कठवरी गांव में 18 घरों पर चला बुल्डोजर

Updated at :03 Apr 2015 8:27 AM
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कठवरी गांव में 18 घरों पर चला बुल्डोजर

हाइकोर्ट के आदेश पर अवैध तरीके से बनाये गये घरों को प्रशासन ने कराया ध्वस्त औरंगाबाद/ओबरा : गुरुवार को ओबरा प्रखंड के कठवरी गांव में अवैध रूप से जमीन का कब्जा कर घर बना कर रह रहे 18 लोगों के मकान को हाइकोर्ट के आदेश में प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया. दाउदनगर एसडीओ ओमप्रकाश के […]

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हाइकोर्ट के आदेश पर अवैध तरीके से बनाये गये घरों को प्रशासन ने कराया ध्वस्त
औरंगाबाद/ओबरा : गुरुवार को ओबरा प्रखंड के कठवरी गांव में अवैध रूप से जमीन का कब्जा कर घर बना कर रह रहे 18 लोगों के मकान को हाइकोर्ट के आदेश में प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया. दाउदनगर एसडीओ ओमप्रकाश के नेतृत्व में एसडीपीओ अनवर जावेद, डीसीएलआर मनोज कुमार, अंचलाधिकारी अनिल चौधरी, ओबरा थानाध्यक्ष रितुराज कुमार व पुलिस जवानों कठवरी गांव पहुंचे.
इस दौरान घर में रह रहे लोगों को सारा सामान के साथ निकल जाने का आदेश दिया. इस पर बेबस गरीब परिवार के लोग अपने-अपने सामान को लेकर घर से बाहर निकल गये. फिर प्रशासन ने अर्थमूवर चालक को घर ध्वस्त करने का निर्देश दिया. इसके बाद अर्थमूवर ने एक-एक कर सभी घरों को ध्वस्त कर दिया.
इन लोगों का घर हुआ ध्वस्त
रामसहाय पासवान, राम कुमार पासवान, मुसाफिर पासवान, शिव कुमार पासवान, विष्णु पासवान, धनेश्वर पासवान, रामप्रसाद पासवान, कॉलेश्वर पासवान, मंगेश्वर पासवान, सिकंदर पासवान, धर्मदेव पासवान, उपेंद्र पासवान, जवाहर पासवान, धनंजय पासवान, संजय पासवान, शंभु भुइंया, महावीर मिस्त्री के घर को ध्वस्त किया गया.
ग्रामीणों ने हाइकोर्ट में दर्ज कराया था मुकदमा
कठवरी गांव के ग्रामीण रामदेव सिंह, रामजनम सिंह, रामलखन सिंह, राजेंद्र सिंह, भीष्म नारायण सिंह सहित अन्य ग्रामीणों ने अवैध रूप से कब्जा कर घर बनाने से संबंधित मामला हाइकोर्ट में दायर किया था. सुनवाई के बाद कोर्ट ने मकान ध्वस्त करने का आदेश जिला प्रशासन को दिया था, जिस पर यह कार्रवाई हुई.
पीड़ितों को मिलेगी तीन डिसमिल जमीन: 18 घरों को ध्वस्त करने के बाद दाउदनगर एसडीओ ओमप्रकाश मंडल ने कहा कि जिन लोगों का मकान ध्वस्त किया गया है. उनलोगों को घर बनाने के लिए तीन-तीन डिसमिल जमीन दी जायेगी. ताकि घर बना कर पूरे परिवार के साथ जीवन यापन कर सकें. इधर घर ध्वस्त हो जाने के बाद 18 परिवार के लोग खुले आसमान में रहने को विवश हो गये हैं. कुछ लोग तो रिश्तेदार के घर चले गये हैं तो कुछ खुले आसमान के नीचे ही हैं.
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