बेकार पड़ा है 58 लाख की लागत से बना मोर्चरी हाउस

Published at :22 Dec 2016 7:51 AM (IST)
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बेकार पड़ा है 58 लाख की लागत से बना मोर्चरी हाउस

एक-एक कर चोरी हो गये कई सामान रास्ते के इंतजार में बरबाद हो रही बिल्डिंग लगता है असामाजिक तत्वों का जमावड़ा औरंगाबाद सदर : सरकारी विभाग और उसके कामकाज के तरीके से हर कोई वाकिफ है. संसाधनों की बार-बार कमी गिनानेवाला सदर अस्पताल को जब संसाधन उपलब्ध कराये जाते हैं, तो उसे सहेजने व संरक्षित […]

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एक-एक कर चोरी हो गये कई सामान
रास्ते के इंतजार में बरबाद हो रही बिल्डिंग
लगता है असामाजिक तत्वों का जमावड़ा
औरंगाबाद सदर : सरकारी विभाग और उसके कामकाज के तरीके से हर कोई वाकिफ है. संसाधनों की बार-बार कमी गिनानेवाला सदर अस्पताल को जब संसाधन उपलब्ध कराये जाते हैं, तो उसे सहेजने व संरक्षित रखने में हमेशा पीछे रह जाता है. जिला स्वास्थ्य समिति भी इस मामले में कुछ कम नहीं.
शहर के सदर अस्पताल के सामने डॉक्टर्स काॅलोनी में 58 लाख की लागत से बना मार्चरी हाउस बनने के छह महीने बाद ही बरबाद हो चुका. इस बिल्डिंग का निर्माण बिहार मेडिकल सर्विसेस एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा छह महीने पूर्व कराया गया था और इसके निर्माण के बाद बिल्डिंग को जिला स्वास्थ्य समिति को सुपुर्द कर दिया गया था.
लेकिन, देखरेख और तुरंत इसे उपयोग में नहीं लाये जाने के कारण बिल्डिंग में लगे तमाम समानों की चोरी एक-एक कर चोरों ने कर ली. बताया जाता है कि मार्चरी हाउस के साथ इस बिल्डिंग में आधुनिक पोस्टमार्टम हाउस की व्यवस्था भी बनायी गयी, पर सदर अस्पताल के पदाधिकारी व चिकित्सक इसका उपयोग करने से कतराते रहे. इसका नतीजा यह हुआ कि छह महीने से बंद पड़े मार्चरी हाउस पर चोरों की नजर गड़ गयी और धीरे-धीरे कर इसके मोटर, नल, बेसिन व अन्य सामान की चोरी कर ली गयी. आज यह बिल्डिंग तमाम संसाधनों के बावजूद बदतर स्थिति में पड़ी है, जिस पर न तो जिला स्वास्थ्य समिति का ध्यान है और न ही सदर अस्पताल का.
अब भी पुराने भवन में ही होता है पोस्टमार्टम
मार्चरी हाउस में की गयी पोस्टमार्टम की व्यवस्था और तमाम संसाधनों के रहने के बावजूद भी चिकित्सक अब भी पोस्टमार्टम के लिए अब भी अपने पुराने पोस्टमार्टम हाउस का इस्तेमाल करते हैं. चिकित्सकों के अनुसार मार्चरी हाउस तक पहुंचने के लिए कोई रास्ता नहीं बनाये जाने व बिल्डिंग को वातानुकूलित नहीं किये जाने के कारण इसका उपयोग नहीं हो पा रहा है. ऐसे में अब भी अगर कोई शव पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल आता है, तो उसका पोस्टमार्टम पुराने बिल्डिंग में ही किया जाता है. इधर, लाखों का बना भवन बरबाद हो रहा है.
चोरी गये सामान की अब तक नहीं हो सकी प्राथमिकी
मार्चरी हाउस की देखरेख के अभाव में चोरी चले गये सामान की प्राथमिकी अब तक थाने में नहीं की गयी है.अस्पताल के कर्मी नाम न छापने के शर्त पर बताते हैं कि आधुनिक पोस्टमार्टम हाउस में हर सुविधाएं बहाल की गयी थीं, पर इसका उपयोग समय पर नहीं किये जाने के कारण धीरे-धीरे चोरों ने इसके सारे सामान चोरी कर लिये. लेकिन, इसकी प्राथमिकी न तो जिला स्वास्थ्य समिति द्वारा ही करायी गयी और न ही सदर अस्पताल ही इस मामले में कभी गंभीर हुआ. आज बिल्डिंग के खिड़कियों को ईट मार-मार कर क्षतिग्रस्त कर दिया गया है और बाहर से भी असामाजिक तत्वों ने इसे खूब क्षति पहुंचायी है. कॉलोनी में रह रहे कुछ लोगों ने बताया कि अब यह बिल्डिंग चोर-उचक्कों व नशेड़ियों का अड्डा बन गयी है.
रास्ते के लिए जिलाधिकारी ने लिखा था पत्र
मार्चरी हाउस तक पहुंचने के लिए एप्रोच पथ नहीं रहने के कारण हो रही परेशानी को देखते हुए जिलाधिकारी ने बिहार मेडिकल सर्विसेस एण्ड इंफ्रास्टक्चर कारपोरेशन लिमिटेड को कुछ दिन पूर्व एक पत्र लिख कर इसके रास्ते को बनाते हुए आसपास बाउंड्री वाल निर्माण कराने की बात कही गयी थी, जिसके बाद बीएमएसआइसीएल के प्रोजेक्ट मैनेजर ने इसका निरीक्षण कर एस्टीमेट बनाने की बात कही थी. इस संबंध में जब बीएमएसआइसीएल के प्रोजेक्ट मैनेजर मनीष कुमार से बात की गयी, तो उन्होंने बताया कि मार्चरी हाउस को छह महीने पूर्व ही जिला स्वास्थ्य समिति के हाथों सुपुर्द कर दिया गया था और रास्ते व बाउंड्री वाल के लिए बुधवार को इसकी नापी करायी गयी है. इस बिल्डिंग को आधुनिक तरीके से बनाया गया था, लेकिन जब बुधवार को इसका निरीक्षण किया गया, तो यह बिल्डिंग काफी बदतर स्थिति में देखी गयी. रास्ते व चहारदीवारी के निर्माण के बाद मार्चरी हाउस सुरक्षित हो जायेगा और इसका लाभ भी लोगों को मिल सकेगा.
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