दृष्टि बाधित बच्चों को ब्रेल लिपि माध्यम से दी जा रही शिक्षा

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 11 Dec 2024 8:35 PM

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अभी दस बच्चे ले रहे शिक्षा

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जिले के 25 बच्चों के लिए 90 दिवसीय निःशुल्क आवासीय शिक्षा व्यवस्था शुरू

31-कमर आलम, अररियासरकार द्वारा सभी बच्चों को अनिवार्य व गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा देने के लिए शिक्षा अधिकार कानून के तहत काम कर रही है. इसी क्रम में बिहार शिक्षा परियोजना अररिया समग्र शिक्षा समावेशी शिक्षा के अंतर्गत दृष्टि बाधित बच्चों को 90 दिवसीय आवासीय नि:शुल्क शिक्षा दे रही है. शिक्षा विभाग के स्पर्श कार्यक्रम के तहत इन्हें शिक्षा प्रदान की जा रही है. 14 नवंबर बाल दिवस के दिन से जिला के एक स्कूल में संचालित है. जिसमें जिला भर से स्कूलों में नामांकित व बाहरी बच्चे भी जो दृष्टि बाधित हैं, उनके लिये जिला में एक आवासीय विद्यालय संचालित है. जिला के रानीगंज प्रखंड अंतर्गत मध्य विद्यालय धामा में संचालित इस विशेष शिक्षा केंद्र पर शिक्षा विभाग द्वारा कुल 25 बच्चे नामांकित हैं. जिन्हें यहां शिक्षा की व्यवस्था की गयी है. बच्चों के तमाम जरूरतों को यहां सरकार द्वारा पूरा किया जाता है. पढ़ाई, रहना, खाना- पीना, तेल- साबुन, कपड़ा तमाम जरूरत के सामाग्री बच्चों को विभाग द्वारा दिया जाता है. अभी कुल 10 बच्चे केंद्र पर मौजूद हैं.

ब्रेल लिपि के माध्यम से दे रहे शिक्षा

यहां पढ़ा रहे शिक्षक को भी विशेष प्रशिक्षण दिया गया जो ब्रेल लिपि के माध्यम से बच्चों को पढ़ाते हैं. केंद्र पर कार्यरत शिक्षक अश्विनी कुमार, धर्मवीर कुमार व अनिल कुमार साह शिक्षक यहां कार्यरत हैं. केंद्र प्रभारी अनिल कुमार ने बताया कि यहां पर स्कूलों में सर्वे के बाद दृष्टि बाधित बच्चे जो चिन्हित किये जाते हैं, उन्हें नामांकित कर शिक्षा दी जाती है. उन्होंने बताया कि ऐसे दृष्टि बाधित बच्चे जो देख नहीं पाते हैं, लेकिन ऐसे बच्चे मानसिक रूप से काफी तेज होते हैं. ऐसे बच्चे प्राइमरी शिक्षा के साथ-साथ उच्च शिक्षा भी प्राप्त कर सकते हैं, यहां पर बच्चों को एक स्लेट के द्वारा अंगुली से पढ़ना लिखना सिखाया जाता है जो काफी आधुनिक है.

दिव्यांगता आधारित बच्चों को नामांकन कर दिलाएं लाभ: डीईओ

जिला शिक्षा पदाधिकारी संजय कुमार ने बताया कि इससे पूर्व भी इस तरह के कई केंद्र संचालित किये जा चुके हैं. उन्होंने बताया कि इस विशेष कार्यक्रम से वैसे बच्चे जो अपनी दिव्यांगता को जीवन की असफलता नहीं बल्कि एक चैलेंज के रूप में लिया व सफलता प्राप्त की है. वैसे बच्चे निश्चित रूप से दूसरे बच्चों के लिये प्रेरणा श्रोत हैं. उन्होंने जिला के ऐसे तमाम अभिभावक व शिक्षकों से भी कहा कि अगर ऐसे बच्चे कहीं भी है व शिक्षा प्राप्त करने से वंचित हैं, उन्हें हर हाल में यहां नामांकन करा कर उन्हें शिक्षा के मुख्य धारा से जोड़ने का काम करें.

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