तीसरी सोमवारी पर शिव और नागदेव की पूजा, मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
बाबा लंगट नाथ को जलाभिषेक करते
Nag Panchami: सावन माह की तीसरी सोमवारी और नागपंचमी के विशेष संयोग पर शिव मंदिरों में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा. भक्तों ने विधि-विधान से भगवान शिव और नागदेव की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की.
Nag Panchami: श्रावण मास की शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि और सावन की तीसरी सोमवारी पर सोमवार को प्रखंड सहित जिले के शिव मंदिरों में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा. ब्रह्म मुहूर्त से ही श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए मंदिरों में कतारबद्ध नजर आये. जिले के प्रमुख शिवालयों में दिनभर भक्तों की भीड़ रही.
बाबा लंगटनाथ धाम, पतलेश्वर महादेव, सिद्धेश्वर महादेव, महादेवा महादेव, कुंडेश्वर महादेव, कुंडवा टोला महादेव और बहरी महादेव सहित अन्य मंदिरों में श्रद्धालुओं ने भगवान शिव की विधिवत पूजा-अर्चना की. भक्तों ने भगवान शिव के मृत्युंजय, नीलकंठ और नटराज स्वरूप की आराधना कर मनोवांछित फल की कामना की.
जलाभिषेक के साथ हुआ रुद्राभिषेक
सावन के तीसरे सोमवार को श्रद्धालुओं ने भगवान शिव को जलाभिषेक के साथ बिल्वपत्र, अक्षत, पुष्प, मधु, धूप, दीप, गंध और दूध अर्पित किया. लगभग सभी प्रमुख मंदिरों में जलाभिषेक के साथ रुद्राभिषेक भी कराया गया.
कई श्रद्धालुओं ने घरों में पार्थिव पूजन और रुद्राभिषेक किया. महिलाओं ने भी बड़ी संख्या में सोमवारी व्रत रखा और भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा-अर्चना कर सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की.
सोमवारी और नागपंचमी का बना विशेष संयोग
इस बार तीसरी सोमवारी के साथ नागपंचमी का संयोग होने से श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला. लोगों ने भगवान शिव के साथ उनके कंठहार नागदेव की भी पूजा-अर्चना की.
पंडित विवेकानंद पांडेय ने बताया कि सावन के तीसरे सोमवार को शिव पूजन के साथ नागदेव की पूजा का भी विशेष संयोग बना. पूरे दिन पूजा-अर्चना के लिए शुभ समय रहा. श्रद्धालुओं ने श्रद्धा के साथ दोनों देवों की पूजा कर मनोवांछित फल की कामना की.
नागदेवता की भी विधिवत पूजा
सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी को नागपंचमी का पर्व भी परंपरागत तरीके से मनाया गया. लोगों ने नागदेवता की पूजा कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल की कामना की.
परंपरा के अनुसार कई घरों में सफाई के बाद दरवाजे या निकास द्वार पर गोबर से सांप की आकृति बनायी गयी. श्रद्धालुओं ने मिट्टी के पात्र में गाय का दूध, लावा और गुड़ का प्रसाद अर्पित कर नागदेवता की पूजा की.
प्रकृति और जीव-जंतुओं के संरक्षण का संदेश
नागपंचमी का पर्व प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान का संदेश भी देता है. श्रद्धालुओं ने परंपरा और आस्था के साथ नागदेवता की पूजा कर परिवार के लोगों के मंगल की कामना की. पूरे क्षेत्र में दिनभर पूजा-अर्चना और धार्मिक गतिविधियों का माहौल बना रहा.
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