ePaper

मन की गति बहुत ही चंचल है : श्री जीयर स्वामी जी महाराज

Updated at : 09 Jul 2025 7:03 PM (IST)
विज्ञापन
मन की गति बहुत ही चंचल है : श्री जीयर स्वामी जी महाराज

परमानपुर चातुर्मास्य व्रत स्थल पर श्रीलक्ष्मी प्रपन्न जीयर स्वामी जी महाराज के प्रवचन में उमड़ रहे भक्त

विज्ञापन

आरा.

परमानपुर चातुर्मास्य व्रत स्थल पर श्रीलक्ष्मी प्रपन्न जीयर स्वामी जी महाराज ने मन को बहुत ही चंचल बताया. इस दुनिया में यदि सबसे तेज चलने वाला कोई भी चीज है, तो वह मन है. मन हमारा इतना चंचल है कि हम यहां बैठे हुए हैं, लेकिन मन हमारा हजारों किलोमीटर दूर कहीं पर चला गया है. यह मन हवा, अग्नि, सूर्य, चंद्रमा, पृथ्वी, आकाश से भी अधिक चंचल है.

वैज्ञानिकों के द्वारा हवा पर तो काबू पा लिया गया है. उदाहरण देते हुए स्वामी जी ने कहा हवा को टायर में भरकर के काबू किया जा सकता है. हवा को बैलून में भरकर के काबू किया जा सकता है और भी अन्य कामों के लिए हवा को काबू कर सकते हैं, लेकिन मन हमारा बहुत चंचल है. इस चंचल मन को काबू में कैसे किया जा सकता है. मीडिया संचालक रविशंकर तिवारी ने बताया कि स्वामी जी ने कहा मन ही मृत्यु और मोक्ष का कारण है. मन में अच्छे विचार डालकर मन को काबू किया जा सकता है. मन को काबू करने के लिए अध्यात्म, साधना, शिक्षा, संस्कार, शुद्ध आहार, व्यवहार से मन को पवित्र किया जा सकता है. जब हमारा मन पवित्र होगा. तभी हमारे मन में अच्छे विचार भी आएंगे. जिससे हम अपने मन पर काबू पा सकते हैं.

