प्रोजेक्ट कन्या इंटर वद्यिालय में संसाधनो की कमी, विषयवार शक्षिक नही रहने से छात्राओं की पढ़ाई बाधित

Published at :17 Dec 2015 10:20 PM (IST)
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प्रोजेक्ट कन्या इंटर वद्यिालय में संसाधनो की कमी, विषयवार शक्षिक नही रहने से छात्राओं की पढ़ाई बाधित

प्रोजेक्ट कन्या इंटर विद्यालय में संसाधनो की कमी, विषयवार शिक्षक नही रहने से छात्राओं की पढ़ाई बाधित(फोटो नंबर-7,8)कैप्शन- रानी ब्रजराज कुमारी इंटर विद्यालय देव में पढ़ाई करती छात्राएं, प्राचार्य मिथिलेश कुमार सिंह(कैंपस पेज के लिये) औरंगाबाद (नगर) देव प्रखंड के सुदूर ग्रामीण इलाकों के छात्राओं के लिए एक मात्र विद्यालय रानी ब्रजराज कुमारी प्रोजेक्ट कन्या […]

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प्रोजेक्ट कन्या इंटर विद्यालय में संसाधनो की कमी, विषयवार शिक्षक नही रहने से छात्राओं की पढ़ाई बाधित(फोटो नंबर-7,8)कैप्शन- रानी ब्रजराज कुमारी इंटर विद्यालय देव में पढ़ाई करती छात्राएं, प्राचार्य मिथिलेश कुमार सिंह(कैंपस पेज के लिये) औरंगाबाद (नगर) देव प्रखंड के सुदूर ग्रामीण इलाकों के छात्राओं के लिए एक मात्र विद्यालय रानी ब्रजराज कुमारी प्रोजेक्ट कन्या इंटर विद्यालय है. यहां देव प्रखंड के आस-पास के सभी गांवों के सैकड़ों छात्राएं पढ़ाई के लिये आते हैं. लेकिन इस विद्यालय में संसाधनों की कमी उन्हें काफी खलता है. मात्र सात कमरों के भरोसे लगभग डेढ हजार छात्राओं की पढ़ाई होती है, वह भी मात्र 14 शिक्षकों के बदौलत. लाइबे्ररी की बात की जाये तो स्थिति काफी खराब है. लाइब्रेरी में विषयानुसार सभी किताबें उपलब्ध नही है. विषय के अनुसार जहां हजारो किताबे होनी चाहिये थी वहां मात्र छह सौ किताबे लइब्रेरी मे रखी गयी है. इतनी कम संख्या में उपलब्ध किताबे लाइब्रेरी की शोभा बढाने की बजाये छात्राओं को मुंह चिढा रही है. जब छात्राएं विद्यालय से किताबे निकलवाना चाहते हैं तो पता चलता है कि उस विषय के किताब हैं ही नही. इसके अलावे अन्य कई तरह की सुविधाओं का अभाव है. इस विद्यालय में वर्ग नवम, दशम एवं इंटर के छात्राओं की पढ़ाई संचालित है, पर विषयवार शिक्षक नही रहने के कारण छात्राएं सिर्फ उपस्थिति दर्ज कराने के लिये विद्यालय आते हैं. यहां देखा जाये तो दिनों भर छात्राओं को विद्यालय आने-जाने का दौर रहता है. विद्यालय खुलते ही छात्राएं विद्यालय तो पहुंचती हैं पर बस उपस्थिति दर्ज करवाने के बाद ही विद्यालय से जाने की दौर शुरू हो जाती है. समय का कोई माने मतलब नही है. हालांकि प्राचार्य द्वारा इसे रोकने का भरपूर प्रयास किया जाता है लेकिन उन्हें सहयोग नही मिलने के कारण वे विवश हो जाते हैं. प्राचार्य मिथिलेश कुमार सिंह ने बताया कि इस विद्यालय में वर्ग नवम से इंटर तक के छात्राओं की पढ़ाई होती है. वर्ग नवम में 576 एवं दशम में 515 छात्राएं नामांकित हैं. लेकिन दशम में कुल 490 छात्राओं ने ही रजिस्ट्रेशन फॉर्म जमा की है, वहीं इंटर कला में 120 एवं साइंस में 55 छात्राएं नामांकित है. उन्होंने बताया कि यहां शिक्षकों के साथ-साथ भवनों की घोर कमी है. मात्र 14 शिक्षकों के बदौलत लगभग डेढ हजार छात्राओं की पठन-पाठन करायी जाती है. जिसमें सभी विषय के शिक्षक भी नही हैं. भवन की बात की जाये तो यहां घोर अभाव है. मात्र सात कमरो में ही इन सभी छात्राओ की पढ़ाई होती है. मुश्किल तब बढ जाती है जब छात्राओं की परीक्षा ली जाती है. एक बार में सभी छात्राओं के लिये सीट उपलब्ध करवाना काफ ी कठिनाई होती है. प्राचार्य ने कहा कि इस समस्या से संबंधित आवेदन विभाग को दे दिया गया है.

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