फारबिसगंज में आशा फैसिलिटेटरों की बैठक: गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच और 31 जुलाई तक परिवार नियोजन लक्ष्य पूरा करने के निर्देश

बैठक में आशा फेसिसिलेटरों को निर्देशित करते पीएचसी प्रभारी व बीसीएम | Prabhat Khabar Network
अररिया जिले के फारबिसगंज में स्वास्थ्य विभाग ने आशा फैसिलिटेटरों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की. इसमें गर्भवती महिलाओं की नियमित प्रसव पूर्व जांच और 31 जुलाई तक परिवार नियोजन के शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने पर जोर दिया गया.
अररिया जिले के फारबिसगंज शहर अंतर्गत रेफरल मोड़ के समीप स्थित पुरानी पीएचसी परिसर में स्वास्थ्य विभाग की एक अत्यंत महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. राजीव कुमार बसाक और ब्लॉक कम्युनिटी मोबिलाइजर (BCM) संदीप कुमार की संयुक्त उपस्थिति में हुई इस बैठक में क्षेत्र की सभी आशा फैसिलिटेटरों के साथ विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्रगति की बिंदुवार समीक्षा की गई और कई आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए.
शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव और नियमित ANC जांच पर जोर
बैठक को मुख्य रूप से संबोधित करते हुए बीसीएम संदीप कुमार ने मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी लाने और सुरक्षित प्रसव को लेकर फील्ड मॉनिटरिंग तेज करने की बात कही:
- त्रैमासिक प्रसव पूर्व जांच (ANC): सभी आशा फैसिलिटेटरों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने पोषक क्षेत्रों की आशा कार्यकर्ताओं को मुस्तैद करें, ताकि प्रत्येक गर्भवती महिला की हर तिमाही में अनिवार्य रूप से एएनसी (ANC) जांच पूरी कराई जा सके.
- संस्थागत प्रसव को बढ़ावा: ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों की महिलाओं को घर पर प्रसव कराने के जोखिमों के प्रति आगाह करने और उन्हें नजदीकी सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में ही सुरक्षित एवं संस्थागत प्रसव (Institutional Delivery) कराने के लिए प्रेरित करने को कहा गया.
31 जुलाई तक 'परिवार नियोजन पखवाड़ा' का शत-प्रतिशत लक्ष्य
जनसंख्या नियंत्रण और स्वास्थ्य प्रबंधन को लेकर चल रहे विशेष अभियान की सफलता पर भी विस्तार से चर्चा की गई:
- सक्रिय भूमिका: बीसीएम ने कहा कि 11 से 31 जुलाई 2026 तक संचालित विशेष 'परिवार नियोजन पखवाड़ा' के दौरान विभाग द्वारा तय किए गए लक्ष्यों को हर हाल में हासिल करना है. इसमें सभी आशा कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर योग्य दंपतियों की काउंसलिंग करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है.
- टीबी मरीजों की स्क्रीनिंग: 'टीबी मुक्त भारत अभियान' के तहत आशा कार्यकर्ताओं को अपने क्षेत्रों में रहने वाले संदिग्ध टीबी (Tuberculosis) रोगियों की पहचान करने और उन्हें तत्काल नजदीकी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (HWC) या पीएचसी ले जाकर बलगम व अन्य जरूरी स्क्रीनिंग जांच कराने के निर्देश दिए गए.
हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (HWC) की ओपीडी बढ़ाने की अपील
पीएचसी प्रभारी डॉ. राजीव कुमार बसाक ने बैठक में स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ मानी जाने वाली आशा कार्यकर्ताओं और फैसिलिटेटरों की भूमिका की जमकर सराहना की. उन्होंने कहा कि सरकार की कोई भी स्वास्थ्य योजना जमीनी स्तर पर तभी सफल होती है जब हमारी आशा दीदियां ईमानदारी से कार्य करती हैं.
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने निर्देश दिया कि गांवों में स्थापित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों (HWC) की बाह्य रोगी विभाग (OPD) सेवाओं में स्थानीय मरीजों की भागीदारी बढ़ाई जाए, ताकि लोगों को छोटी-मोटी बीमारियों के इलाज के लिए अनुमंडल अस्पताल या जिला अस्पताल की दौड़ न लगानी पड़े.
बैठक में उपस्थित मुख्य चेहरे:
इस आवश्यक समीक्षा बैठक में मुख्य रूप से वरिष्ठ आशा फैसिलिटेटरों में जुबेदा खातून, बीबी नाहिद, रोमा रमण, पूनम देवी, दुर्गा देवी, मोना देवी, वंदना कुमारी, सुनीता देवी, पार्वती देवी, ललिता देवी, नजरुन खातून, नायाब खातून और फूल कुमारी देवी सहित स्वास्थ्य विभाग के कई अन्य कर्मी उपस्थित थे.
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लेखक के बारे में
By कलीमउद्दीन
कलीमउद्दीन प्रिंट माध्यम में 24 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक सरोकार, अपराध, शिक्षा, राजनीतिक खबरों में रुचि रखते हैं.
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