कभी-कभी यह चंचल मन बड़े-बड़े संत को भी भ्रमित कर देता है. लेकिन बड़े-बड़े ऋषि महर्षि तपस्वी इस चंचल मन को भी अपनी तप और साधना से साधने का निरंतर प्रयास करते रहते हैं.जीवन में निरंतर काम करते रहना चाहिए. कर्म का त्याग ही मन को और गतिशील बना देता है. कहा जाता है कि खाली मस्तिष्क जो है कई रोगों का घर होता है. इसीलिए आप अपने मस्तिष्क दिमाग शरीर को किसी न किसी अच्छे कार्य में लगा कर रखें. जिससे आपके मन दिमाग में खालीपन नहीं होगा. जब हम निरंतर अच्छे कार्यों में लगे रहते हैं. तब हमारे मन में अच्छे विचार भी आते हैं. इसीलिए मन को मनुष्य का भाग्य और दुर्भाग्य का विधाता भी कहा गया.प्रवचन करते हुए स्वामी जी ने व्यक्ति और व्यक्तित्व पर भी चर्चा किया. व्यक्ति के व्यक्तित्व के आधार पर आदर सम्मान या अपमान होता है. भारतीय दर्शन एक ऐसा दर्शन है जिसमें हम किसी व्यक्ति के अच्छे कार्यों की सराहना करते हैं तथा उसके बुरे कर्मों का हम अनादर भी करते हैं.रावण के द्वारा शिव तांडव लिखा गया था. जिसको आज हम लोग स्मरण करते हैं. शिवजी को दो चीज पसंद है. पहले उनके ससुर का जो बुराई करता है. दूसरा शिव तांडव का जो पाठ करता हो.उस पर भगवान शिव बहुत प्रसन्न होते हैं.रावण के द्वारा लिखे गए शिव तांडव का हम लोग आदर करते हैं. लेकिन रावण के द्वारा जिस प्रकार से गलत कामों को किया गया उसी के प्रतीक आज हम लोग रावण के गलत विचार को पुतला के रूप में जलते हैं. अच्छे व्यक्ति के गुण का हमेशा सम्मान होना चाहिए. हर व्यक्ति में कुछ ना कुछ अच्छे गुण होते हैं. चाहे वह व्यक्ति छोटा हो या बड़ा हो. उसके गुण का सम्मान तो होना ही चाहिए. श्रीमद्भागवत कथा को आगे बढ़ाते हुए स्वामी जी ने नारद जी के श्रीमद् भागवत श्रवण करने की कथा को विस्तार से समझाया. नारद जी जब सनक, सनंदन, सनातन, और सनत्कुमार से श्रीमद् भागवत कथा सुन रहे थे. उस पर चर्चा करते हुए स्वामी जी ने कहा श्रीमद् भागवत कथा सुनने से भक्ति ज्ञान वैराग्य को शक्ति प्राप्त हुई. भक्ति के दो पुत्र थे ज्ञान और बैग. भक्ति जो एक नारी के रूप में बैठी हुई थी. वही उनके दो पुत्र मरनशील अवस्था में थे. जिनको देखने पर पता चल रहा था कि उनकी आयु बहुत ज्यादा हो गई है. उस समय नारद जी ने उनसे पूछा देवी जी आप यहां विलाप कर रही हैं. यह आपके कौन हैं. भक्ति देवी ने कहा यह मेरे पुत्र हैं. नारद जी मन ही मन सोचने लगे कि इनका उम्र बहुत कम दिखाई पड़ रहा है तथा जो लोग भी यहां मरनशील अवस्था में है.उनकी आयु अधिक दिखाई पड़ रही है. ऐसा कैसे हो सकता है कि स्त्री का उम्र कम हो और उनके पुत्र का उम्र ज्यादा हो मन ही मन ही सवाल को लेकर के मन में विचार कर रहे थे. भक्ति देवी के द्वारा नारद जी को उनके पुत्र के बारे में बताया गया. नारद जी यह हमारे पुत्र ज्ञान और वैराग्य हैं. आज कलयुग में लोग भक्ति ज्ञान और वैराग्य को त्याग दियेे. जिसके कारण ही ज्ञान और वैराग्य मरनशील अवस्था में पड़े हुए हैं. नारद जी ने पूछा आखिर इसका उपाय क्या है. भक्ति देवी ने कहा कलयुग में लोग ज्ञान और वैराग्य को भूल गए जिसके कारण ही यह दशा हुई है. नारद जी ने कहा कि इनको ठीक करने का उपाय क्या है. भक्ति देवी ने कहा इनको यदि श्रीमद् भागवत कथा सुनाई जाए तो यह ठीक हो सकते हैं. इसके बाद नारद जी उस जगह पर पहुंचे जहां पर लोमहर्षण सूत जी और सनक, सनंदन, सनातन, और सनत्कुमार ऋषि के द्वारा श्रीमद् भागवत कथा कहीं जा रही थी. वहीं से भक्ति के पुत्र ज्ञान और वैराग्य को श्रीमद् भागवत कथा श्रवण कराया गया, जिसके बाद भक्ति के पुत्र ज्ञान और वैराग जिंदा होकर जहां कथा हो रहा था वहां पर पहुंच गये.

आज मनाया जाएगा गुरु पूर्णिमा महोत्सवगुरु पूर्णिमां का मतलब समझाते हुए स्वामी जी ने कहा कि व्यास जी के जन्म जयंती के अवसर पर हर साल गुरु पूर्णिमा मनाया जाता है. व्यास जी जिनके द्वारा श्रीमद् भागवत की रचना की गई है. जिन्होंने अपने जीवन काल में 18 पुराणों की रचना की. वैसे गुरु तपस्वी व्यास जी के जन्म जयंती के रूप में गुरु पूर्णिमा मनाया जाता है. स्वामी जी ने कहा की परमानपुर चातुर्मास्य व्रत स्थल पर वैसे कोई विशेष आयोजन नहीं होगा, लेकिन सभी श्रद्धालु भक्तों के लिए प्रसाद पानी की व्यवस्था की गयी है. वैसे गुरु पूर्णिमा के अवसर पर स्वामी जी के दर्शन करने के लिए बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश सहित अन्य प्रदेशों से भी श्रद्धालु भक्त आयेंगे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
DEVENDRA DUBEY

लेखक के बारे में

By DEVENDRA DUBEY

DEVENDRA DUBEY is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन