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कर्मियों को रहने के लिए नहीं है सरकारी आवास

Updated at : 07 Jun 2019 5:23 AM (IST)
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कर्मियों को रहने के लिए नहीं है सरकारी आवास

अरवल : प्रखंड मुख्यालय में सरकारी कर्मियों को रहने के लिए सरकारी आवास का नहीं होना एक बड़ी समस्या है. इस कारण सरकारी कर्मी का मुख्यालय में कोई ठिकाना नहीं है. बहुत से कर्मियों को कार्यालय अवधि के बाद मुख्यालय से बाहर अन्य प्रखंड स्थित अपने ठिकाने का रूख करना पड़ता है. कुछ कर्मी मुख्यालय […]

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अरवल : प्रखंड मुख्यालय में सरकारी कर्मियों को रहने के लिए सरकारी आवास का नहीं होना एक बड़ी समस्या है. इस कारण सरकारी कर्मी का मुख्यालय में कोई ठिकाना नहीं है. बहुत से कर्मियों को कार्यालय अवधि के बाद मुख्यालय से बाहर अन्य प्रखंड स्थित अपने ठिकाने का रूख करना पड़ता है. कुछ कर्मी मुख्यालय में दशकों पूर्व बने जर्जर सरकारी क्वाटर में रहने को मजबूर हैं.
जहां हर पल हादसे की आशंका बनी रहती है. कई ऐसे कर्मी भी हैं जो मुख्यालय बाजार में महंगा किराया चुका कर अपना ठिकाना बनाये हुए है. जबकि कुछ कर्मी बाहर के शहर से हर दिन आते है. हालात यह है कि कर्मी की कौन कहे कई विभाग के पदाधिकारियों को भी अपना आवास नहीं है. इस कारण आवास के अभाव में वे मुख्यालय से बाहर ही रहते हैं.
हैरत की बात है कि जिन कर्मियों व पदाधिकारियों की बदौलत सरकार जनसेवा व क्षेत्र के चहुमूखी विकास कार्य को अंजाम देती है. सरकार उस मुलाजिमों को रहने के लिए आवास दे पाने में सक्षम नहीं हो पा रही या उनके पास ऐसी कोई योजना नहीं है. कर्मियों व पदाधिकारियों की माने तो सरकार भले ही विभिन्न क्षेत्रों में खर्च करने के लिए उनलोगों को करोड़ों रुपये देती है, लेकिन नया सरकारी क्वाटर का निर्माण तो दूर पूर्व से निर्मित जर्जर क्वाटरों की मरम्मत के लिए भी सरकार की कोई मंशा नहीं है.
प्रखंड कार्यालय भी जर्जर स्थिति में
प्रखंड और अंचल मुख्यालय में 55 कर्मचारी कार्य करते हैं, जो बाहर रहते हैं. कुछ अरवल में किराये के मकान में रहते हैं तो कुछ जहानाबाद से आवाजाही करते हैं. वहीं सदर प्रखंड कार्यालय भी जर्जर स्थिति में है. 1952-53 के आसपास बना प्रखंड कार्यालय जर्जर हो चुका है. प्रखंड कार्यालय किसी तरह कामचलाऊ व्यवस्था में चल रहा है, जिसके कारण आम लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.
सरकारी क्वाटरों का निर्माण ग्रामीण विकास विभाग द्वारा कराया जाना है. मई माह से कार्य लगने वाला था, लेकिन चुनाव कार्य के कारण नहीं लग पाया. सदर प्रखंड की मापी हो गयी है. प्रखंड अंचल कार्यालय के साथ-साथ कर्मचारियों को रहने के लिए आवास की भी सुविधा होगी.
– सुशील कुमार, बीडीओ, अरवल
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