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बाढ़ के पानी से मरिया कोसी धार में बने पुल के क्षतिग्रस्त होने की आशंका, लोग चिंतित

Updated at : 29 Sep 2020 3:26 AM (IST)
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बाढ़ के पानी से मरिया कोसी धार में बने पुल के क्षतिग्रस्त होने की आशंका, लोग चिंतित

अररिया : प्रखंड क्षेत्र में लगातार बारिश के होने से जहां दर्जनों गांव के लोग बाढ़ के कहर को लेकर परेशानियों से जूझ रहे हैं. वहीं प्रखंड क्षेत्र में बहने वाली परमान नदी का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का पानी बड़ी तेजी से मरिया कोशी धार में फैलने से कोशी धार नदी का रुप ले लिया है.

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अररिया : प्रखंड क्षेत्र में लगातार बारिश के होने से जहां दर्जनों गांव के लोग बाढ़ के कहर को लेकर परेशानियों से जूझ रहे हैं. वहीं प्रखंड क्षेत्र में बहने वाली परमान नदी का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का पानी बड़ी तेजी से मरिया कोशी धार में फैलने से कोशी धार नदी का रुप ले लिया है. कोशी धार के किनारे दर्जनो गांव में बाढ़ का पानी प्रवेश करने से ग्रामीणों में काफी चिंता बढ़ गयी है.

वहीं अररिया प्रखंड व जोकीहाट प्रखंड के दरमियान चातर मटियारी के समीप मरिया कोशी धार में बना पुल बाढ़ के पानी के तेज दवाब के चपेट में है. पुल के उपर से बाढ़ का पानी बहने से पुल का एप्रोच पथ बह जाने के भय लग रहता है. यह बातें समाजसेवी अकबर आजम उर्फ पप्पू , कैलाश पासवान, तारनी पासवान, संजय सिंह, संतोष मंडल, अभियंता आशीष कुमार आदि ने कही. उन्होंने कहा दो वर्ष पूर्व में ही संवेदक के माध्यम से अप्रोच पथ का कार्य कराया गया था. लेकिन एक वर्ष के दरमियान ही अप्रोच पथ जर्जर व गड्ढे में तब्दील हो गया.

बाढ़ के पानी के दबाव में पुल का अप्रोच बहने के कगार पर है. लोगों को आवागमन में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने यह भी कहा लंबी सड़क होने को लेकर यह मार्ग ककोड़ा, बागनगर, महलगांव होते हुए जोकीहाट तक जाती है. बाढ़ के चपेट में पुल के बह जाने से दर्जनो गांव के लोगों का संपर्क जिला मुख्यालय से टूटने का आशंका लगा हुआ है.

हालांकि ग्रामीण स्तर से पुल के अप्रोच पथ को पानी के दबाव से बचाने के लिए जेसीबी से मिट्टी भराई कराया गया है. लेकिन बढ़ते जलस्तर व तेज बहाव से पुल का एप्रोच टूटने अंदेशा है. वहीं छोटी लहटौरा के मो वसीक, शाह शमशेर, मो इसलाम, दाउद, मुस्ताक, जाहिर आदि ने बताया बाढ़ का पानी चातर पंचायत स्थित वार्ड संख्या 03, 05, व 06 के छोटी लहटौरा गांव के घर आंगन में प्रवेश करने से ग्रामीणों का घर से निकलना मुश्किल है.

यहां तक खेतों में लगाये गये धान का फसल व माल मवेशी को लेकर काफी चिंता बढ़ी हुयी है. इधर बाढ़ से हो रही तबाही से निदान के लिए जन प्रतिनिधि व प्रशासन के माध्यम से बाढ़ को लेकर कोई पहल अ बतक नहीं की गयी है.

posted by ashish jha

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Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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