मरहीधाम से मूर्ति चोरी में पुजारी की भूमिका संदेह के घेरे में,आधे दर्जन गांव में छाया मातम,भृगुमुनी का आशीर्वाद प्राप्त कर लोग करते थे नये कार्यों का शुभारंभ

Published at :17 Dec 2015 6:49 PM (IST)
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मरहीधाम से मूर्ति चोरी में पुजारी की भूमिका संदेह के घेरे में,आधे दर्जन गांव में छाया मातम,भृगुमुनी का आशीर्वाद प्राप्त कर लोग करते थे नये कार्यों का शुभारंभ

मरहीधाम से मूर्ति चोरी में पुजारी की भूमिका संदेह के घेरे में,आधे दर्जन गांव में छाया मातम,भृगुमुनी का आशीर्वाद प्राप्त कर लोग करते थे नये कार्यों का शुभारंभ फोटो नाम से भेजी गयी है. फोटो नंबर -22परिचय- घटनास्थल पर लगी लोगों की भीड़औरंगाबाद- देवकुंड.औरंगाबाद जिले के गोह प्रखंड के भुरकुंडा पंचायत में स्थित मरहीधाम लाखों […]

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मरहीधाम से मूर्ति चोरी में पुजारी की भूमिका संदेह के घेरे में,आधे दर्जन गांव में छाया मातम,भृगुमुनी का आशीर्वाद प्राप्त कर लोग करते थे नये कार्यों का शुभारंभ फोटो नाम से भेजी गयी है. फोटो नंबर -22परिचय- घटनास्थल पर लगी लोगों की भीड़औरंगाबाद- देवकुंड.औरंगाबाद जिले के गोह प्रखंड के भुरकुंडा पंचायत में स्थित मरहीधाम लाखों श्रद्धालुओं के आस्था के केंद्र के रूप में जाना जाता है. बताया जाता है कि मरहीधाम को 108 सिद्धि पीठों में 20वां स्थान हासिल है. ये हम नहीं कहते ,बल्कि भुरकुंडा पंचायत के बुजुर्गों का कहना है.नीरपुर और भुरकुंडा गांव के बीच स्थित मरही धाम में दो वर्ष पूर्व मंदिर का निर्माण कर वर्षों से जीर्णशीर्ण अवस्था में रखे मां सिंहवासिनी और भृगु ऋषि के अतिप्राचीन मूर्ति को स्थापित कराया गया था.मंदिर के भगवान की पूजा अर्चना व भोग लगाने के लिये भुरकुंडा गांव के संत विनोद पासवान को पुजारी के रूप में रखा गया था. हालांकि वर्ष 2001 से ही पुजारी प्रतिमा की देखरेख करते थे. मंदिर में रहने के दौरान मंदिर के समीप ही पुजारी के लिये एक झोपड़ी बनायी गयी,ताकि रात्रि में विश्राम कर सके.मंदिर से मूर्ति की चोरी होने के बाद पुजारी विनोद पासवान संदेह के घेरे में है. ग्रामीण के साथ-साथ पुलिस भी पुजारी पर संदेह व्यक्त कर रही है.संदेह करना भी लाजिमी है. बुधवार की रात जिस वक्त मंदिर में चोरों ने घुस कर मूर्ति को उखाड़ी या मूर्ति चोरी कर ले गये, उस वक्त पुजारी अपने झोपड़ी में नहीं थे. पुजारी ने पुलिस और मीडिया को बताया कि वे प्रतिदिन अपने झोपड़ी में रहते थे, लेकिन बुधवार की रात उनके पेट में दर्द होने की वजह से अपने गांव भुरकुंडा चले गये थे. ग्रामीणों की माने तो पुजारी अपने झोपड़ी में ही थे .गांव के कारू साव की माने तो वह खलिहान में सोया हुआ था और अहले सुबह जब शौच के लिये पुजारी की झोपड़ी से गुजरा तो पुजारी को आवाज लगायी,उस वक्त पुजारी झोपड़ी में थे. ग्रामीणों और पुजारी की बात में अंतर आ रही है,यही पुलिस के लिये फायदेमंद साबित हो रहा है. पुजारी के बार-बार बदलते बयान ने पुलिस को चोरी की घटना का उदभेदन करने में मदद मिलती दिख रही है. फिलहाल पुजारी को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है. अब केकर आशीर्वाद मिलतईमरहीधाम से मूर्ति चोरी होने के बाद भुरकुंडा पंचायत के अकुरी, गोरकटी, नीरपुर,भुरकुंडा, डुमरथू और गोह में श्रद्धालुओं के बीच सन्नाटा पसर गया है. ऐसा प्रतीत हो रहा है कि मां सिंहवासिनी और भृगु ऋषि को जाने के बाद लोग मर्माहत है. पुरूष के साथ-साथ महिला श्रद्धालुओं में ज्यादा बेचैनी है. महिला रोते हुए घटनास्थल पर पहुंची और कही कि सब कुछ बरबाद हो गइल . भगवानो रूठ गइलन. अब केकर आशीर्वाद हमनी के मिलतईन .