प्लास्टिक के थैले से पर्यावरण को भारी नुकसान : डॉ संजय कुमार

Updated at : 06 Jun 2025 10:54 PM (IST)
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प्लास्टिक के थैले से पर्यावरण को भारी नुकसान : डॉ संजय कुमार

उसी तरह से सुहिया भांगड़ आर्द्रभूमि भी आपकी एक सामूहिक/ सामुदायिक संपत्ति है. जिसे सुरक्षित रखना आप सबकी जिम्मेदारी है.

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आरा. विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर महाराजा कॉलेज के स्नातकोत्तर (भूगोल विभाग) के द्वारा वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, भोजपुर के संयुक्त तत्वावधान में शाहपुर प्रखंड के सुहिया भागड़ स्थित आर्द्रभूमि के पर्यावरण को बचाने हेतु कई कार्यक्रम किया गया. कार्यक्रम के आरंभ में वन विभाग की ओर से वन पदाधिकारी आरती कुमारी ने कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. संजय कुमार का अभिवादन बुके और एक स्मृति चिह्न (ब्लैक बक का) देकर किया. इसके बाद उन्होंने पर्यावरण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए वन विभाग द्वारा इस क्षेत्र के पर्यावरण के सुधार हेतु किए जा रहे प्रयासों से लोगों को अवगत कराया. मुख्य अतिथि के रूप में अपने संबोधन में प्रो संजय कुमार ने कहा कि जिस तरह मकान और जेवर आपकी संपत्ति है. उसी तरह से सुहिया भांगड़ आर्द्रभूमि भी आपकी एक सामूहिक/ सामुदायिक संपत्ति है. जिसे सुरक्षित रखना आप सबकी जिम्मेदारी है. प्रो संजय कुमार ने पर्यावरण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 1973 से विश्व पर्यावरण दिवस मनाने का उद्देश्य यह है कि लोगों को पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए जागरूक किया जा सके. प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग और उसके दुष्प्रभाव से उपस्थित लोगों को अवगत कराते हुए कहा कि प्रतिदिन हम बाजार से सामान या सब्जी खरीदकर लाते समय प्लास्टिक बैग भी घर लेकर चले आते हैँ. यह प्लास्टिक कई तरह से नुकसान करता है. जब हम घर से बाहर अपशिष्ट खाने के सामान को प्लास्टिक की थैली में डालकर बाहर या भांगड़ के किनारे फेंक देते हैँ, तब हमारे जानवर खाने के सामान के साथ- साथ प्लास्टिक भी खा लेते हैं. प्लास्टिक, नैसर्गिक रूप से न तो पचने वाला और न ही गलने वाला है. इसका असर यह होता है कि उस जानवर की पाचन शृंखला बिगड़ जाती है और उसकी मृत्यु भी हो जाती है. इसी तरह गर्मी के कारण बड़े प्लास्टिक थैली से छोटे- छोटे कण नैनो प्लास्टिक के रूप में पानी में चले जाते हैँ. जिससे जलीय जीवों का आहार और पाचन शृंखला बिगड़ जाता है और उनकी मृत्यु हो जाती है और हमें पता भी नहीं चलता यानी इस प्लास्टिक के कारण यहां की जैव विविधता पर भी बुरा असर पड़ रहा है. इसलिए जरुरी है कि सरकार द्वारा इस सुहिया भांगड़ क्षेत्र को प्लास्टिक मुक्त क्षेत्र घोषित किया जाना चाहिए. प्रो संजय कुमार ने कहा कि आधुनिक तकनीक यानी ड्रोन की सहायता से इस सुहिया भांगड़ क्षेत्र का नियमित निगरानी और आकलन किया जाना जरूरी है ताकि इस संपत्ति/धरोहर के पर्यावरण को दूषित होने से रोका जा सके. इसी उद्देश्य को लेकर स्नातकोत्तर भूगोल विभाग ने इस क्षेत्र में सफाई अभियान ग्रामीणों के सहयोग से किया. इसके बाद पौधारोपण का कार्य वन विभाग के सहयोग से और जन जागरूकता का कार्यक्रम किया गया. कार्यक्रम के अंत में वन पदाधिकारी आरती कुमारी ने धन्यवाद ज्ञापन किया. इस कार्यक्रम में भूगोल विभाग के कई छात्र-छात्राओं ने भाग लिया. कार्यक्रम का समन्वय डॉ अरबिंद कुमार सिंह ने किया.

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AMLESH PRASAD

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