एक माह में दोबारा बनी वार्ड 23 की सड़क

Published at :10 Jun 2016 7:19 AM (IST)
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एक माह में दोबारा बनी वार्ड 23 की सड़क

बनने के साथ ही सड़क से निकलने लगी थीं गिट्टियां नगर पर्षद के माध्यम से कराये जा रहे काम में जैसे लूट सी मची है. वार्डों में कराये गये काम का अब धीरे-धीरे पोल खुलने लगा है. कहीं आधे-अधूरे काम कर छोड़ दिये गये हैं, तो कहीं सड़क व नाली निर्माण में जम कर धांधली […]

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बनने के साथ ही सड़क से निकलने लगी थीं गिट्टियां
नगर पर्षद के माध्यम से कराये जा रहे काम में जैसे लूट सी मची है. वार्डों में कराये गये काम का अब धीरे-धीरे पोल खुलने लगा है. कहीं आधे-अधूरे काम कर छोड़ दिये गये हैं, तो कहीं सड़क व नाली निर्माण में जम कर धांधली की गयी है. वार्ड 23 में इसी लूट को जनता ने बेनकाब किया है.
चार लाख 74 हजार रुपये से बनी थी बिराटपुर की सड़क
औंरगाबाद (सदर) : शहर के वार्ड 23 के बिराटपुर मुहल्ले की सड़क बहुत दिनों से खराब पड़ी थी. सड़क में जगह-जगह गड्ढे बन गये थे व गिट्टियां बाहर निकलने लगी थीं. इस समस्या पर जब लोगों ने वार्ड पार्षद के सामने नाराजगी जताते हुए जल्द सड़क निर्माण की मांग की, तो नगर पर्षद की योजना में इस वार्ड के सड़क को शामिल कर लिया गया. फिर नगर पर्षद द्वारा इस सड़क के निर्माण के लिए चार लाख 74 हजार रुपये की स्वीकृत की गयी. लेकिन, वार्ड पार्षद शायरा बानो के पति व पार्षद प्रतिनिधि मोहम्मद सेराज ने इस सड़क का निर्माण ईमानदारी से नहीं कराया, जिसका नतीजा यह हुआ कि सड़क बनते ही टूटने लगी व नयी बनी सड़क से गिट्टियां बाहर आने लगीं. इसकी शिकायत लोगों ने नगर पर्षद से की.
नगर पर्षद ने इंजीनियर को जांच को जिम्मा सौंपा. इंजीनियर को जिस दिन जांच करनी थी, उससे पहले ठेकेदार ने सड़क की फिर से मरम्मत कर साफ सुथरा कर दिया. इंजीनियर ने सड़क की जांच करने के बाद कहा कि ऐसी कोई कोई बात नहीं है. सड़क ठीक बनी थी. लेकिन, लोगों को इंजीनियर की बात में सच्चाई नहीं दिखी. लोगों ने इस सड़क की फिर से ढलाई कराने के लिए नगर पर्षद को एक आवेदन दिया. इसके बाद सड़क की एक माह में दोबारा ढलाई करायी गयी.
छह इंच की जगह तीन इंच ही हुई ढलाई
नगर पर्षद ने वार्ड 23 में चित्रगुप्त भवन से लेकर नीचे दक्षिण की ओर पुल तक की पीसीसी ढलाई करायी गयी थी, जो छह इंच की जगह महज तीन इंच ही ढलाई की गयी थी. न उस पर पानी का छिड़काव किया गया और न ही सही से सामग्री का ही उपयोग किया गया. लोगों की शिकायत थी कि इस सडक निर्माण में घटिया सीमेंट व बालू का इस्तेमाल किया गया है. लोगों ने जब नगर पर्षद के कार्यपालक पदाधिकारी को इस सड़क में बरती गयी अनियमितता से संबंधित आवेदन दिया, तो इसकी फिर दोबारा छह इंच ढलाई की गयी.
अब भी कई मुहल्लों में दिखता है भ्रष्टाचार
शहर के कई वार्ड ऐसे हैं जहां वार्ड 23 की तरह ही अनियमितता बरती गयी है. कहीं वार्ड पार्षद स्वयं से निर्माण योजना में लगे हैं, तो कहीं नगर पर्षद के ठेकेदार. शहर के वार्ड संख्या 31 के निर्माण कार्य की योजना भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गयी हैं. यहां जगह-जगह सड़क निर्माण के लिए मिट्टी की खुदायी कर काम को अधूरे छोड़ दिये गये हैं, जिनकी जांच करना शायद नगर पर्षद के पदाधिकारी अपनी जिम्मेवारी नहीं समझते हैं.
ढलाई के तुरंत बाद वाहनों के चलने से टूटी सड़क
इस संबंध में जब वार्ड 23 के पार्षद प्रतिनिधि मोहम्मद सेराज से पूछा गया कि आखिर एक माह में बिराटपुर मुहल्ले की सड़क की दोबारा ढलाई क्यों करायी गयी, तो कहना था कि सड़क की ढलाई के बाद तुरंत वाहनों का परिचालन कर दिया गया. इसके कारण सड़क टूटने लगी थी. सड़क निर्माण में कोई गड़बड़ी नहीं की है. लोगों की शिकायत पर दोबारा ढलाई की है.
सड़क की नहीं हुई थी एमबी बुक
वार्ड 23 की सड़क निर्माण में अनियमितता से संबंधित शिकायत स्थानीय लोगों द्वारा की गयी थी.सड़क निर्माण के बाद उसका मेजरमेंट बुक (एमबी बुक) नहीं किया गया था और न ही उसका पेमेंट ही किया गया है. अगर, वार्ड में इस तरह की अनियमितता बरती जा रही है, तो उसकी जांच की जायेगी व अधूरे निर्माण कार्य को भी पूरा कराया जायेगा.
विमल कुमार, कार्यपालक पदाधिकारी, नगर पर्षद, औरंगाबाद
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