भाई‑बहन के प्रेम को दिखाता है सामा-चकेवा

Edited by PRAPHULL BHARTI
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कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है यह लोकपर्व

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फारबिसगंज. कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाला लोक पर्व सामा- चकेवा मिथिलांचल व कोसी में छठ पर्व के समापन के साथ ही शुरू हो जाता है. इस बार 05 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा है. कार्तिक पूर्णिमा का दिन भक्ति, दान व प्रकाश का प्रतीक है. मान्यता है कि इस दिन देवता स्वयं धरती पर आते हैं. ब्रह्मांड को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं. इस पावन दिन दीप जलाने, गंगा स्नान व दान करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है. छठ पर्व के उदीयमान सूर्य को अर्घ देने के साथ ही प्रखंड क्षेत्र की गलियां चुगला करे चुगली बिलैया करे म्याऊ. सामा चकेवा की मिथिलांचल गीतों से गूंजने लगी है. इस लोक उत्सव का समापन कार्तिक पूर्णिमा की रात में होगा. कोसी-मिथिला की संस्कृति की पहचान इस उत्सव के दौरान बहन अपने भाई की लंबी आयु, यश, शौर्य व संपन्नता की मंगल कामना करने से होती है. महिलाएं सामा चकेवा के अलावा चुगला-चुगली आदि की मिट्टी की मूर्ति अपने हाथों से निर्माण करती है. सामा खेलने के दौरान चुगला-चुगली को जलाने का उद्देश्य सामाजिक बुराइयों का नाश करना है. शाम में सामा चकेवा का विशेष शृंगार भी किया जाता है.

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