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ट्यूबवेल खराब, िकसान परेशान

Updated at : 21 Nov 2017 4:22 AM (IST)
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ट्यूबवेल खराब, िकसान परेशान

करपी (अरवल) : प्रखंड क्षेत्र में अस्सी के दशक में ट्यूबवेल द्वारा खेतों की सिंचाई होती थी, जिससे फसल हरी-भरी रहती थी. यहां की धरती सोना उगलती थी. एक फसल तैयार होती नहीं थी कि दूसरी फसल लगाने की तैयारी शुरू हो जाती थी. हर मौसम में खेतों में हरियाली छायी रहती थी. इससे किसान […]

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करपी (अरवल) : प्रखंड क्षेत्र में अस्सी के दशक में ट्यूबवेल द्वारा खेतों की सिंचाई होती थी, जिससे फसल हरी-भरी रहती थी. यहां की धरती सोना उगलती थी. एक फसल तैयार होती नहीं थी कि दूसरी फसल लगाने की तैयारी शुरू हो जाती थी. हर मौसम में खेतों में हरियाली छायी रहती थी. इससे किसान खुशहाल थे परंतु अस्सी के दशक के बाद से बिजली की स्थिति ऐसी चरमराई की सारे ट्यूबवेल बंद हो गये.

इससे खेतों को पानी मिलना बंद हो गया. जिन खेतों में साल भर हरियाली छायी रहती थी वहां अब विरानगी नजर आती है. इसका असर किसानों पर भी पड़ा. अच्छी पैदावार होने से जहां इनके घर-परिवार में खुशहाली छायी रहती थी वहां आज फटेहाली की स्थिति बन गयी है. समय के चक्र के साथ ट्यूबवेल के सामान भी गायब होते चले गये. हालांकि सरकार ने बंद पड़े सभी ट्यूबवेल को चालू कराने की घोषणा की थी. इससे किसानों में खुशी हुई थी. लोगों को उम्मीद जगी थी कि क्षेत्र में फिर से खुशहाली लौटेगी, लेकिन समय के साथ घोषणाएं भी छलावा साबित हो रही हैं.
इस संबंध में करपी निवासी नरेश सिंह, मधुसूदन सिंह समेत अन्य ग्रामीणों ने बताया कि अस्सी के दशक में प्रखंड मुख्यालय के निकट लगे ट्यूबवेल से हजारों एकड़ खेतों की सिंचाई होती थी. इसमें कुछ ऐसे भी खेत थे जिनकी सिंचाई का एकमात्र सहारा ट्यूबवेल ही था. इन खेतों में सब्जी व गेहूं की खेती की जाती थी परंतु ट्यूबवेल के बंद होने से खेत बंजर पड़े हैं. फिलहाल में ट्यूबवेल के लिए बने कमरा सूअरों का बसेरा बना हुआ है. करहरी, पुराण, सोनभद्र, मोगलापुर, माली समेत दर्जनों स्थानों पर लगे ट्यूबवेल से हजारों एकड़ खेतों की सिंचाई होती थी.
इससे अधिक पैदावार होती थी, जिससे किसान भी खुशहाल थे, लेकिन ट्यूबवेल के बंद होने के बाद यहां के किसान अब केवल मॉनसून के भरोसे रहते हैं. इन जगहों पर लगे कई ट्यूबवेलों का नामोनिशान मिटने के कगार पर है.
क्या कहते हैं किसान
सचमुच अगर ट्यूबवेल चालू हो जाये तो सैकड़ों एकड़ भूमि लहलहा उठेगी. किसान अपनी मेहनत से साग-सब्जी का उत्पादन कर जीवन स्तर में सुधार ला सकते हैं.
मुनारिक सिंह
ट्यूबवेल को चालू कर दिया जाये तो प्रखंड के किसानों के अच्छे दिन आ जायेंगे. खेतों में फिर से सोना उगने लगेंगे.
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