Arrah News : इन दुकानों पर मिलती रहेंगी दवाएं, दवा दुकानदारों की हड़ताल में भी नहीं होगी परेशानी

प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र
Arrah News : ऑनलाइन दवाओं की बिक्री के विरोध में 20 मई को दवा दुकानें बंद हैं. मरीजों की सुविधा के लिए ड्रग एसोसिएशन ने सदर अस्पताल के पास केसरी मेडिकल और जैन मेडिकल स्टोर को खुला रखने का निर्देश दिया है.
Arrah News (नरेंद्र प्रसाद सिंह) : पूरे देश भर में ऑनलाइन दवाओं की बिक्री को लेकर सरकार के निर्णय के विरोध में रोहतास और भोजपुर सहित पूरे जिले में दवा की दुकानें 20 मई को बंद हैं. इस हड़ताल से मरीजों और उनके परिजनों को गंभीर परेशानी न हो, इसे ध्यान में रखते हुए ड्रग एसोसिएशन ने एक महत्वपूर्ण और राहत भरी घोषणा की है. एसोसिएशन ने बताया कि आम लोगों और मरीजों के व्यापक हित को देखते हुए आरा शहर में दो प्रमुख दवा दुकानों को विशेष रूप से खुला रखने का निर्देश दिया गया है.
सदर अस्पताल के पास खुली रहेंगी ये दो बड़ी दवा दुकानें
एसोसिएशन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार सदर अस्पताल के ठीक सामने उत्तर दिशा में स्थित ‘केसरी मेडिकल स्टोर’ और पूर्व दिशा में स्थित ‘जैन मेडिकल स्टोर’ को बंदी के दौरान भी खुला रखा गया है. मरीज और उनके परिजन इन दोनों चिन्हित दुकानों पर जाकर आसानी से अपनी जरूरत की दवाएं खरीद सकते हैं. इसके साथ ही सदर अस्पताल परिसर में संचालित प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र भी पूरी तरह क्रियाशील रहेगा, जहां से लोग दवाएं ले सकते हैं.
प्रखंडों और अनुमंडलीय शहरों में भी खुली रहेंगी चिन्हित दुकानें
एसोसिएशन ने साफ किया है कि आरा शहर के अलावा विभिन्न प्रखंडों और अनुमंडलीय शहरों में भी मरीजों की आपातकालीन जरूरतों के लिए कुछ विशेष दवा दुकानों को चिन्हित कर खुला रखा गया है. इसकी पूरी सूची और जानकारी स्थानीय प्रशासन को पहले ही सौंप दी गई है. इसके अतिरिक्त, लोग संबंधित क्षेत्रों में ड्रग एसोसिएशन से जुड़े पदाधिकारियों और सदस्यों से संपर्क कर यह पता लगा सकते हैं कि उनके इलाके में कौन सी दुकान खुली है ताकि संकट के समय दवा की निर्बाध आपूर्ति हो सके.
सभी प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र भी आम दिनों की तरह रहेंगे चालू
इस हड़ताल के दौरान आम जनता को सस्ती और जरूरी दवाएं मिलती रहें, इसके लिए जिले में जहां-जहां भी प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र संचालित हैं, वे सभी आम दिनों की तरह खुले रहेंगे. ड्रग एसोसिएशन ने कहा कि उनका उद्देश्य सरकार की नीतियों का विरोध करना है, न कि मरीजों की जान को जोखिम में डालना. इसलिए इस वैकल्पिक व्यवस्था के तहत स्वास्थ्य सेवाओं पर हड़ताल का न्यूनतम असर पड़ने देने की कोशिश की गई है.
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लेखक के बारे में
By निखिल अनुराग
मूलतः निखिल अनुराग. पेशे से पत्रकार. बुद्ध की धरती पर जन्म. बिहार का सबसे नवीनतम जिला (अरवल) से ताल्लुक. पढ़ाई की शुरूआत गांव से ही. फिर गंगा के तट पटना पहुंचा. ज्ञान की धरती से कुछ तालीम हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट ( माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय). नोएडा की धरती पर विद्वतजन से कुछ न कुछ सीखा. करंट अफ़ेयर्स, राजनीति, खेल, अंतरराष्ट्रीय संबंध, गाँव, खेत-किसान पसंदीदा टॉपिक. स्कूल, कॉलेज युनिवर्सिटी में यूथ से गपशप करना एनर्जी का अतिरिक्त स्रोत. साल 2020 में नोएडा से शुरू हुई इस लेखन यात्रा कलम, डेस्कटॉप, लैपटॉप के की-बोर्ड से होते हुए स्मार्ट फोन तक पहुंच गयी. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ रही है, सीखने, पढ़ने, लिखने की भूख भी बढ़ रही है. नोएडा में टीवी न्यूज में काम करने के बाद हिंदुस्तान ग्रूप होते हुए बिहार, झारखंड की सबसे पसंदीदा अखबार प्रभात खबर में कार्यरत. हां एक बात और... पढ़ने-लिखने की जिज्ञासा कभी खत्म नहीं होगी. साहित्य में बेहद दिलचस्पी.
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