ARARIA : अररिया के मंदिरों में आज का दर्शन : आस्था का केंद्र है जयनगर स्थित दक्षिणेश्वरी काली मंदिर

Published by :AMIT KUMAR SINH
Updated at :13 May 2026 9:02 AM
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ARARIA : अररिया के मंदिरों में आज का दर्शन : आस्था का केंद्र है जयनगर स्थित दक्षिणेश्वरी काली मंदिर

आस्था का केन्द्र बन चुका दक्षिणेश्वरी काली मंदिर के आगे देश विदेश के श्रद्धालु नतमस्तक होते देखे जाते हैं. भरगामा प्रखंड के जयनगर काली टोला में स्थित श्री श्री 108 दक्षिणेश्वरी काली मंदिर की स्थापना वर्ष 1659 ई में रामकृष्ण परमहंस जी महाराज के द्वारा की गयी थी.

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भरगामा, अररिया से राष्ट्र भूषण पिंटू की रिपोर्ट : आस्था का केन्द्र बन चुका दक्षिणेश्वरी काली मंदिर के आगे देश विदेश के श्रद्धालु नतमस्तक होते देखे जाते हैं. भरगामा प्रखंड के जयनगर काली टोला में स्थित श्री श्री 108 दक्षिणेश्वरी काली मंदिर की स्थापना वर्ष 1659 ई में रामकृष्ण परमहंस जी महाराज के द्वारा स्थापित किया गया था. ऐसी दंत कथा है कि मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की हर मनोकामना पूर्ण होती है.दीपावली के अवसर पर भव्य मेले का आयोजन होता है. जिसमें मिथिलांचल क्षेत्र के अलावा पड़ोसी देश नेपाल से भी भारी संख्या में श्रद्धालु आते हैं व मां के आगे नतमस्तक होते हैं.साथ हीं नेपाल के जड़ी बूटी बेचने वाले व्यापारी भी पहुंचकर अच्छा खासा व्यापार करते हैं.एक रात लगने वाले मेले में करोड़ों रुपए का कारोबार होता है. दीपावली की रात मंदिर परिसर में भैंस की बलि दी जाती थी लेकिन स्थानीय ग्रामीण के पहल पर अब भैस का कान काटकर छोड दिया जाता है.वहीं हजारों की संख्या में पाठा की भी बलि दी जाती है.मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित तारानंद झा ने बताया दुर दराज से आने वाले श्रद्धालु श्रद्धा भाव से मां काली के सामने अपनी मनोकामना पूर्ण होने का गुहार लगाते है.पूर्ण होने के बाद बलि प्रदान करने यहां पहुंचते हैं. जबकि मंदिर में प्रतिदिन सुबह-शाम माता को भोग लगाया जाता है.वहीं दीपावली की रात मां काली को स्वर्ण आभूषण से सुशोभित किया जाता है व पूरे विधि विधान से मां काली की पूजा अर्चना विश्वास के साथ कराया जाता है.स्थानीय ग्रामीण ने बताया कि इस मंदिर की स्थापना 1659 ईस्वी में मंदिर के वर्तमान पंडित तारानंद झा के पूर्वज बबुआ झा ने दक्षिणेश्वरी काली मंदिर कोलकाता से मिट्टी लाकर कोलकाता के हीं पंडित रामकृष्ण परमहंस जी महाराज के द्वारा कच्ची मंदिर में स्थापना किया था. तब से ही इस मंदिर का देखभाल रख रखा पूजा पाठ इत्यादि उनके वंशज के द्वारा लगातार किया जा रहा है पुनः इस मंदिर का पुनर्निर्माण वर्ष 2000 में कराया गया व अनवरत पुजा अर्चना की जाती है.

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