नहाय-खाय के साथ चैती छठ व्रत शुरू, सीएम नीतीश ने राज्यवासियों को दी शुभकामनाएं

औरंगाबाद/पटना : सूर्य उपासना का महापर्व छठ नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया. इस पर्व पर छठी माता के साथ भगवान सूर्य की पूजा और उपासना की जाती है. ऐसी मान्यता है कि छठी माता भगवान सूर्य की बहन है, इसलिए उन्हें प्रसन्न करने के लिए इनकी पूजा जरूरी है. ये त्योहार चार दिवसीय होता […]
औरंगाबाद/पटना : सूर्य उपासना का महापर्व छठ नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया. इस पर्व पर छठी माता के साथ भगवान सूर्य की पूजा और उपासना की जाती है. ऐसी मान्यता है कि छठी माता भगवान सूर्य की बहन है, इसलिए उन्हें प्रसन्न करने के लिए इनकी पूजा जरूरी है. ये त्योहार चार दिवसीय होता है, जिसे लेकर व्रती काफी उत्साहित हैं. लोग घरों में छठी मइया के भजन और गीत की आवाजें सुनाई पड़ रही हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चैती छठ के अवसर पर प्रदेशवासियों काे बधाई एवं शुभकामनाएं दी.
मुख्यमंत्री ने कहाहै कि छठ आत्मानुशासन का पर्व है, जिसमें लोग आत्मिक शुद्धि और निर्मल मन से अस्ताचल और उदयीमान भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं. नीतीश कुमार ने कहा कि चैती छठ राज्यवासियों के लिये सुख, समृद्धि एवं शांति लेकर आये.
नहाय-खाय के दिन अरवा चावल, कद्दू का विशेष महत्व
नहाय-खाय के दिन अरवा चावल व कद्दू का विशेष महत्व है. खरना का प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रतियों का 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू होगा. व्रतियों ने सुबह में घर की साफ-सफाई के बाद स्नान-ध्यान कर अरवा चावल, चने की दाल और कद्दू की सब्जी बनायी. इसके बाद छठी मइया को स्मरण कर भोजन ग्रहण किया. खरना का प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रतियों का 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू होगा.
व्रती शुक्रवार को तालाब पर जाकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ अर्पित करेंगे और शनिवार की सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ देने के बाद प्रसाद खाकर व्रत को समाप्त करेंगे. वहीं दूसरी ओर छठ पर्व को लेकर शहर के घाटों की सफाई की जा रही है. बाजारों में खरीददारों की भी भीड़ देखी जा रही है. साथ ही साथ देव में श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया है. इस बार दस लाख श्रद्धालुओं की आने की संभावना व्यक्त की जा रही हैं.
देव में आनेवाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं हो इस पर जिला प्रशासन द्वारा विशेष रूप से तैयारी की गयी हैं, लेकिन मेला में कर लागू कर दिये जाने से कुछ लोगों में जिला प्रशासन के विरुद्ध नाराजगी हैं. लोगों का कहना हैं कि पिछले चार वर्षों से मेला में कोई शुल्क नहीं लगता था, लेकिन इस बार शुल्क लागू कर दिया गया हैं जो ठीक नहीं हैं.
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