मुख्यमंत्री ग्रामीण पथ योजना पर सवाल, भोजपुर में बनने के एक सप्ताह में ही उखड़ी सड़क; ग्रामीणों ने जताया विरोध

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Arrah News: भोजपुर में मुख्यमंत्री ग्रामीण पथ अनुरक्षण कार्यक्रम के तहत बनी सड़क निर्माण के महज एक सप्ताह बाद ही उखड़ने लगी. करीब 30 लाख रुपये की लागत से बनी सड़क की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं.

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Arrah News:(नरेन्द्र प्रसाद सिंह) भोजपुर जिले के गड़हनी प्रखंड में सड़क निर्माण कार्य में कथित अनियमितता का मामला सामने आया है. मुख्यमंत्री ग्रामीण पथ अनुरक्षण कार्यक्रम के तहत बनी सड़क निर्माण के महज एक सप्ताह बाद ही उखड़ने लगी है. इससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है और निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण में मानकों की खुलेआम अनदेखी की गई, जिसके कारण नई सड़क भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गई है.

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पड़रिया मोड़ से पथार गांव तक बनी है सड़क

जानकारी के अनुसार, यह सड़क गड़हनी प्रखंड के पड़रिया मोड़ से पथार गांव तक बनाई गई है. सड़क की कुल लंबाई 1.46 किलोमीटर है. इस परियोजना का कार्य मुख्यमंत्री ग्रामीण पथ अनुरक्षण कार्यक्रम के तहत कराया गया है. निर्माण कार्य की शुरुआत 18 मार्च 2024 को हुई थी, जबकि इसे 19 मार्च 2025 तक पूरा किया जाना था. हालांकि निर्धारित समयसीमा समाप्त होने के कई महीने बाद सड़क का निर्माण पूरा किया गया. इस सड़क का निर्माण कार्य ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल जगदीशपुर के कार्यपालक अभियंता की देखरेख में कराया गया.

30 लाख से अधिक की लागत से बना सड़क मार्ग

ग्रामीणों के अनुसार, सड़क निर्माण पर लगभग 30.06 लाख रुपये खर्च किए गए हैं. इसके अलावा अगले पांच वर्षों तक सड़क के रखरखाव के लिए 13.20 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि भी निर्धारित की गई है. इसके बावजूद सड़क की हालत बेहद खराब हो चुकी है और जगह-जगह से सड़क उखड़ने लगी है.

सड़क बनने के एक सप्ताह बाद ही उखड़ी परत

ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य पूरा होने के महज एक सप्ताह बाद ही सड़क की ऊपरी परत उखड़ने लगी. कई जगहों पर गिट्टी बाहर निकल आई है और सड़क टूटने लगी है. लोगों का कहना है कि पहले की सड़क की स्थिति इससे बेहतर थी, लेकिन नई सड़क बनने के बाद आवागमन और अधिक कठिन हो गया है.

जांच नहीं होने से लोगों में नाराजगी

ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क की खराब स्थिति के बावजूद अब तक किसी अधिकारी ने मौके का निरीक्षण नहीं किया और न ही निर्माण गुणवत्ता की जांच कराई गई है.लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो सरकारी राशि की खुली लूट पर रोक लगाना मुश्किल हो जाएगा.

रखरखाव राशि के उपयोग पर भी सवाल

सड़क निर्माण के साथ रखरखाव के लिए अलग से राशि निर्धारित होने के बावजूद सड़क की ऐसी स्थिति ने विभागीय कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए.

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