दाउदनगर : नियोजित शिक्षकों को समान वेतन पर सुनवाई आज

Updated at : 12 Jul 2018 12:29 AM (IST)
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दाउदनगर : नियोजित शिक्षकों को समान वेतन पर सुनवाई आज

दाउदनगर : नियोजित शिक्षकों के समान काम के लिए समान वेतन मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई गुरुवार को होनी है. नियोजित शिक्षकों की निगाहें सुप्रीम कोर्ट के होनेवाले फैसले पर टिकी हैं. परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ के जिला मीडिया प्रभारी सुनील कुमार बॉबी ने कहा कि समान वेतन को लेकर होनेवाली गुरुवार की सुनवाई […]

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दाउदनगर : नियोजित शिक्षकों के समान काम के लिए समान वेतन मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई गुरुवार को होनी है. नियोजित शिक्षकों की निगाहें सुप्रीम कोर्ट के होनेवाले फैसले पर टिकी हैं. परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ के जिला मीडिया प्रभारी सुनील कुमार बॉबी ने कहा कि समान वेतन को लेकर होनेवाली गुरुवार की सुनवाई अंतिम सुनवाई होगी. इसमें नियोजित शिक्षकों की जीत सुनिश्चित है. उन्होंने बताया कि परिवर्तनकारी संगठन के प्रदेश अध्यक्ष वंशीधर ब्रजवासी अपनी टीम के साथ दिल्ली पहुंच गये हैं.
अपने तर्क के साथ तैयार हैं. संघ के द्वारा अच्छे वकीलों का भी चयन किया गया है. श्री बॉबी ने कहा कि नियोजित शिक्षकों को समान काम का समान वेतन देने का आदेश पटना हाई कोर्ट ने गत 31 अक्तूबर को दिया था. पटना हाईकोर्ट के फैसले को एसएलपी के जरिये राज्य सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गयी. राज्य सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में गत 15 दिसंबर को एसएलपी दायर की गयी थी.
इस मामले की पहली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में गत 29 जनवरी को हुई, जिसमें सभी पक्षों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह मुख्य सचिव स्तर के तीन अधिकारियों की कमेटी बनाकर पूरे मामले पर रिपोर्ट सौंपे, लेकिन राज्य सरकार के रिपोर्ट से बात नहीं बनी.
15 मार्च को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने यह पूछा कि पानी पिलाने वाले चपरासी से कम वेतन शिक्षकों को कैसे दिया जा रहा है. राज्य सरकार की ओर से दलील दी गया कि सरकार की वित्तीय स्थिति ऐसी नहीं है कि वह समान वेतन शिक्षकों को दे सके.
उसके बाद इस मामले की सुनवाई गत 27 मार्च को हुई उस दिन सुनवाई शुरू होते ही एटॉर्नी जनरल ने इस मामले में केंद्र का पक्ष रखने के लिए कोर्ट से चार सप्ताह का समय मांगा. एटॉर्नी जनरल ने कहा कि यह मामला ऐसा है कि जिसका असर दूसरे राज्यों की सरकारों पर भी पड़ने वाला है.
इसलिए केंद्र से बात कर कोर्ट में उसका पक्ष रखने के लिए समय चाहिए. नतीजतन सुनवाई की तिथि 12 जुलाई तय हुई. शिक्षकों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई अंतिम होगी.बॉबी ने कहा कि कोर्ट पर शिक्षकों की आस्था है. शिक्षक कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं. नियोजित शिक्षकों की जीत सुनिश्चित है.
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