बिहार प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मेलन के प्रादेशिक अध्यक्ष व उपाध्यक्ष का किया स्वागत

Updated at : 11 Jan 2025 7:05 PM (IST)
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बिहार प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मेलन के प्रादेशिक अध्यक्ष व उपाध्यक्ष का किया स्वागत

मारवाड़ी समाज को संगठित करने को लेकर हुई बैठक

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हमें भी अब रोको-टोको व जोड़ों की नीति अपनानी चाहिए: जुगल किशोर अग्रवाल -15- प्रतिनिधि, फारबिसगंज शहर के तेरापंथ भवन के महाप्रज्ञ ध्यान कक्ष में आज बिहार प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मेलन के प्रदेश अध्यक्ष जुगल किशोर अग्रवाल उपाध्यक्ष अमर दलान के नेतृत्व में स्थानीय बिहार प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मेलन अध्यक्ष के द्वारा एक बैठक आहूत की गयी. यह बैठक मारवाड़ी समाज को संगठित करने के लिए थी जो सानंद संपन्न हुई. सम्मेलन के प्रदेश अध्यक्ष जुगल किशोर अग्रवाल व अमर दलान बिहार प्रदेश की सभी संबंधित शाखाओं का दौरा करने निकले हुए हैं. कुल बिहार की 160 शाखाओं में अभी तक फारबिसगंज को लेकर 126 शाखाओं का दौरा किया जा चुका है. इस संस्था का उद्देश्य मारवाड़ी समाज को संगठित करके उनकी एकता को बनाए रखना है. इस संस्था की शुरुआत 1934 में केंद्र बनायी गयी थी. किंतु बिहार में यह संस्था 1940 से इसी उद्देश्य को लेकर काम कर रही है. कार्यक्रम की शुरुआत नीलम बोथरा के द्वारा मंगलाचरण से की गयी. तेरापंथ सभा के अध्यक्ष महेंद्र बैद द्वारा स्वागत भाषण दिया. मंच पर आसीन जुगल किशोर अग्रवाल अमर दलान, स्थानीय सम्मेलन के नगर अध्यक्ष बच्छराज राखेचा व बिहार प्रादेशिक सम्मेलन की महिला अध्यक्षा अनीता अग्रवाल का स्वागत किया. तत्पश्चात नगर अध्यक्ष बछराज राखेचा ने आगंतुकों का स्वागत करते हुए अपने इस द्विवार्षिक कार्यकाल के दौरान सभी मारवाड़ियों को एकजुट होकर कार्य करने की प्रेरणा भी दी व अपनी नयी कार्यकारिणी टीम की घोषणा भी की. इस मौके पर अध्यक्ष जुगल किशोर ने सभी मारवाड़ी संस्थाओं से आये हुए अध्यक्ष मंत्री व अन्य पदाधिकारी को संबोधित करते हुए कहा कि अगर हमसे कोई पूछता है कि हम कौन है तो हम उसका जवाब ओसवाल अग्रवाल माहेश्वरी आदि में देते हैं. किंतु सबसे पहले हम मारवाड़ी हैं. मारवाड़ी के अंतर्गत ओसवाल,अग्रवाल ,माहेश्वरी नाई, ब्राह्मण सभी आ जाते हैं. हम अल्पसंख्यक हैं. अगर हम सभी मिल जाये तो एक मुट्ठी बनकर संगठन की ताकत को दिखा सकते हैं. यह बड़े ही दुःख की बात है कि हम दूसरे समाज की बुराइयों को तो बहुत जल्दी ग्रहण कर लेते हैं. किंतु उनकी अच्छाइयों को ग्रहण नहीं कर पाते हैं. यह मानव की बहुत बड़ी कमजोरी होती है. क्योंकि पहाड़ से उतरना तो बहुत आसान होता है लेकिन पहाड़ पर चढ़ना बहुत मुश्किल होता है. हमें भी रोको टोको व जोड़ों की नीति को अपनाना चाहिए. कार्यक्रम का कुशल संचालन आलोक दुगड़ ने किया. इस मौके पर सुभाष अग्रवाल, मोतीलाल अग्रवाल, पवन अग्रवाल,पप्पू लड्ढा, पूनम पांडया, संजय बायवाला, मनोज भंसाली सहित अन्य अन्य मौजूद थे.

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