जमीन व स्ट्रेचर पर हो रहा मरीजों का इलाज
Updated at : 25 Aug 2017 4:58 AM (IST)
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उपेक्षा. सदर अस्पताल में बेड की है कमी नशामुक्ति केंद्र में बेकार पड़े हैं 10 बेड ओपीडी में केवल 37 बेड ही हैं उपलब्ध औरंगाबाद नगर : सदर अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था सुधरने की बजाय दिनोंदिन बिगड़ती ही जा रही है. इस अस्पताल में प्रत्येक दिन 1200 से 1300 मरीज इलाज कराने के लिए पहुंच […]
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उपेक्षा. सदर अस्पताल में बेड की है कमी
नशामुक्ति केंद्र में बेकार पड़े हैं 10 बेड
ओपीडी में केवल 37 बेड ही हैं उपलब्ध
औरंगाबाद नगर : सदर अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था सुधरने की बजाय दिनोंदिन बिगड़ती ही जा रही है. इस अस्पताल में प्रत्येक दिन 1200 से 1300 मरीज इलाज कराने के लिए पहुंच रहे हैं. चिकित्सकों की कमी होने के कारण इलाज कराने में मरीजों को परेशानी हो रही है, तो दूसरी ओर बेड के अभाव में मरीजों को जमीन पर या स्ट्रेचर पर इलाज कराने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.
गुरुवार को अस्पताल के बरामदे में नाली के पास स्ट्रेचर पर ओबरा बाजार की एक महिला का इलाज किया जा रहा था. वहीं पर ऑक्सीजन भी चढ़ाया जा रहा था. यही नहीं कारा गांव से पहुंची एक महिला पेट दर्द से कराह रही थी. महिला चिकित्सक ने उसे अस्पताल में भर्ती कर इलाज करने का सलाह दी. उसके बाद महिला के परिजन उसे नर्स ड्यूटी रूम में लेकर पहुंचे, तो ड्यूटी पर कार्यरत नर्स द्वारा यह कहा गया कि अस्पताल में कोई भी बेड खाली नहीं है. अस्पताल उपाधीक्षक के प्रयास से किसी तरह महिला को इमरजेंसी वार्ड में ले जाकर भर्ती किया गय. उपाधीक्षक ने बताया कि अस्पताल में कुल 106 बेड हैं, जिसमें जनरल मरीजों के भर्ती करने के लिए मात्र 37 बेड हैं, जबकि 10 बेड नशा मुक्ति केंद्र के जिम्मे हैं, जो सभी के सभी खाली पड़े हैं. जब से आइसीयू वार्ड बन गया है, तब से बेड की कमी हो गयी है, क्योंकि अस्पताल में कहीं पर जगह खाली नहीं है कि बेड को लगाया जाये. अस्पताल परिसर में पोषण पुनर्वास केंद्र चल रहा है. यदि उसे यहां से खाली करा कर दूसरे जगह शिफ्ट कर दिया जाता, तो उसमें वार्ड बन सकता था. वैसे तो इस अस्पताल के लिए 300 बेड प्रस्तावित हैं, लेकिन फिलहाल अस्पताल में बेड की घोर कमी है. हर रोज इसके लिए मारामारी हो रही है.
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