भरत तिवारी एनकाउंटर केस: परिवार को बड़ी राहत, पुलिस फायरिंग मामले में दर्ज FIR से पिता-भाई का नाम हटा
भरत तिवारी की फाइल फोटो
Bharat Tiwari Encounter Case: भोजपुर के चर्चित बिलौटी गांव के भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में भरत भूषण तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी को बड़ी राहत मिली है. पुलिस फायरिंग मामले में दर्ज FIR के सुपरविजन के बाद दोनों का नाम हटा दिया गया है.
Bharat Tiwari Encounter Case: आरा से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार, भोजपुर के बहुचर्चित बिलौटी एनकाउंटर मामले में भरत भूषण तिवारी के परिजनों को एक बड़ी राहत मिली है. पुलिस टीम पर जानलेवा फायरिंग करने के आरोप में दर्ज प्राथमिकी (केस) से मृतक भरत भूषण तिवारी के बेकसूर पिता और भाई का नाम आधिकारिक तौर पर हटा दिया गया है. इस केस के गहन सुपरविजन (वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा मामले की समीक्षा) के बाद दोनों को पूरी तरह निर्दोष पाया गया, जिसके बाद भोजपुर पुलिस अधीक्षक राज की ओर से इस नाम विलोपन की पुष्टि की गयी है.
आर्म्स एक्ट और सहयोग करने का था आरोप
इस मामले के पूर्व घटनाक्रम के अनुसार, पुलिस पर अचानक फायरिंग करने के दर्ज केस में भरत भूषण तिवारी के पिता और भाई के खिलाफ मुख्य रूप से आर्म्स एक्ट के उल्लंघन और वारदात के दौरान भरत भूषण तिवारी को सहयोग करने का गंभीर आरोप लगाया गया था. तत्कालीन जांच के आधार पर दोनों को नामजद अभियुक्त बनाया गया था, लेकिन परिजनों और स्थानीय समाज द्वारा लगातार इसे साजिश बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही थी. अब वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की समीक्षा में इन आरोपों को आधारहीन पाया गया है.
शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष ने दर्ज कराया था केस
उल्लेखनीय है कि बीते 17 जून की सुबह पुलिस टीम पर फायरिंग होने के मामले में शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार के लिखित बयान पर यह मामला दर्ज हुआ था. इसमें मुख्य आरोपी भरत भूषण तिवारी, उसके पिता काशी नाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न सुसंगत धारा 132, 109(1), 351(2) और 352 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गयी थी. घटना के बाद से ही इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय लोगों और विभिन्न सामाजिक संगठनों में भारी आक्रोश व्याप्त था.
भोजपुर एसपी ने की नाम हटाने की पुष्टि
पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा इस संवेदनशील केस के गहन सुपरविजन और तकनीकी साक्ष्यों की जांच के बाद दोनों का नाम एफआईआर से हटाने का अंतिम निर्णय लिया गया. एसपी राज ने बताया कि जांच में पिता और भाई की घटनास्थल पर मौजूदगी या अपराध में संलिप्तता का कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिला है. इस कानूनी राहत के बाद भरत भूषण तिवारी के परिजनों ने संतोष व्यक्त किया है, हालांकि वे अब भी पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की अपनी मांग पर अड़े हुए हैं.
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By Vikash Jha
विकाश झा एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार और कंटेंट प्रोफेशनल हैं, जिन्हें मीडिया, डिजिटल कंटेंट और सोशल मीडिया कम्युनिकेशन के क्षेत्र में छह वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह प्रभात खबर में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन में स्नातक और माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है। पत्रकारिता की शुरुआत वर्ष 2020 में भोपाल से हुई, जिसके बाद उन्होंने ETV Bharat, Bharat Express और News24 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में विभिन्न जिम्मेदार भूमिकाओं का निर्वहन किया। News24 से आगे बढ़ते हुए उन्होंने Adglobal360 India Pvt. Ltd. के माध्यम से बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) में कंटेंट राइटर के रूप में कार्य किया। स्पोर्ट्स, हाइपरलोकल और पॉलिटिकल पत्रकारिता उनकी विशेष रुचि और विशेषज्ञता के क्षेत्र हैं। क्रिकेट के प्रति उनका गहरा लगाव है और वे क्रिकेट को सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि अपनी लेखनी का महत्वपूर्ण विषय मानते हैं। उन्हें यात्रा करना, नए लोगों और स्थानों को जानना तथा समाज और राजनीति से जुड़े विषयों पर लिखना पसंद है। मूल रूप से बिहार के समस्तीपुर जिले के रहने वाले विकाश डिजिटल मीडिया की तेज रफ्तार दुनिया में तथ्यों पर आधारित, प्रभावशाली और पाठक-केंद्रित कंटेंट तैयार करने के लिए जाने जाते हैं।
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