महिला के इस दर्द ने जता दिया कि दोनों मूर्तियों से श्रद्धालुओं को कितना लगाव और आस्था था. ग्रामीणों की माने तो प्रतिदिन गांव के लोग मंदिर जाकर भगवान का आशीर्वाद लेते थे. अपने गांव में जब भी कोई नये कार्य का शुभारंभ करते थे तो एक बार मां सिंहवासिनी और भृगु ऋषि का आशीर्वाद लेना नहीं भुलते थे. मूर्ति उखाड़ने में चोरों के छुटे पसीने,अंतत: चोरी में पायी सफलतामरहीधाम मंदिर में जिस जगह से दोनों मूर्तियों को उखाड़ा गया है उस जगह को देखने से प्रतीत होता है कि अति प्राचीन मूर्ति को उखाड़ने में चोरों को पसीने छूट गये होंगे. मूर्ति के चारों तरफ लोहे के औजार से गडढे किये गये और फिर मूर्ति को उखाड़ने में रस्सा का उपयोग किया गया. घटनास्थल पर वाहन के चक्के के निशान भी पाये गये है. इससे पता चलता कि चोर वाहन लेकर पहुंचे थे और मूर्ति उखाड़ने के बाद उसे गाड़ी में रखा और आराम से चलते बने.होश संभालने के बाद से ही देख रहा हूं मूर्तिमंदिर से चोरी गये दोनों प्रतिमा प्राचीन थी. कोई भी लोग यह नहीं बता पा रहा है कि मरहीधाम में मूर्ति की स्थापना कब और किसने करायी थी.भुरकुंडा पंचायत के मुखिया रामचंद्र साव का कहना था कि जबसे होश संभाले है तब से दोनों मूर्तियों को देख रहा था. काले पत्थर की मूर्ति की कीमत का आकलन करना मुशिकल है. जब मूर्ति खुले आसमान में थी तो सुरक्षित थे और जब मंदिर में स्थापना की गयी तो मूर्ति चोर चुरा ले गये. यह आस्था के साथ खिलवाड़ है. डुमरथू गांव के शिव कुमार सिंह घटनास्थल पर गायब प्रतिमा को देख कर फफक पड़े. उनका कहना था कि यह अनहोनी की आशंका है.पहले भी भुरकुंडा मंदिर में चोरी हुई थी. अब हम लोग को आंसु के सिवा कुछ नहीं मिलेगा. अब देखना है कि पुलिस मूर्ति को खोज पाने में सफल हो पाती है कि नहीं. चोरी के बाद लोगों में चर्चाइ मंदिर बहुत पुराना हइ़ हमर बाबा भवनाथ कह हलथिन की हमर इयाद से पहिले से इ माई के मुर्ती स्थापित हई़ हमहु बराबर माई के दर्शन करे जाहली़माई जब बहरी रह हलन तब कोई चोर ना ले गेलई़ लेकिन मंदीर मे बंद माई के चोर चोरा लेलक़मिरपुर गांव निवासी नन्हकी कुंवरमै बहुत आस्था माता पर रखता हूं .मैं मंदिर निर्माण के समय अपने गांव डुमरथु से आकर परिश्रम के साथ माता का मंदिर का निर्माण कराया था़ हमे यहां आना बेकार है ज़ब माता हीं नहीं रही तो अब यहां कुछ नहीं रह गया है़ पुलिस पर से मेरा विश्वास हट गया है,क्योंकि पहले भी भुरकुंडा मंदिर में चोरी हुआ था़ आज तक पुलिस नाकामयाब रही़ अगर पुलिस खुलासा नहीं करेगी तो हमलोग आंदोलन करेंगे.शिव कुमार सिंह डुमरथुहमर उमर 70 साल हेय हम जहिया से होश संभाली हेय तबे से माई इहा हलऩ पहिले अइसही बहरी रह हलथिन दु साल पहिले मंदिर बनलइ हे मंदिर बंद हलइ ताला तोड़ के चोर चोरी कएलक हे .माइ ला हमनी सब कुछ रेला तइयार ही़ माइ न रहतन तब हमनी काहेला रहम.जगदीश साव मीरपुर

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