दर्जनभर हाइमास्ट लाइटों में एक भी सलामत नहीं
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :21 Oct 2016 4:53 AM (IST)
विज्ञापन

लापरवाही. लाखों के खर्च पर भी सड़कों पर अंधेरे का राज लाइटों की खरीद में भ्रष्टाचार का है आरोप लगने के बाद कुछ ही दिन बाद बंद हो गयीं अधिकतर लाइटें औरंगाबाद कार्यालय : शहर को रोशन करने के नाम पर नगर पर्षद द्वारा सभी चौक-चौराहों पर हाइमास्ट लाइटें लगायी गयी हैं, लेकिन स्थिति यह […]
विज्ञापन
लापरवाही. लाखों के खर्च पर भी सड़कों पर अंधेरे का राज
लाइटों की खरीद में भ्रष्टाचार का है आरोप
लगने के बाद कुछ ही दिन बाद बंद हो गयीं अधिकतर लाइटें
औरंगाबाद कार्यालय : शहर को रोशन करने के नाम पर नगर पर्षद द्वारा सभी चौक-चौराहों पर हाइमास्ट लाइटें लगायी गयी हैं, लेकिन स्थिति यह है कि ये न तो कभी रोशनी देती हैं और न रात में दिखाई ही पड़ती हैं. धर्मशाला मोड पर डेढ़ वर्ष पूर्व हाइमास्ट लाइट नगर परिषद ने लगायी थी, यह केवल दस दिन ही जली. गांधी मैदान के समीप मोड़ पर हाइमास्ट लाइट इसलिए लगायी गयी थी कि लोग मैदान में शौच नहीं करने पायें, पूरा मैदान दुधिया रोशनी से नहाते रहे, लेकिन यह भी लाइट मात्र 15 से 20 दिन जली. नगर थाना प्रांगण में चार साल पहले हाइमास्ट लाइट लगी, वह भी केवल लगने के समय ही जली थी.
शाहपुर अखाड़ा पर एक साल पूर्व हाइमास्ट लाइट लगी थी, यह भी केवल लगने के समय ही जली. फारम एरिया में दो साल पूर्व हाइमास्क लाइट लगा, एक माह जलने के बाद फिर नही जल पाया. महाराणा प्रताप चौक पर लगा हाईमास्क लाइट भी नही जलता है. इस तरह शहर में अनेकों जगहों पर लगी हाइमास्ट लाइट केवल बिजली के खंभे की तरह खड़े हैं. जबकि, इन हाइमास्ट लाइट पर प्रतिलाइट 5 से 6 लाख रुपये खर्च किये गये हैं. शहर में लगे सभी लाइटों का आकलन किया जाये तो यह राशि 60 से 70 लाख होगी. यह स्थिति हाइमास्ट लाइट लगाने में भ्रष्टाचार के खुले खेल को सीधे तौर पर उजागर करती है. इसके बावजूद अब तक न तो किसी जनप्रतिनिधि ने और ही किसी अधिकारी ने इस बारे में आवाज उठायी. आम जनता के दिये टैक्स के रुपयों की बरबादी को लेकर लोगों में गुस्सा भी है.
एक यूनिट लाइट की कीमत पड़ी है पांच लाख से अधिक
नगर पर्षद लोगों के लिए नहीं करती काम
व्यवसायी अशोक कुमार सिंह का कहना है कि नगर पर्षद शहर के विकास के लिए वहीं काम करता है, जिसमें नगर पर्षद को अपना फायदा दिखाई देता है. आम जनता के लिए या शहर के लिए इनके द्वारा कोई ऐसा कार्य नहीं किया जा सका है, जिससे शहर की सूरत बदल सके.
जांच कराने पर उजागर होगा भ्रष्टाचार
शहरवासी राजेश कुमार का कहना है कि नगर पर्षद द्वारा हाइमास्ट लाइट के नाम पर जो लाखों रुपये पानी की तरह बहाये गये हैं. इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए. ताकि, हाइमास्ट लाइट की खरीद में अनियमितता के जिम्मेवार लोगों को चिह्नित कर सख्त कार्रवाई की जा सके.
पावर कम मिलने के कारण नहीं जलती हैं लाइटें : कार्यपालक पदाधिकारी
नगर पर्षद के कार्यपालक पदाधिकारी विमल कुमार से जानने का प्रयास किया गया, तो इनका कहना था कि औरंगाबाद शहर में लो वोल्टेज की समस्या है, जिसके कारण हाइमास्ट लाइटें फेल हो चुकी हैं. हाइमास्ट लगानेवाली कई कंपनियों का भुगतान भी रोका गया है. इनका आगे कहना है कि अब जो हाइमास्ट लगी हैं, उसमें 20 वाट के एलइडी बल्ब लगाने की योजना बनायी गयी है. एलइडी बल्ब कम वोल्टेज में जलते हैं और उससे अधिक रोशनी मिलती है.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




