कंटेनर से कुचल रोजगार सेवक की मौत

Updated at : 10 Apr 2018 4:22 AM (IST)
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कंटेनर से कुचल रोजगार सेवक की मौत

लगभग तीन घंटे तक जाम रही सड़क पत्नी और बच्चों के साथ औरंगाबाद में रहता था औरंगाबाद कार्यालय : औरंगाबाद-डालटेनगंज रोड पर मुफस्सिल थाना क्षेत्र के भरकुर गांव के समीप एक अनियंत्रित कंटेनर ने नवीनगर प्रखंड चंद्रगढ़ पंचायत के रोजगार सेवक प्रमोद राम को कुचल दिया. इससे घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गयी. प्रमोद […]

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लगभग तीन घंटे तक जाम रही सड़क

पत्नी और बच्चों के साथ औरंगाबाद में रहता था
औरंगाबाद कार्यालय : औरंगाबाद-डालटेनगंज रोड पर मुफस्सिल थाना क्षेत्र के भरकुर गांव के समीप एक अनियंत्रित कंटेनर ने नवीनगर प्रखंड चंद्रगढ़ पंचायत के रोजगार सेवक प्रमोद राम को कुचल दिया. इससे घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गयी. प्रमोद राम कुटुंबा प्रखंड के बदरपुर गांव का रहने वाले थे और अपने परिवार के साथ औरंगाबाद शहर में रहते थे. वह सोमवार की सुबह अपनी बाइक से पंचायत चंद्रगढ़ जा रहे थे. भरकुर गांव के समीप अंबा की ओर से औरंगाबाद की ओर जा रहे अनियंत्रित कंटेनर सीजी 22 एसी-1952 ने उन्हें कुचल दिया. इससे उनकी मौत हो गयी. इधर घटना के विरोध में स्थानीय लोगों ने घटनास्थल पर सड़क को जाम कर दिया.
कुछ ही देर बाद बदरपुर और मृतक के ससुराल कुशी से भारी संख्या में लोग पहुंच गये व अपने आक्रोश का इजहार किया. घटना की सूचना पाकर मुफस्सिल थानाध्यक्ष कृष्णनंदन कुमार, पुलिस पदाधिकारी परमहंस राय,विजय कुमार पहुंचे और आक्रोशित लोगों को समझा-बुझा कर शांत कराया. लगभग तीन घंटे तक सड़क जाम रहा और वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं. किसी तरह पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए औरंगाबाद भेजा. चंद्रगढ़ पंचायत के रोजगार सेवक प्रमोद राम की सड़क दुर्घटना में मौत की सूचना होने के बाद औरंगाबाद,
अंबा व आसपास के इलाके में काम करने वाले रोजगार सेवक आक्रोशित हो गये और फिर पुलिस द्वारा पोस्टमार्टम के लिए भेजे गये शव को अपने कब्जे में कर उसे समाहरणालय के समीप ले गये और फिर शव के साथ मुआवजा व आश्रित को नौकरी की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया. हंगामे की स्थिति को देख डीडीसी संजीव कुमार व एसडीपीओ पीएन साहू पहुंचे व रोजगार सेवकों को शांत कराया. डीडीसी ने कहा कि सरकारी नियमानुसार काम किया जायेगा.
तीन बच्चों के साथ परिवार की जिम्मेदारी उठा रहा था प्रमोद
पंचायत रोजगार सेवक प्रमोद राम पर तीन मासूम बच्चों के साथ पूरे परिवार के भरण पोषण की जिम्मेवारी थी. वैसे वह चार भाई में दूसरे नंबर पर था. पता चला कि अपनी सात वर्षीय बेटी मौसम,पांच वर्षीय बेटी वर्षा, दो वर्षीय बेटा बादल और अपनी पत्नी रूबी देवी के साथ औरंगाबाद शहर में रहता था और यहीं बच्चों की पढ़ाई कराता था.
सुबह-सुबह अपनी पत्नी से वह जल्द लौटने की बात कह कर चंद्रगढ़ निकला था,लेकिन वह लौटा जरूर पर ताउम्र दुख देने वाली टीस के साथ. इधर अपने पति के शव देख रूबी अचानक बेहोश हो गयी. काफी देर के बाद जब होश आया तो उसकी स्थिति देख आसपास मौजूद लोगों की आंखें भर आयीं. इस घटना के बाद बदरपुर और उसके ससुराल कुशी में मातम का माहौल कायम हो गया है.
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