आठ वर्षों बाद भी छात्रावास का नर्मिाण अधूरा

आठ वर्षों बाद भी छात्रावास का निर्माण अधूरा फोटो नंबर-4,परिचय- दाउदनगर महाविद्यालय का अधूरा पड़ा छात्रावासदाउदनगर(अनुमंडल).एक तरफ जहां अनुमंडल मुख्यालय में छात्रावास का अभाव है तो दूसरी ओर दाउदनगर महाविद्यालय दाउदनगर में छात्राओं के लिए बनाये जा रहे छात्रावास का निर्माण आठ वर्षों में भी पूरा नहीं हो सका है. दाउदनगर अनुमंडल में मगध विश्वविद्यालय […]
आठ वर्षों बाद भी छात्रावास का निर्माण अधूरा फोटो नंबर-4,परिचय- दाउदनगर महाविद्यालय का अधूरा पड़ा छात्रावासदाउदनगर(अनुमंडल).एक तरफ जहां अनुमंडल मुख्यालय में छात्रावास का अभाव है तो दूसरी ओर दाउदनगर महाविद्यालय दाउदनगर में छात्राओं के लिए बनाये जा रहे छात्रावास का निर्माण आठ वर्षों में भी पूरा नहीं हो सका है. दाउदनगर अनुमंडल में मगध विश्वविद्यालय का एकमात्र अंगीभूत कॉलेज है. दाउदनगर, ओबरा, गोह व हसपुरा प्रखंड के विद्यार्थी इससे लाभान्वित होते हैं. काॅलेज सूत्रों के अनुसार इस काॅलेज के विभिन्न संकायों में 450 से भी अधिक छात्राओं का नामांकन है. नियमित पढ़ाई की सिर्फ खानापूर्ति होने के कारण छात्राएं नियमित तौर पर कॉलेज नहीं पहुंच पाती है. नामांकन कराने के बाद सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों की मेधावी छात्राएं निजी शिक्षण संस्थानों में या बाहर जाकर पढ़ाई करने को विवश है. छात्राओं के लिए कई सरकार छात्रावास नहीं होने के कारण उन्हें शैक्षणिक परेशानी झेलनी पड़ रही है. जब वर्ष 2007 में लगभग 50 लाख रुपये की लागत से 20 कमरों का तीन मंजिला छात्रावास का निर्माण शुरू हुआ था, तो ऐसा लगा था कि छात्रावास संबंधित समस्या कुछ हद तक दूर होगी. लेकिन करीब तीन-चार साल पहले काम को अधूरा करा कर छोड़ दिया गया है.कॉलेज सूत्रों ने बताया कि लगभग 25 लाख रुपये की लागत से ठेकेदार ने कमरों का निर्माण करा कर काम को अधूरा छोड़ दिया है. प्लास्टर, दरवाजा, शौचालय बनाने जैसे काम अभी बाकी है. यूजीसी द्वारा आवंटित रुपये के अलावे साढ़े 12 लाख रुपये कॉलेज को छात्रावास के निर्माण में खर्च करने थे. यदि इस छात्रावास का निर्माण पूरा हो जाता तो कम से कम 80 छात्राओं के लिए छात्रावास की व्यवस्था हो जाती.
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