फारबिसगंज. शहर के श्री सिद्धसागर भवन परिसर में सनातन सत्संग समिति के तत्वावधान में आयोजित श्री रामकथा महोत्सव निरंतर श्रद्धा, भक्ति व वैराग्य का संदेश दे रहा है. ब्रह्मलीन संत आचार्य रामसुख दास महाराज के अनुयायी बालसंत श्री हरिदास महाराज के श्रीमुख से हो रहे प्रवचनों से श्रद्धालु आध्यात्मिक चेतना का अनुभव कर रहे हैं. रामकथा महोत्सव के आठवें दिन संत श्री हरिदास महाराज ने मनुष्य जीवन के परम उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि मनुष्य शरीर केवल भगवत्प्राप्ति के लिए मिला है, भोग और संग्रह में लगना मनुष्य जीवन का उद्देश्य नहीं है. यदि मनुष्य शरीर पाकर भी कोई भोग-संग्रह में लगा रहता है, तो अंत में उसे पश्चात्ताप करना पड़ता है. साधक के भीतर भगवत्प्राप्ति का उद्देश्य हर समय जाग्रत रहना चाहिए. उन्होंने बताया कि जो सच्चे हृदय से भगवान में लगे होते हैं, उनके सान्निध्य से हिंसक पशु-पक्षी भी अपनी स्वाभाविक हिंसा छोड़ देते हैं. संत-महात्माओं के निवास स्थल पर स्वतः ही शांति व विलक्षणता आ जाती है.
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