर की टीम यात्रियों की सुविधा का जायजा लेने दानी बिगहा बस स्टैंड पहुंची, तो देखा कि वहां अंतिम संस्कार होने के बाद अंतिम क्रिया की रस्म पूरी की जा रही है. चारों तरफ कूड़े कचरे भरे इस स्टैंड को देखने से नहीं लगता कि स्टैंड बनाने के लिये पूर्व में कितनी लड़ाइयां लड़ी गयीं और फिर लाखों रूपये खर्च कर दिये गये. रामाबांध बस स्टैंड की स्थिति तो और भयावह है. प्रतिदिन सैकड़ों वाहन अपने गंतव्य स्थान की ओर प्रस्थान करते है. हजारों यात्री बोकारो, टाटा,धनबाद, रांची, कोलकता, बनारस, गढ़वा, डालटेनगंज , कानपुर, दिल्ली जाते और आते है. स्टैंड से जिला प्रशासन को राजस्व की भी प्राप्ति हो रही है. बावजूद स्टैंड की सूरत बदहाल है. यहां उभरे बड़े-बड़े गड्ढे दुर्घटना का तो आमंत्रण देते ही है,चारों तरफ फैले कूड़े कचरे बीमारियों का न्योता भी देते है. सवाल यह उठता है कि जिस बस स्टैंड से राजधानी के लिए गाड़ियां खुलती हैं,वहां यात्री सुविधा का अभाव प्रशासन की मनोदशा व लापरवाही को दर्शाता है. स्टैंड में पेयजल संकट का अभाव है. बिजली की सुविधा तो है ही नहीं. यात्री पानी पीने के लिये कुछ पैसे खर्च कर या तो किसी होटल में नाश्ता स्वरूप कुछ खाते है या फिर 20 से 30 रुपये खर्च कर मिनरल वाटर खरीदते है.

क्या कहते हैं जिप अध्यक्ष

रामाबांध बस स्टैंड जिला परिषद के अधीन है. जिप अध्यक्ष नीतू सिंह ने बताया कि वे एक सभा में बाहर हैं. जिप उपाध्यक्ष महिपत राम ने बताया कि रामाबांध बस स्टैंड में सुविधा बहाल करने के लिए जिला पर्षद प्रयासरत है. स्टैंड का निरीक्षण किया गया है. बहुत जल्द यात्रियों को बेहतर सुविधा प्रदान की जायेगी.

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