बिहार खनन नीति के खिलाफ ट्रक मालिकों का दो दिवसीय सांकेतिक हड़ताल

Updated at : 01 Mar 2025 10:56 PM (IST)
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बिहार खनन नीति के खिलाफ ट्रक मालिकों का दो दिवसीय सांकेतिक हड़ताल

बिहार खनन नीति 2024 में संशोधन की मांग को लेकर शनिवार की देर रात 12 बजे से ट्रक मालिकों ने बिहार के सभी जिले में बालू और गिट्टी, मिट्टी के खनिज का उठाव करना बंद कर दिया है.

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आरा.

बिहार खनन नीति 2024 में संशोधन की मांग को लेकर शनिवार की देर रात 12 बजे से ट्रक मालिकों ने बिहार के सभी जिले में बालू और गिट्टी, मिट्टी के खनिज का उठाव करना बंद कर दिया है. ट्रक मालिकों की मांग को लेकर बिहार ट्रक ऑनर एसोसिएशन के आह्वान पर भोजपुर जिला ट्रक ऑनर एसोसिएशन के द्वारा पुरजोर विरोध किया जा रहा है. इसको लेकर भोजपुर जिले में पांच स्थानों पर टेंट लगाकर संशोधन की मांग को लेकर ट्रक मालिक अपना विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. भोजपुर जिले में कोईलवर प्रखंड के चांदी, मनभावन चौक, जीरोमाइल, चानन, टोल प्लाजा, बाइपास, जीरोमाइल चौक एवं कोईलवर में टेंट लगाकर अपनी मांगों के समर्थन में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. भोजपुर जिला ट्रक ऑनर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष अजय कुमार यादव ने कहा कि नये खनन नीति में तकनीकि सुधार नहीं होने से खनन नियमों के शत-प्रतिशत पालन करने वाले ट्रक व्यवसायी दंड के दायरे में आ जा रहे हैं. ऐसी स्थिति में ट्रक मालिक बर्बाद हो जा रहे हैं और ट्रक व्यवसाय पर भी व्यापक असर पड़ रहा है. अपने व्यवसाय को बचाने को लेकर ट्रक मालिकों के द्वारा सरकार से बिहार खनन नीति 2024 में संशोधन की मांग की जा रही है. ट्रक मालिकों की मांगों पर अगर सरकार संसोधन नहीं करती है तो आंदोलन को आगे बढ़ाने का निर्णय भी लिया जायेगा. बटवा संगठन के अध्यक्ष पंकज सिंह ने कहा कि पूरे बिहार में जगह-जगह पर ट्रक मालिकों द्वारा टेंट लगाकर विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है. इस हड़ताल में ट्रक मालिकों ने भरपूर सहयोग दिया है. एक मार्च से ही ट्रक मालिक अपने वाहनों को खड़ा करने लगे हैं. वहीं ट्रक मालिकों ने कहा कि नई दमनकारी खनन नीति ने हम लोगों के व्यवसाय को हासिए पर ला दिया है. नियम संगत परिचालन करने के बाद भी ट्रक व्यवसायी दस लाख रुपये दंड के दायरे में आ जाते हैं. खनन विभाग, परिवहन विभाग के साथ- साथ पुलिस इस कानून का भय दिखाकर ट्रक मालिकों के आर्थिक शोषण कर रहे हैं. इस पर किसी का कोई नियंत्रण नहीं है. वहीं जिलाध्यक्ष अजय यादव, प्रदेश सचिव दीपनारायण सिंह दीपक समेत कई पदाधिकारियों ने बताया कि हमारी मांगें छह चक्का से लेकर सभी बड़ी गाड़ियों के खनिज को लेकर परिचालन करने के लिए सुचारू व्यवस्था की जाये. क्षमता अनुसार माइनिंग चालान लेकर चलने वाले वाहनों को किसी कारणवश चालान की अवधि समाप्त होने पर वैसे गाड़ी को जुर्माना से मुक्त रखा जाये, दोषी वाहन स्वामी से जुर्माना लेकर ऑन स्पाॅट गाड़ी को मुक्त किया जाय, दोषी वाहन स्वामी/चालक पर प्राथमिकी की प्रक्रिया से मुक्त रखा जाय, क्योंकि जुर्माने की रकम जमा करने के उपरांत गाड़ी को थाना से मुक्त कराने में माह-दो माह का समय व्यतीत हो जाता है. भींगा बालू परिवहन करने पर गाड़ी मालिक पर जुर्माना किया जाता है, जबकि इसके लिए सिर्फ घाट संवेदक जिम्मेवार हैं. भींगा बालू लोड करने से हम गाडी मालिक को स्वतः नुकसान होता है, रेलवे के द्वारा गिट्टी और बालू की ढुलाई को जैसे अस्थायी परमिट से मुक्त रखा गया है, ट्रकों को भी अस्थायी परमिट से मुक्त रखा जाये. इसी तरह इनकी कुल 18 मांगें हैं.

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