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चारू मजुमदार का शहादत दिवस मनाया गया

Updated at : 29 Jul 2016 4:39 AM (IST)
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चारू मजुमदार का शहादत दिवस मनाया गया

अरवल : भाकपा माले के संस्थापक महासचिव का. चारू मजुमदार का 45वां शहादत दिवस पार्टी जिला कार्यालय सहित जिले के विभिन्न जगहों पर मनायी गयी. इस संबंध में बताया गया कि शहादत दिवस मनाने के पूर्व पार्टी कार्यालय में उपेंद्र राम के द्वारा झंडोतोलन किया गया. इसके बाद कॉमरेड मजुमदार के चित्र पर माल्यार्पन कर […]

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अरवल : भाकपा माले के संस्थापक महासचिव का. चारू मजुमदार का 45वां शहादत दिवस पार्टी जिला कार्यालय सहित जिले के विभिन्न जगहों पर मनायी गयी. इस संबंध में बताया गया कि शहादत दिवस मनाने के पूर्व पार्टी कार्यालय में उपेंद्र राम के द्वारा झंडोतोलन किया गया. इसके बाद कॉमरेड मजुमदार के चित्र पर माल्यार्पन कर श्रद्धांजलि दी गयी. इसके अलावा खमैनी पंचायत के आकोपुर गांव में कॉमरेड गणेश यादव,

कॉमरेड रविंद्र यादव भी कार्यक्रम आयोजित कर मजुमदार को श्रद्धांजलि दी . सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि 28 जुलाई हम लोगों के लिए ऐतिहासिक दिन है. पार्टी के संस्थापाक महासचिव कॉमरेड मजुमदार को 1972 में प. बंगाल के लाल बाजार थाने के लॉकअप में हत्या कर दी गयी थी. वक्ताओं ने कहा की पार्टी के सदस्यों को यह सकंल्प लेना चाहिए कि कॉमरेड मजुमदार के विचारों को अपना कर गरीब, दलितों पर हो रहे अत्याचार के विरुद्ध में मुंह तोड़ जवाब दिया जा सकता है.

मजदूर किसानों की हक की लड़ाई लड़ता रहेगा माले: जहानाबाद नगर. भाकपा माले की प्रथम राष्ट्रीय महासचिव चारू मजुमदार का 44वीं शहादत दिवस मनाया गया. भाकपा माले जिला कार्यालय में पार्टी के वरिष्ठ नेता वसी अहमद ने झंडोतोलन कर शहादत दिवस मनाया. जबकि जिले के अन्य प्रखंडों में भी शहादत दिवस मनाया गया. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय कमेटी सदस्य रामजतन शर्मा ने कहा कि मजदूर किसानों की हक की लड़ाई लडते हुए चारू मजुमदार ने अपनी शहादत दी है. पार्टी किसान मजदूरों की हक की लड़ाई लड़ता रहेगा.
उन्होंने कहा कि दलित उत्पीड़न और सांप्रदायिक हमलों के खिलाफ पार्टी मुहिम छेड़ेगी और तमाम छात्र, युवाओं, महिलाओं को भ्रष्टाचार, अपराध, बलात्कार के खिलाफ सड़कों पर उतारना होगा तभी निकम्मी सरकार गरीबों व न्याय पसंद लोगों की बात सुनेगी. उन्होंने कहा कि गरीबों को न्याय नहीं मिल रहा है क्योंकि सरकार मुट्ठी भर लोगों की ही बात सुनती है. दबे कुचले लोगों को अपनी बात सुनाने के लिए आंदोलन ही एक रास्ता है. कार्यक्रम में महानंद, लीला वर्मा, श्याम पांडेय, श्रीनिवास शर्मा, गणेश दास, प्रदीप कुमार, वितन मांझी, गरीबन दास आदि ने अपनी बातें रखी.
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