आरा में भिखारी ठाकुर की पुण्यतिथि पर परिचर्चा और कवि सम्मेलन, लोक कलाकार को याद कर गूंजा भोजपुरी स्वाभिमान

Author Kumar ravindra|Edited by Ragini Sharma
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पुण्यतिथि पर भिखारी ठाकुर को श्रद्धांजलि देते साहित्यकार

पुण्यतिथि पर भिखारी ठाकुर को श्रद्धांजलि देते साहित्यकार

आरा के सेमरा में लोक कलाकार भिखारी ठाकुर की पुण्यतिथि पर एक भावपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन हुआ. वक्ताओं ने उन्हें भोजपुरी भाषा और समाज सुधार का पुरोधा बताया. कवि सम्मेलन में सामाजिक सरोकारों को उठाया गया.

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Arrah Bhikhari Thakur Punyatithi : आरा के बड़हरा प्रखंड स्थित सूरज नगर, सेमरा में लोक कलाकार भिखारी ठाकुर की पुण्यतिथि पर एक भावपूर्ण और विचारशील कार्यक्रम का आयोजन किया गया. सजग रचनाकार संस्थान के बैनर तले आयोजित इस कार्यक्रम में परिचर्चा और कवि सम्मेलन के जरिए भोजपुरी के इस महान कलाकार को याद किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता महेंद्र प्रताप शर्मा ने की, जबकि संचालन कमलेश्वर प्रसाद मालाकार ने संभाला. शुरुआत भिखारी ठाकुर के तैलचित्र पर सामूहिक पुष्पांजलि अर्पित कर की गई, जहां उपस्थित लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी.

परिचर्चा के दौरान वक्ताओं ने भिखारी ठाकुर के योगदान को विस्तार से याद किया और उनके विचारों की प्रासंगिकता पर जोर दिया. वक्ताओं का कहना था कि भिखारी ठाकुर केवल कलाकार नहीं थे, बल्कि समाज को दिशा दिखाने वाले एक सशक्त सुधारक भी थे.

Arrah News : भोजपुरी भाषा और समाज सुधार पर जोर

परिचर्चा में भाग लेते हुए दयाशंकर राय ने कहा कि भिखारी ठाकुर के साथ-साथ भोजपुरी भाषा को भी वह सम्मान मिलना चाहिए, जिसकी वह हकदार है. उन्होंने कहा कि भाषा और संस्कृति को बचाए रखना समाज की जिम्मेदारी है. वहीं समाजसेवी और प्रखर वक्ता सी. पी. चक्रवर्ती ने भिखारी ठाकुर के जीवन और कृतित्व पर विस्तार से चर्चा करते हुए उन्हें उन्नीसवीं सदी के महान समाज सुधारकों में शुमार बताया.

कार्यक्रम में मौजूद पूर्व मुखिया विजय कुमार राय, विनोद कुमार सिंह, संजय कुमार राय, बीरबल कुमार, राजनंदन ठाकुर, नीरज ठाकुर, अजय राय और जय शंकर सिंह ने कहा कि भिखारी ठाकुर ने अपनी कालजयी रचनाओं जैसे बिदेशिया, गबरघिचोर, भाई-विरोध, पियवा निसइल और बेटी बेचवा के माध्यम से समाज में फैली कुरीतियों और अंधविश्वासों पर गहरा प्रहार किया. यही कारण है कि उनकी रचनाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं.

वक्ताओं ने यह भी कहा कि भिखारी ठाकुर ने अपने नाट्य मंचन के जरिए समाज को जागरूक करने का काम किया. उनके नाटकों में सामाजिक बुराइयों के खिलाफ एक स्पष्ट संदेश होता था, जो आज भी लोगों को सोचने पर मजबूर करता है. महान साहित्यकार राहुल सांकृत्यायन द्वारा उन्हें "अनगढ़ हीरा" कहे जाने का जिक्र करते हुए वक्ताओं ने कहा कि यह उनके प्रतिभा का सटीक सम्मान है.

Bhikhari Thakur : कवि सम्मेलन में गूंजे सामाजिक सरोकार

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ, जहां भोजपुरी और हिंदी के कवियों ने अपनी रचनाओं के जरिए सामाजिक मुद्दों को उठाया. भोजपुरी कवि सुरेंद्र शर्मा विशाल ने अपनी कविता के माध्यम से सामाजिक संवेदनाओं को उकेरा, वहीं सी. पी. चक्रवर्ती ने मां और संतान के रिश्ते पर आधारित रचना प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावुक कर दिया. कवि रजनीश कुमार गौरव ने अपनी कविता के जरिए देश के वर्तमान हालात पर तीखा व्यंग्य किया, जबकि सेवानिवृत्त शिक्षक और सांस्कृतिक लोकस्वर पत्रिका के प्रधान संपादक राजाराम सिंह "प्रियदर्शी" ने अपनी कविता के माध्यम से देश की स्थिति पर चिंता जाहिर की. इसके अलावा संस्थान के सचिव अर्जुन कुमार ठाकुर, सुरेश प्रसाद सिंह और हाकिम प्रसाद ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं.

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कार्यक्रम का संचालन कर रहे कमलेश्वर प्रसाद मालाकार ने भिखारी ठाकुर को युगदृष्टा, समाज सुधारक और भोजपुरी भाषा का महान शिल्पकार बताया. अंत में संस्था के सचिव अर्जुन कुमार ठाकुर ने धन्यवाद ज्ञापन किया.

इस मौके पर पवन कुमार, अनिल कुमार ठाकुर, चंद्र भूषण सिंह, शत्रुघ्न ठाकुर, रामनिवास पंडित समेत क्षेत्र के कई साहित्य प्रेमी मौजूद रहे. यह आयोजन न सिर्फ भिखारी ठाकुर को श्रद्धांजलि देने का माध्यम बना, बल्कि भोजपुरी भाषा और संस्कृति के प्रति लोगों में नई जागरूकता भी पैदा कर गया.

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