बेटी को पाने के लिए पांच साल से दर-दर की ठोकरें खा रही एक आदिवासी महिला

Updated at : 31 Aug 2017 10:33 AM (IST)
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बेटी को पाने के लिए पांच साल से दर-दर की ठोकरें खा रही एक आदिवासी महिला

रांची जिले के हातमा की रहनेवाली पीड़िता ने महिला हेल्पलाइन में की शिकायत गया के दुखहरणी फाटक के पास रहनेवाले नौशाद के पास है महिला की छोटी बेटी औरंगाबाद कार्यालय : अपनी ही बेटी को पाने व एक व्यक्ति के कब्जे से छुड़ाने के लिए एक आदिवासी महिला दर-दर की ठोकरें खा रही है. पीड़िता […]

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रांची जिले के हातमा की रहनेवाली पीड़िता ने महिला हेल्पलाइन में की शिकायत
गया के दुखहरणी फाटक के पास रहनेवाले नौशाद के पास है महिला की छोटी बेटी
औरंगाबाद कार्यालय : अपनी ही बेटी को पाने व एक व्यक्ति के कब्जे से छुड़ाने के लिए एक आदिवासी महिला दर-दर की ठोकरें खा रही है. पीड़िता का नाम मीनू देवी है और वह झारखंड के रांची स्थित हातमा की रहनेवाली है.
बेटी को पाने के लिए पिछले पांच साल से जंग लड़ रही है. इस जंग में उसका कोई सहारा नहीं दिख रहा था, पर अब उसे औरंगाबाद के महिला हेल्पलाइन सेंटर का सहारा मिला है. इससे उसकी आंखों में उम्मीद की किरणें दिखने लगी हैं. जिस बेटी अंकिता लकड़ा को पाने के लिए महिला तड़प रही है, उसका जन्म 2004 में हुआ है और मामले की शुरुआत महिला के पति अनिल लकड़ा के 11 दिसंबर 2012 में निधन के बाद से होती है.
गया में काम करता था महिला का पति : जानकारी के मुताबिक, महिला का पति गया के दु:खहरणी फाटक के पास मो नौशाद के गैरेज में काम करता था और महिला भी पति के साथ गया में ही रहा करती थी.
कुछ दिन बाद पति-पत्नी औरंगाबाद के चितौड़नगर में किराये का मकान लेकर रहने लगे. इस बीच, पति की मौत हो गयी. मरने से पहले अनिल ने अपने आठ वर्षीय बच्ची अंकिता को नौशाद के घर छोड़ आया था कि वह जब आयेगा तो ले जायेगा. यही से कहानी करवट ले लेती है. पति की मौत के बाद जब मीनू अपनी बेटी को लाने के लिए नौशाद के पास गयी, तो उसने कहा कि उसके पति ने अंकिता को गोद दे दिया है.
पहले तो मामला आज-कल पर चलता रहा, फिर मीनू पारिवारिक मजबूरी और बड़ी बेटी की शादी को लेकर कुछ साल तक चुप रह गयी. जब बड़ी बेटी आलिशा लकड़ा की शादी वर्ष 2015 में कर दी, तब दूसरी बेटी को पाने के लिए लड़ाई लड़नी शुरू कर दी. 18 जुलाई, 2016 को गया के कोतवाली थाने में मीनू ने प्राथमिकी दर्ज करवायी, जिसमें नौशाद को आरोपित बनाया. मामला कोर्ट में गया, लेकिन सुनवाई नौशाद के पक्ष में गयी. पुलिस पदाधिकारियों और कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए महिला ने फिर लड़ाई शुरू कर दी.
डीआइजी, आइजी, डीएम, एसपी से लेकर सीएम के दरबार में गुहार लेकर पहुंची, पर कहीं सुनवाई नहीं हुई. थक-हार कर औरंगाबाद के महिला हेल्पलाइन में पहुंची और न्याय की गुहार लगायी. महिला हेल्पलाइन की महिला संरक्षण पदाधिकारी कांति कुमारी ने मामले पर सुनवाई करते हुए 30 अगस्त को नौशाद को उपस्थित होने का नोटिस जारी किया. नौशाद समय पर हाजिर हुआ.
इसके बाद नौशाद और मीनू से हुई पूछताछ के आधार पर सुनवाई शुरू हुई. इस दौरान माहौल गर्म भी दिखा. महिला हेल्पलाइन पदाधिकारी ने कहा कि वह महिला की बेटी का दत्तक पिता है और उसके पति ने उसे गोद दे दिया था, लेकिन दत्तक ग्रहण के साक्ष्य के रूप में वह कोई कागजात प्रस्तुत नहीं कर सका. इस मामले में हेल्पलाइन द्बारा नौशाद को आठ सितंबर की अगली तारीख पर महिला की बेटी के साथ सशरीर हेल्पलाइन में उपस्थित होने का आदेश दिया गया है.
उन्होंने बताया कि पीड़िता को महिला हेल्पलाइन द्वारा न्याय दिलाने में भरपूर सहयोग किया जायेगा. इधर, नौशाद ने कहा कि महिला ने जो आरोप लगाया है वह गलत है. महिला के पति ने बच्ची को गोद दिया था.
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