बारिश से अररिया में धान रोपनी ने पकड़ी रफ्तार, लक्ष्य का 41 फीसदी काम पूरा

Author Pankaj jha|Edited by Shruti Kumari
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अररिया में बारिश के बाद खेतों में धान की रोपनी करते किसान.

अररिया में बारिश के बाद खेतों में धान की रोपनी करते किसान.

अररिया जिले में लगातार बारिश से धान रोपनी का काम तेज हो गया है. अब तक लक्ष्य का 41% काम पूरा हो चुका है, जिससे किसानों में खुशी है. हाइब्रिड धान की खेती की ओर बढ़ता रुझान उत्पादन बढ़ाने की उम्मीद जगा रहा है.

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अररिया जिले में बीते कुछ दिनों से हो रही लगातार बारिश ने खरीफ मौसम की धान रोपनी को रफ्तार दे दी है. जिन खेतों में अब तक पानी की कमी के कारण रोपनी शुरू नहीं हो पा रही थी, वहां अब युद्धस्तर पर काम चल रहा है. हालांकि कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार निर्धारित लक्ष्य की तुलना में जिले में अब भी धान रोपनी की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी बनी हुई है.

1.24 लाख हेक्टेयर में धान खेती का लक्ष्य

कृषि विभाग ने इस खरीफ मौसम में जिले में 1,24,211.94 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया है. इसके मुकाबले अब तक करीब 42,536 हेक्टेयर क्षेत्र में ही रोपनी पूरी हो सकी है, जो कुल लक्ष्य का लगभग 41 प्रतिशत है. विभाग का मानना है कि यदि अगले कुछ दिनों तक बारिश का सिलसिला जारी रहा तो रोपनी में तेजी आएगी.

इन प्रखंडों में बेहतर रही प्रगति

विभागीय आंकड़ों के अनुसार जोकीहाट, फारबिसगंज और अररिया सदर प्रखंडों में धान रोपनी की स्थिति अन्य क्षेत्रों की तुलना में बेहतर है. वहीं कई अन्य प्रखंडों में अभी भी लक्ष्य के अनुरूप प्रगति नहीं हो सकी है. अधिकारियों का कहना है कि अगले एक सप्ताह तक मौसम अनुकूल रहा तो अधिकांश क्षेत्रों में रोपनी का कार्य तेजी से पूरा होने की उम्मीद है.

हाइब्रिड धान की खेती की ओर बढ़ रहे किसान

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जिले में किसान अब परंपरागत धान की बजाय हाइब्रिड धान की खेती की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं. कृषि विभाग की ओर से किसानों को अनुदान पर उन्नत एवं प्रमाणित बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे कम लागत में अधिक उत्पादन मिलने की संभावना बढ़ी है.

कृषि विभाग ने किसानों को दी सलाह

जिला कृषि पदाधिकारी ने किसानों से प्रमाणित बीजों का उपयोग करने, संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करने तथा खेतों से अतिरिक्त पानी की समुचित निकासी की व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है. उनका कहना है कि वैज्ञानिक पद्धति अपनाने से धान की बेहतर उपज प्राप्त की जा सकती है.


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