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बाल विवाह सभ्य समाज के लिए कलंक

Updated at : 13 Jan 2025 7:51 PM (IST)
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बाल विवाह सभ्य समाज के लिए कलंक

बाल संरक्षण समिति की बैठक आयोजित

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15-प्रतिनिधि, नरपतगंज प्रखंड क्षेत्र के पलासी पंचायत भवन में सोमवार को बाल संरक्षण समिति की बैठक मुखिया सह अध्यक्ष बीवी नौशाबा प्रवीण की अध्यक्षता में आयोजित की गयी. कार्यक्रम का संचालन जागरण कल्याण भारती फारबिसगंज के अध्यक्ष संजय कुमार ने किया. बैठक के दौरान जागरण कल्याण भारती फारबिसगंज द्वारा आयोजित कार्यक्रम में बाल संरक्षण के मामलों की रोकथाम के लिए विशेष अभियान चलाया गया. बाल विवाह एक ऐसा अपराध है जो दुनिया भर में मानव जीवन, परिवारों व समुदायों पर स्थायी प्रभाव छोड़ता है. इसी को लेकर जागरण कल्याण भारती फारबिसगंज व बाल चिल्ड्रन इकाई के सहयोग से अररिया जिला के विभिन्न क्षेत्रों में बाल विवाह मुक्त भारत अभियान, मानव तस्करी, बाल श्रम, बाल यौन शोषण मुक्त अररिया जिला बनाने का संकल्प व जागरूकता अभियान आयोजित किया जाता है. इस मौके पर मुखिया प्रतिनिधि मो फिरोज आलम ,पंचायत सचिव मनीष कुमार, कार्यपालक सहायक कुंदन शर्मा, महिला पर्यवेक्षिका निर्मला देवी, उप मुखिया गनपत सिंह, सरपंच ममता देवी, वार्ड सदस्य ललन कुमार, चंदन कुमार, राम किशोर कामत, अजय कुमार, सुनीता पासवान, मो मुमताज, मो शमशेर, मुकेश कुमार सहित अन्य लोग मौजूद थे.

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सीएचसी में शिक्षकों को दिया गया प्रशिक्षण

16- सिकटी. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिकटी में सोमवार को साप्ताहिक साप्ताहिक आयरन-फोलिक एसिड अनुपूरण कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए शिक्षक-शिक्षिकाओं को एक दिवसीय प्रशिक्षण प्रभारी चिकित्सा प्रभारी डॉ अजमत राणा की अध्यक्षता में दिया गया. प्रशिक्षण देते हुए प्रभारी चिकित्सक ने कहा कि एनीमिया एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है. जो स्वास्थ्य व तंदरुस्ती के साथ-साथ काम करने व पढ़ने की क्षमता को भी विपरीत रूप से प्रभावित करती है. राष्ट्रीय पोषण रक्ताल्पता नियंत्रण कार्यक्रम का उद्देश्य प्रजनन आयुवर्ग की महिलाओं में एनीमिया के फैलाव व संभावनाओं को बढ़ने से रोकना था. कई संशोधन के उपरांत इस कार्यक्रम में किशोरियों और 06 माह से 05 वर्ष की उम्र वर्ग के बच्चों को भी इस कार्यक्रम से जोड़ा जायेगा. हालांकि यह कार्यक्रम पिछले कई दशक से चलाया जा रहा है. फिर भी यहां एनीमिया की समस्या बनी हुई है. स्वास्थ्य विभाग, आईसीडीएस, शिक्षा विभाग को एनीमिया दूर करने के लिए कार्यक्रम को मुर्त्तरूप देना है. ताकि इसका अधिक फैलाव न हो सके. इस प्रशिक्षण में प्रत्येक विद्यालय से दो-दो शिक्षकों को दो अलग-अलग बैचों में प्रशिक्षण दिया गया. प्रशिक्षण में यूनिसेफ के आशुतोष कुमार ने कहा कि बच्चों के समुचित विकास के लिए उनका स्वस्थ होना जरूरी है. सभी शिक्षक प्रत्येक सप्ताह निश्चित रूप से अपने सामने बच्चे को आईएफए की नीली गोली का सेवन करवाएंगे. कहा कि समय से बच्चों को दवा खिलाकर प्रत्येक माह का प्रतिवेदन अगले माह की 05 तारीख तक अनिवार्य रूप से विभाग को उपलब्ध कराना होगा.

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