भोजपुर में उपभोक्ता अधिकारों का हो रहा हनन, माप-तौल विभाग की निष्क्रियता पर उठ रहे सवाल
सांकेतिक तस्वीर
Arrah News: भोजपुर जिले में माप-तौल विभाग की कथित निष्क्रियता के कारण उपभोक्ताओं को कम वजन मिलने की शिकायतें बढ़ रही हैं. नियम के अनुसार बाटों की नियमित जांच का प्रावधान होने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से ग्राहकों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं. वहीं विभाग निर्धारित राजस्व लक्ष्य हासिल करने में भी पीछे चल रहा है.
Arrah News: (नरेन्द्र प्रसाद सिंह की रिपोर्ट) भोजपुर जिले में माप-तौल विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने लगे हैं. उपभोक्ताओं का आरोप है कि विभाग की निष्क्रियता के कारण दुकानदार मनमाने तरीके से कम वजन देकर ग्राहकों को चूना लगा रहे हैं. प्रतिष्ठानों से लेकर ठेला दुकानदारों तक कई कारोबारी बिना सत्यापित बाटों का उपयोग कर रहे हैं, जिससे उपभोक्ताओं के अधिकारों का हनन हो रहा
उपभोक्ता संरक्षण कानून का नहीं मिल रहा लाभ
सरकार ने उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम बनाया है, लेकिन धरातल पर इसका लाभ आम लोगों को नहीं मिल पा रहा है. प्रतिवर्ष उपभोक्ता दिवस पर अधिकारों की रक्षा का संकल्प लिया जाता है, लेकिन उपभोक्ताओं का कहना है कि वास्तविक स्थिति इससे अलग है और वे लगातार ठगी का शिकार हो रहे हैं.
राजस्व लक्ष्य पूरा करने में भी पिछड़ा विभाग
जानकारी के अनुसार माप-तौल विभाग को चालू वित्तीय वर्ष में लगभग 70 लाख रुपये राजस्व वसूली का लक्ष्य दिया गया था. वित्तीय वर्ष का छठा महीना समाप्त होने को है, लेकिन विभाग अब तक निर्धारित लक्ष्य का करीब 30 प्रतिशत ही हासिल कर पाया है. इससे न केवल सरकारी राजस्व प्रभावित हो रहा है, बल्कि विभागीय कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं.
वर्ष में दो बार जांच का है प्रावधान
नियमों के अनुसार प्रत्येक वर्ष कम से कम दो बार व्यापारिक प्रतिष्ठानों में उपयोग किए जा रहे बाट और माप यंत्रों की जांच होनी चाहिए. इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को सही वजन और माप उपलब्ध कराना है. लेकिन आरोप है कि अधिकांश मामलों में जांच केवल कागजों तक सीमित रह जाती है और क्षेत्रीय स्तर पर अभियान नहीं चलाए जाते.
प्रखंडों और ग्रामीण बाजारों में अधिक समस्या
जिले के 14 प्रखंड मुख्यालयों समेत दर्जनों छोटे-बड़े बाजारों में सैकड़ों दुकानें संचालित हैं. इन दुकानों में उपयोग किए जाने वाले बाटों और माप यंत्रों की नियमित जांच नहीं होने से ग्राहकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. ग्रामीण क्षेत्रों में तो कई दुकानों की वर्षों से जांच तक नहीं हुई है.
बाटों में छेड़छाड़ की शिकायतें
स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ दुकानदार बाटों का वजन कम करने के लिए उनमें छेड़छाड़ करते हैं. कई मामलों में बाट के नीचे लगे धातु को निकाल दिया जाता है या उसे घिसकर वजन कम कर दिया जाता है. नियमित निरीक्षण नहीं होने से ऐसे मामलों पर रोक नहीं लग पा रही है.
हर प्रकार की दुकान की जांच का प्रावधान
माप-तौल विभाग के नियमों के अनुसार कपड़ा दुकानों में मीटर, सब्जी और किराना दुकानों में वजन, पेट्रोल पंपों पर माप तथा सर्राफा दुकानों में तौल की जांच की जानी चाहिए. लेकिन उपभोक्ताओं का आरोप है कि नियमित जांच नहीं होने से कई स्थानों पर कम माप और कम वजन देकर ग्राहकों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है.
उपभोक्ताओं ने की कार्रवाई की मांग
स्थानीय उपभोक्ताओं ने जिला प्रशासन से माप-तौल विभाग को सक्रिय करने, नियमित जांच अभियान चलाने और दोषी दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों के अनुरूप सही वजन और माप मिल सके.
क्या बोले जिला माप तौल पदाधिकारी
बटखरों की जांच की जाएगी. कपड़ा एवं अन्य दुकानों में की मीटर की जांच की जाएगी पेट्रोल पंपों पर भी जांच की जाएगी ताकि लोगों को कम तौली का सामना नहीं करना पड़ सके.
नंद कुमार,जिला माप तौल पदाधिकारी
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लेखक के बारे में
By Nikhil Anurag
मूलतः निखिल अनुराग. पेशे से पत्रकार. बुद्ध की धरती पर जन्म. बिहार का सबसे नवीनतम जिला (अरवल) से ताल्लुक. पढ़ाई की शुरूआत गांव से ही. फिर पलायन कर गंगा के तट पटना पहुंचा. ज्ञान की धरती से कुछ तालीम हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट ( माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय). नोएडा की धरती पर विद्वतजन से कुछ न कुछ सीखा. करंट अफ़ेयर्स, राजनीति, खेल, अंतरराष्ट्रीय संबंध, गाँव, खेत-किसान पसंदीदा टॉपिक. स्कूल, कॉलेज युनिवर्सिटी में यूथ से गपशप करना एनर्जी का अतिरिक्त स्रोत. साल 2020 में नोएडा से शुरू हुई इस लेखन यात्रा कलम, डेस्कटॉप, लैपटॉप के की-बोर्ड से होते हुए स्मार्ट फोन तक पहुंच गयी. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ रही है, सीखने, पढ़ने, लिखने की भूख भी बढ़ रही है. नोएडा में टीवी न्यूज में काम करने के बाद हिंदुस्तान ग्रूप होते हुए बिहार, झारखंड की सबसे पसंदीदा अखबार प्रभात खबर में कार्यरत. हां एक बात और... पढ़ने-लिखने की जिज्ञासा कभी खत्म नहीं होगी. साहित्य में बेहद दिलचस्पी.
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