आरा में दो फुट जमीन के लिए खूनी संघर्ष: दो पक्षों से एक-एक की मौत, आधा दर्जन घायल

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अस्पताल में घायलों का हो रहा इलाज

आरा में दो फुट जमीन विवाद को लेकर दो पक्षों में हिंसक झड़प हुई, जिसमें राजनाथ सिंह और राधेश्याम प्रसाद की मौत हो गई. आधा दर्जन लोग घायल हैं. पुलिस की भूमिका और प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल उठ रहे हैं. घटना गांव और अस्पताल दोनों जगह हुई.

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Arrah News: चरपोखरी थाना क्षेत्र के मदई गांव में शुक्रवार देर शाम महज दो फुट जमीन के विवाद ने खूनी संघर्ष का रूप ले लिया. दो पक्षों के बीच हुई हिंसक मारपीट में दोनों ओर से एक-एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि महिलाओं समेत करीब आधा दर्जन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए. सभी घायलों का इलाज आरा के अस्पतालों में चल रहा है. मृतकों की पहचान एक पक्ष के राजनाथ सिंह (55 वर्ष) और दूसरे पक्ष के राधेश्याम प्रसाद (32 वर्ष) के रूप में हुई है. बताया जाता है कि राजनाथ सिंह किसान थे, जबकि राधेश्याम प्रसाद किसी निजी कंपनी में कार्यरत थे.

गांव से अस्पताल तक चला खूनी संघर्ष

जानकारी के अनुसार, मदई गांव निवासी जलंधर प्रसाद और रामदेव सिंह के परिवारों के बीच जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था. शुक्रवार शाम विवाद बढ़ने पर दोनों पक्षों में जमकर मारपीट हुई. घटना की सूचना मिलने पर स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार पुलिस ने स्थिति को पूरी तरह नियंत्रित करने के बजाय दोनों पक्षों को इलाज के लिए अस्पताल जाने की सलाह देकर लौट गई.

आरोप है कि बिना पुलिस सुरक्षा के दोनों पक्ष जब अस्पताल पहुंचे तो वहां भी तनाव भड़क गया और अस्पताल परिसर रणक्षेत्र में तब्दील हो गया. दोनों गुटों के बीच फिर से लाठी-डंडे चले, जिसमें गंभीर रूप से घायल राजनाथ सिंह और राधेश्याम प्रसाद की मौत हो गई.

आधा दर्जन घायल, पुलिस हिरासत में इलाज

इस हिंसक झड़प में दोनों पक्षों से महिलाओं समेत करीब आधा दर्जन लोग घायल हुए हैं. पुलिस ने सभी घायलों को अपनी निगरानी में इलाज के लिए भर्ती कराया है.

अस्पताल के सीसीटीवी कैमरों पर उठे सवाल

अस्पताल परिसर में हुई मारपीट की जांच में सीसीटीवी फुटेज अहम भूमिका निभा सकता है. हालांकि स्थानीय सूत्रों का कहना है कि अस्पताल में लगे कई सीसीटीवी कैमरे लंबे समय से खराब पड़े थे. अब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि घटना के समय कैमरे चालू थे या नहीं और वारदात रिकॉर्ड हुई है या नहीं.

प्रशासन और पुलिस की कार्यशैली पर ग्रामीणों का आक्रोश

घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लोगों का आरोप है कि जमीन विवाद को लेकर पहले भी कई बार मापी हुई थी, लेकिन अंचल प्रशासन और राजस्व कर्मियों की लापरवाही के कारण मामला लंबित रहा. ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने संवेदनशीलता नहीं दिखाई और दोनों पक्षों को बिना सुरक्षा अस्पताल भेज दिया, जिसके कारण अस्पताल परिसर में दोबारा हिंसा हुई.

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते राजस्व विभाग विवाद का समाधान कर देता और पुलिस सतर्कता बरतती, तो इस दोहरी हत्या को टाला जा सकता था.

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निखिल अनुराग

लेखक के बारे में

By निखिल अनुराग

मूलतः निखिल अनुराग. पेशे से पत्रकार. बुद्ध की धरती पर जन्म. बिहार का सबसे नवीनतम जिला (अरवल) से ताल्लुक. पढ़ाई की शुरूआत गांव से ही. फिर गंगा के तट पटना पहुंचा. ज्ञान की धरती से कुछ तालीम हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट ( माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय). नोएडा की धरती पर विद्वतजन से कुछ न कुछ सीखा. करंट अफ़ेयर्स, राजनीति, खेल, अंतरराष्ट्रीय संबंध, गाँव, खेत-किसान पसंदीदा टॉपिक. स्कूल, कॉलेज युनिवर्सिटी में यूथ से गपशप करना एनर्जी का अतिरिक्त स्रोत. साल 2020 में नोएडा से शुरू हुई इस लेखन यात्रा कलम, डेस्कटॉप, लैपटॉप के की-बोर्ड से होते हुए स्मार्ट फोन तक पहुंच गयी. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ रही है, सीखने, पढ़ने, लिखने की भूख भी बढ़ रही है. नोएडा में टीवी न्यूज में काम करने के बाद हिंदुस्तान ग्रूप होते हुए बिहार, झारखंड की सबसे पसंदीदा अखबार प्रभात खबर में कार्यरत. हां एक बात और... पढ़ने-लिखने की जिज्ञासा कभी खत्म नहीं होगी. साहित्य में बेहद दिलचस्पी.

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