गर्मी में पशुओं को हो सकती हैं घातक बीमारियां, बरतें सावधानी

Updated at : 07 Apr 2018 4:43 AM (IST)
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गर्मी में पशुओं को हो सकती हैं घातक बीमारियां, बरतें सावधानी

मदनपुर : गर्मी की शुरुआत हो चुकी है. इस मौसम में जहां आम लोगों के स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है. वहीं इस मौसम का असर पशुओं पर भी देखा जा रहा है. अधिकतर पशुओं के बीच गर्मी जनित रोगों के लक्षण देखने को मिल रहे हैं, जिससे पशुपालक परेशान हैं. साथ ही भैंसों को […]

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मदनपुर : गर्मी की शुरुआत हो चुकी है. इस मौसम में जहां आम लोगों के स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है. वहीं इस मौसम का असर पशुओं पर भी देखा जा रहा है. अधिकतर पशुओं के बीच गर्मी जनित रोगों के लक्षण देखने को मिल रहे हैं, जिससे पशुपालक परेशान हैं. साथ ही भैंसों को उन्हें प्रतिदिन स्नान कराने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिल पा रहा है. इसके अलावा पहाड़ी क्षेत्र के खेत खलिहान में चरनेवाले मवेशियों को नदी नाले का पानी भी नसीब नहीं हो पा रहा है, जिसके कारण अक्सर मवेशी गर्मी जनित रोगों का शिकार हो रहे हैं.प्रखंड में बहुतायत संख्या में पशुपालक हैं. ऐसे मौसम में पशुपालकों को अपने पशुओं पर विशेष ध्यान रखने की जरूरत है.

पशुओं में होने वाली प्रमुख बीमारी : गर्मी के मौसम में पशुओ को कई घातक बीमारिया होने की आशंका रहती है, खासकर इस मौसम में पशुओं को लू लगना ,चेचक, कंठा, लगड़िया आदि है.
लू से बचाव : पशुओं को लू न लगे इसके लिए पशुपालकों को इस मौसम में पशुओं को बगीचे में पेड़ के नीचे बांधे , दोपहर में पशुओं को खुले में चरने नहीं देना चाहिए. रात में हवादार घर में बांधे पशुओं को दिन में कम से कम दो बार नहलाएं तथा पशुओं को लू से बचाने के लिए प्रत्येक दिन 75 ग्राम खाने वाला सोडा दाने के साथ पशुओं को देना चाहिए.
कंठा बीमारी के लक्षण व बचाव : गर्मी के मौसम में पशुओं को बुखार आना, हापना, गला में सूजन तथा गले से घर्र घर्र की आवाज निकलती हो तो पशुओं को कंठा बीमारी हो सकती है कंठा बीमारी के लिए प्रखंड के पशु अस्पताल में टीकाकरण उपलब्ध है जिससे बचाव के लिए अप्रैल माह में पशुओं को टीका लगवाना चाहिए.
लंगड़ी बीमारी के लक्षण व बचाव : गर्मी के मौसम में पशु खाना बंद कर दे पशुओं के कमर के पास का मांसल भाग फुला नजर आए तो पशुओं को लंगड़िया बीमारी हो सकती है लंगड़िया बीमारी से पशुओं को बचाने के लिए अप्रैल माह में टीका लगवाए.
चेचक के लक्षण व बचाव : चेचक बीमारी में पशुओं के थन में छोटा छोटा पीला सा घाव हो जाता है. इसके बचाव के लिए पशुपालको को होम्योपैथी दवा बैरियोलिनीयम 30 सुबह शाम 10-10 बूंद देना चाहिए तथा घाव को लाल पोटाश के घोल से साफ करें एवं 100 एमएल नारियल तेल में 2-3 ग्राम बोरिक एसिड मिलाकर पशुओं को लगाएं.
क्या कहते हैं पशु चिकित्सक: भ्रमर चिकित्सा पदाधिकारी डॉ श्रवण कुमार ने इस संबंध में बताया कि गर्मी के मौसम में पशुपालकों को अपने पशुओं का विशेष ध्यान देना चाहिए तथा इस मौसम में होने वाली बीमारी के लिए पशुओं को टीका लगवाना जरूरी है. इन सभी बीमारियों से बचाव के लिए अस्पताल में टीका उपलब्ध है .पशुपालक को पशुओं में उपरोक्त कोई लक्षण दिखाई दे तो पशुपालक तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क कर उनकी सलाह लें.
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